वाइट टाइगर फिल्म का रिव्यू, फिल्म में क्या अच्छा है और क्या बुरा, किरदार, फिल्म की कहानी का प्लाट

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कैसी है वाइट टाइगर फिल्म 
दोस्तों यह फिल्म आधारित है एक नॉवल जिसका नाम है व्हाइट टाइगर जोकि भारतीय लेखक अरविंद अदिगा का पहला उपन्यास है। जिसमे की एक ड्राइवर के जीवन के संघर्षों को दिखाया गया है लेकिन इसका मतलब आप यह मतलब समझना की यह एक मोटीवेट करनी वाली कहानी है नहीं बिलकुल भी नहीं यह समाज के कुछ कड़े सत्यों को हमारे सामने उजागर करती है जिसके बारे में हमें पता है लेकिन फिर भी हम बात नहीं करना चाहते हैं। यह फिल्म जहाँ गरीबों को एक मुर्गे की तरह जिंदगी जीने वाले इंसान की तरह दिखाया गया है जिसका फायदा कभी भी और कोई भी उठा सकता है।

हमने इस फिल्म की नॉवल को नहीं पढ़ा है इसलिए हम इस फिल्म और नॉवल की तुलना नहीं करेंगे। लेकिन जरूर यहाँ कई लोग इस सवाल को पूछ सकते हैं की फिल्म के निर्देशक और स्क्रीनप्ले राइटर दोनों ही अमेरिका में रहने वाले लोग हैं जोकि काफी लम्बे समय से वहां रह रहे हैं। इसके अलावा वाइट टाइगर नॉवल के लेखक भी किसी ऐसे समाज से नहीं आते हैं जिससे आप उनके नज़रिये से फिल्म को देखें। इसलिए उनकी जानकारी भारतीय समाज के बारे में कितना सही हो सकती है यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है। 

फिल्म को अमेरिकन भाषा में ही बनाया गया है और भारतीय दर्शकों के लिए इसे हिंदी भाषा में आवाज़ दी गयी है। अगर फिल्म के गरीबों पर होने वाले जुर्म के पहलु पर बात की जाये तो फिल्म आपको इस बात पर सोचने पर मजबूर जरूर करती है की क्यों एक गरीब आदमी इतने जुल्म सेहत है। इतना सहने के बाद भी वह अपनी वफादारी और ईमानदारी को नहीं छोड़ता है चाहे उसके सांथ बुरा हो रहा हो या अच्छा। अगर त्याग की बात आती है तो क्यों इसी गरीब आदमी को समाज के आगे खड़ा कर दिया जाता है चाहे वह इंडिया की बात हो या किसी और देश की।

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क्या हमें वाइट टाइगर फिल्म देखनी चाहिए?
वाइट टाइगर फिल्म एक बार देखने लायक जरूर है इसलिए अच्छे और बुरे दोनों पहलुओं को देखते हुए आप इसे एक बार जरूर देख सकते हैं लेकिन यह फिल्म पारिवारिक नहीं है।

वाइट टाइगर फिल्म रेटिंग कितनी है?
वाइट टाइगर फिल्म को IMDB पे 10 में से 7.2 की रेटिंग मिली है और हम इस फिल्म को 5 में से 2.5 स्टार देंगे।

प्रदर्शन 
आदर्श गौरव का काम आपको फिल्म में सबसे बेहतरीन लगेगा क्यूंकि उन्होंने अपने किरदार को इस बखूबी से निभाया है की उनके बोलने के अंदाज़ और उनके शारीरिक भावों में कहीं भी अंतर नहीं देखने को मिलता है जोकि राज़ और प्रियंका में बहुत ज्यादा देखने को मिलता है।

विजय मौर्या और महेश मांजरेकर ने भी अपने किरदार के सांथ पूरा इन्साफ किया है और कहानी के अनुसार अपने किरदार को निभाया है।

डायरेक्टर से कुछ सवाल
बात की जाये इस सीरीज की कमी की तो डायरेक्टर ने बताया है की यह सीरीज की कहानी इंडिया के 2008 के आस पास के समय की कहानी है लेकिन फिर भी न जाने डायरेक्टर और लेखक के दिमाग में यह बात नहीं आयी की इंडिया के हर गांव में काफी समय पहले से ही दाँतों को साफ़ किया जाता है भले ही वह ब्रश न करते हों मगर वह प्राकर्तिक तरीकों से भी अपने दाँतों को साफ़ करते थे।

जाती भेदभाव हमारे देश का बहुत ही दुखद और गन्दा आइना है परन्तु डायरेक्टर को जरूर ध्यान रखना चाहिए की जब उनके दवारा बनाई जाने वाली कोई भी मूवी या सीरीज कई सारे देशों में दिखाई जाने वाली हो तो क्या इस तरह के दृश्य हमारे देश के लिए एक गलत उदहारण नहीं बनेंगे।

वाइट टाइगर फिल्म में क्या सही है?
वाइट टाइगर फिल्म का स्क्रीनप्ले
काफी अच्छा है इसलिए जिस मुख्य किरदार के ऊपर यह फिल्म है उसका और कई मुख्य किरदारों का किरदार काफी अच्छे से लिखा गया है जिससे आप उनसे जुड़ पाते हैं।

वाइट टाइगर फिल्म के डायरेक्शन की बात की जाये तो इसमें आपको अच्छा काम देखने को मिलता है इसलिए किरदारों, जगहों पर अच्छा काम किया है लेकिन बहुत सी जगहों पर आपको यह दृश्य थोड़ा बनावटी भी लगते हैं जोकि असलियत में देखने को कम मिलते हैं।

वाइट टाइगर फिल्म की कमियां 
फिल्म में आपको प्रियंका और राज कुमार राव की अंगेर्जी भले ही ठीक लगे लेकिन उनका यह दर्शन की वह अमेरिकन की तरह अंगेर्जी बोल सकते हैं सच में अजीब लगता है।

सच कहें तो पता नहीं क्यों राज़ कुमार राव और प्रियंका ने इस फिल्म को उतना गंभीरता से नहीं लिया जितना वह ज्यादातर लेती हैं क्यूंकि इन दोनों की ही अदाकारी आपको औसत से भी कम लगेगी।

वाइट टाइगर फिल्म का म्यूजिक औसत है इसलिए ऐसा कुछ रोमांचक और नया आपको सुनने को नहीं मिलेगा।

अगर आप इस फिल्म को हिंदी में देख रहे हो तो आप जरूर निराश हो जाओगे क्यूंकि फिल्म की डबिंग बहुत ही कम औसत की है जहाँ आपको किरदार और उसके दवारा बोले जाने वाले डायलॉग में अंतर साफ़ देखने को मिलता है।

वाइट टाइगर फिल्म में बहुत सी जगहों पर आपको ऐसा लगेगा की फिल्म बहुत स्लो चल रही है और आप बोर हो जाओगे इसलिए फिल्म को थोड़ा और सख्त होना चाहिए था।

वाइट टाइगर फिल्म के किरदार
प्रियंका चोपड़ा: पिंकी मैडम, राजकुम्मर राव: अशोक, आदर्श गौरव: बलराम, महेश मांजरेकर: महाजन, स्वरुप सम्पत: सामाजिक कार्यकर्ता, विजय मौर्या, वेदांत सिन्हा: धरम, नलनीश नील: विटिलिगो, सोलंकी दिवाकर: होटल मैनेजर, कमलेश गिल: दादी, आरोन वैन: प्रीमियर, अभिषेक खांडेकर: असिस्टेंट कमिश्नर, तृप्ति खामकर: पिंकी फ्रेंड, सतीश कुमार: बलराम के पिता

वाइट टाइगर फिल्म की क्या कहानी है?
फिल्म की शुरुआत होती है एक गांव से जहाँ एक छोटी जात का बचा अपनी पढाई को छोड़ मजदूरी करने लगता है क्यूंकि उसे अपने परिवार का पेट पालना है। लेकिन वह जिस भी काम को करता है उसे वह जल्दी ही सिख जाता है क्यूंकि वह बहुत ही होशियार है। उसके गरीब होने के कारण वहां के अमीर लोग उनका बहुत शोषण करते हैं लेकिन इसमें भी बलराम अपने लिए मौका बना लेता है और इन अमीर लोगो के घर एक ड्राइवर की नौकरी करने लग जाता है।

यहाँ वह अपनी दोस्ती इस घर के सबसे छोटे बेटे अशोक से कर लेता है और अशोक और उसकी बीवी पिंकी भी बलराम को काफी पसंद करते है। जब अशोक दिल्ली में रहने के लिए जाता है तो वह बलराम को भी अपने सांथ ले जाता है। एक दिन पिंकी नशे की हालत में गाड़ी चलाती है और एक बचे को मार देती है। अशोक के घरवाले अब इसका इल्जाम बलराम में डाल देते हैं जिससे अब बलराम समझ जाता है की नौकर नहीं अब मालिक बनने का समय आ गया है।

बलराम के इल्जाम अपने ऊपर लेने से अशोक का भरोसा बलराम पर काफी बढ़ जाता है लेकिन वहीँ बलराम मौका देखता है की कब अशोक पैसों की एक बड़ी लेन देन करे तो उसी दिन में पैसे लेकर भाग जाऊँ। बलराम ऐसा कर देता है और उन्ही पैसों से अपनी एक टैक्सी कंपनी खोल देता है। आखिर में दिखाया जाता है की बलराम को ऐसा करने का दुःख तो है लेकिन पछतावा नहीं।

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