कुछ ज्यादा करने की कोशिश मगर नतीजा कुछ नहीं निकला। त्रिभंग फिल्म का रिव्यू, फिल्म में क्या अच्छा है और क्या बुरा, किरदार, फिल्म की कहानी का प्लाट

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कैसी है त्रिभंग फिल्म?
काफी समय से बॉलीवुड ने एक ट्रेंड अपनाया हुआ है जोकि औरतों पर बनाई जा रही सभी फिल्मों में औरतों के ऊपर हो रहे जुल्मों और औरतों को उनकी जिंदगी जीने के लिए रोकने वाले लोगो पर कटाक्ष करती हुई फिल्म या वेब सीरीज के रूप में हमें दीखता है त्रिभंग फिल्म में आपको कुछ वैसी ही झलक दिखती है लेकिन जहाँ तीन पीढ़ी की महिलाओं के जीवन और उनके संघर्ष को दिखाया गया है।

इस फिल्म के मुख्य किरदार में आपको काजोल, तन्वी आज़मी और मिथिला पालकर दिखाई देंगी और इस फिल्म को डायरेक्ट किया है रेणुका शहाणे ने जिनका चेहरा और नाम उनके काम की ही तरह शानदार है लेकिन क्या यह जादू इस फिल्म में भी देखने को मिलेगा, आइये इसका जवाब देखते हैं?

फिल्म त्रिभंग तीन औरतों के ऊपर रखी गयी है जोकि अपनी जिंदगी को अपने ही अंदाज़ में जी रही हैं और उन्हें किसी की जरूरत नहीं है ताकि वह अपने जीवन के लक्ष्य को पूरा कर सके। बेशक डायरेक्टर ने यह सोच परदे पर दिखाकर बहुत से महिला सशक्तिकरण का विश्वास करने वाले लोगो को एक अच्छी फिल्म दिखाई है लेकिन इस फिल्म में बहुत सारी बातें ऐसी हैं जिसका असल जिंदगी से समानता करना बहुत मुश्किल लगता है जैसे – जबरदस्ती की गाली, अनुराधा नाम का किरदार आदमियों को टिस्सु पेपर की तरह समझना, स्कूल में एक टीचर का बच्चे से यह पूछना की आपकी माँ का क्या रेट है।

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क्या असल जिंदगी में भी इस तरह की जिंदगी कोई जीता है बेशक इस फिल्म को देखकर कहीं न कहीं आपके मन में भी जवाब आएगा नहीं। हमारे देश में भी बहुत सारी महिलाएं आज बगैर शादी के जिंदगी जी रही है जोकि इस तरह की विचारधारा से बिलकुल विपरीत होती है इसलिए इस तरह के विचार फिल्म में जानबूझकर भावना पाने के लिए किया गया काम लगता है। 

कहानी जब थोड़ा आगे बढ़ती है तो आप पाएंगे की कहानी अब महिला सशक्तिकरण की विचारधारा में अवरोध देखने को मिल रहा है जिसके जरिये कहानी अब कुछ सन्देश देने की कोशिश कर रही है और वह यह है की हर पीढ़ी में माँ और बाप अपने बच्चों के लिए जो भी करें बच्चे उनके किये गए समर्पण को उतना नहीं समझ पाते हैं जब तक वह खुद उस तरह के माहौल में खुद को नहीं पाते हैं।

क्या त्रिभंग फिल्म देखनी चाहिए?
इस फिल्म की कहानी इतनी मजबूत तो है की आप इसे एक बार जरूर देखें मगर यह फिल्म पारिवारिक नहीं है।

त्रिभंग फिल्म की रेटिंग कितनी है?
त्रिभंग फिल्म को IMDB पे 10 में से 6.2 की रेटिंग मिली है और हम इस फिल्म को 5 में से 2.5 स्टार देंगे।

परफॉरमेंस
फिल्म में काजोल का आत्मविश्वास और अदाकारी उनके काम के अनुभव को साफ़ दर्शाती हैं जहाँ उन्होंने पूरी फिल्म में एक एंग्री और महत्वकांशी औरत का किरदार अच्छे से निभाया है। कुछ नेगेटिव बातों को अगर छोड़ दे तो वह अपने किरदारों को काफी सहज रूप से निभाया है जिससे आप उनके भाव से उनकी कहानी को समझने की कोशिश जरूर करेंगे और यही इस फिल्म का मकसद भी है।

दूसरा महत्वपूर्ण किरदार इस फिल्म का है तानवी आज़मी का जिनका रोल भी उतना ही अच्छा है और उसे उतनी ही अच्छी तरीके से निभाया है तानवी ने। एक पैशनेट औरत और तड़पती माँ के दर्द को दर्शकों तक बयान करने में काफी सफल रही हैं।

बाकि किरदारों ने औसत के अनुसार काम किया है और आप उनके किरदारों में उतनी डेप्थ नहीं देखते हो जितनी काजोल और तानवी के किरदार में है।

त्रिभंग फिल्म में क्या सही है?
त्रिभंग फिल्म का स्क्रीनप्ले
कसा हुआ है जिससे बोर होने के मोमेंट बहुत ही कम देखने मिलते हैं और आप फिल्म को अच्छे से एन्जॉय करते हो।

फिल्म में सभी वीमेन किरदारों को पूरा मौका दिया गया है जिससे वह अपने दर्शकों से अच्छे से जुड़ पाएं।

त्रिभंग फिल्म में क्या गलत है?
त्रिभंग फिल्म का डायरेक्शन
बहुत अच्छा लगता है लेकिन बाद में यह फिल्म आपको कुछ कंफ्यूज कर देती है की यहाँ महिला सशक्तिकरण की बात करने के बाद फिल्म में अचानक वोमेन की बहुत सारी कमियां भी देखने को मिल जाती हैं।

त्रिभंग फिल्म का म्यूजिक की बात की जाये या बैकग्राउंड म्यूजिक दोनों ही कुछ खास नहीं है जोकि आपके दिल में अपनी खास जगह बना सकें।

अगर आप पुरुष मानसिकता से फिल्म को देखेंगे तो जरूर फिल्म आपको बुरी लगेगी क्यूंकि इसमें बहुत सरे ऐसे दृश्य हैं जहाँ पुरुष को बस इस्तेमाल ही किया गया है फिल्म के डायलॉग की तरह. अगर आप इस फिल्म को महिला सशक्तिकरण के नज़रिये से देखंगे तो इसमें भी आपको बहुत बातें ऐसी देखेंगी जोकि महिला सशक्तिकरण के नज़रिये पर ही सवाल खड़ा कर देंगी।

त्रिभंग फिल्म के किरदार
काजोल: अनुराधा आप्टे, मिथिला पालकर: माशा, कुणाल रॉय: मिलान, तन्वी आज़मी: नयनतारा आप्टे, वैभव तत्ववादी, वैभव तत्ववादी: रोबिंद्रो, मानव गोहिल: राघव, निशंक वर्मा: विक्रम, स्वेता मेहेंदले: यंग नयन, कंवलजीत सिंह: भास्कर रैना

त्रिभंग फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी आधारित है तीन महिलाओं पर जिसमे नयनतारा आप्टे(नानी), अनुराधा आप्टे(माँ), माशा(अनुराधा की बेटी)। नयनतारा के प्रसीद लेखिका हैं जोकि अब अपने जीवन के ऊपर एक नावेल लिखवाना चाहती हैं और इसके लिए वह एक राइटर को भी रखती है। कहानी लिखने के दौरान ही नयनतारा गंभीर बीमार हो जाती हैं इसलिए यह लेखक अब नयन की बेटी अनु के पास जाता है लेकिन अनु को इस कहानी में कोई दिलचस्पी नहीं है क्यूंकि यह तीनो ही एक दुसरे से नफरत करती है।

लेखक अनु को प्रेरित करता है की आप अपनी माँ के लिए कुछ तो कर सकती है जिससे धीरे धीरे अनु मान जाती है और वह आगे की कहानी बताती है। लेखक कहानी को अनु की बेटी के नज़रिये से जानने के लिए उससे भी मिलता है और उसकी जिंदगी के अनुभव भी नोट करता है। लेकिन यहाँ अब तीनो को ही एहसास होता है की वह अपनी तरफ से सब कुछ अच्छा कर रही थी अपने बच्चों के लिए मगर सबसे जरूरी चीज़ समय वह ही अपने बच्चों को नहीं दे पायी।

इस बीच नयन की मौत हो जाती है जिससे अनु को अब अपनी गलती का एहसास हो जाता है और वह अब अपनी बच्ची को पूरा समय देती है। जिससे सबक मिलता है की बच्चों को सिर्फ पैसो की जरूरत नहीं होती बल्कि उन्हें आपका प्यार भी चाहिए होता है।

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