नाम बड़े और दर्शन छोटे। तांडव सीरीज का रिव्यू, सीरीज में क्या अच्छा है और क्या बुरा, किरदार, सीरीज की कहानी का प्लाट

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कैसी है तांडव वेब सीरीज?
डायरेक्टर अली अब्बास ज़फर की हिम्मत की तारीफ करनी ही चाहिए की इन्होने राजनीति के ऊपर इतने किरदारों को इकठा करके एक सीरीज बनायीं लेकिन अगर आपको अगर बड़े चेहरों को अपनी सीरीज में लेना ही था तो इन्हे उन्हें दर्शकों से जुड़ने का पूरा समय तो देते। किसी भी सीरीज या फिल्म को अच्छा बनाने के लिए यह जरूरी नहीं की आप सदियों से जो राग दूसरे लोगो ने अलापा है आप भी उन्ही को ही दोहराओ और फिर अपने ही हाथ से अपनी सीरीज को निचे गिरा दो।

इस बात की सचाई को झुटलाया नहीं जा सकता है अली अब्बास ज़फर की पहले की फिल्मों की बात की जाये तो उसमे कुछ फिल्म एक बड़े नाम के चलते ही हिट हुई थी वरना उनमे स्टोरी के नाम पर कुछ भी नहीं था। ठीक उसी प्रकार से इन्होने हमें एक बार फिर से निराश किया है।

सीरीज काफी ज्यादा पूर्वानुमेय है, आप आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं की आने वाले दृश्य में क्या होने वाला है हलाकि इस बात में कोई शक नहीं की राजनीति को सस्पेंस सीरीज नहीं बना सकते लेकिन उसका स्क्रीनप्ले इस प्रकार का अवशय होना चाहिए की उसमे राजनीति की छाप देखने को मिले जैसे की हमें प्रकाश झा की फिल्म राजनीति में देखने को मिली थी या एक सिटी ऑफ़ ड्रीम्स की।

सीरीज में जवलन्तशील मुद्दों को रखकर अली अब्बास ज़फर ने कोशिश जरूर की है की वह फिल्मों की तरह अपनी इस सीरीज को भी लोगो के बीच ध्यान खींचने में कामयाब हो जायेंगे लेकिन वह यह भूल गए आजकल लोग इस तरह की फिल्मों को सीधा बायकाट की श्रेणी में रख देते हैं इसलिए इस तरह की बातें आपकी कहानी को अच्छा बनाने में कोई भी योगदान नहीं देंगी। 

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चलिए आज हम सीधा इस तांडव सीरीज की कमियां ही आपको बताते है ताकि सीरीज के नाम लोगो कुछ परोसने का काम डायरेक्टर और लेखक सोच समझ कर करें:
सीरीज में आपको कुछ नया देखने को नहीं मिलेगा जिससे आप इस सीरीज इस बांध जाये और 9 एपिसोड्स तक इसे लगातार देखते ही रहे।

तांडव सीरीज का स्क्रीनप्ले काफी ज्यादा खिंचा हुआ लगता है लेकिन फिर भी इसमें किरदारों की गहराई पर काम नहीं किया गया है सिवाय दो तीन किरदारों के जिसके कारण आप बाकि से जुड़ नहीं पाते हैं। सीरीज का सस्पेंस भी इतना अच्छा नहीं है की आप इस सस्पेंस के लिए दूसरे सीरीज का इंतज़ार करें।

तांडव सीरीज का डायरेक्शन की बात जाये तो राजनीति की फिल्मों में जहाँ ठहराव और एक शांति आपको देखने को मिलती है तो यहाँ बहुत ही ज्यादा गाली और गैर जरूरी मुद्दों को सीरीज में रखा गया है। कुछ बातें ऐसी हैं जिनपर अवशय ही लोग उनकी बातों से सहमत नहीं होंगे फिर उन्हें सीरीज रखा गया है।

तांडव सीरीज में सैफ अली खान और सुनील ग्रोवर को छोड़कर आपको बाकि किरदारों के काम में उतना मजा नहीं आएगा।

तांडव सीरीज का म्यूजिक भी राजनीति के लिए बिलकुल उपयुक्त नहीं लगता है और उस राजनीति के माहौल को बिलकुल महसूस नहीं करते हैं।

क्या हमें तांडव सीरीज देखनी चाहिए?
अगर आपके पास कुछ बड़ा नहीं है तो ही आप इसे देखें वरना इससे अच्छी सीरीज एक सिटी ऑफ़ ड्रीम्स और राजनीति फिल्म को आप देख सकते हैं।

तांडव सीरीज रेटिंग कितनी है?
तांडव सीरीज को IMDB पे 10 में से 3.6 की रेटिंग मिली है और हम इस फिल्म को 5 में से 2 स्टार देंगे जिसमे की 1 स्टार सिर्फ हम सुनील और सैफ की अदाकारी के लिए दे रहे हैं।

तांडव सीरीज में किरदारों की परफॉरमेंस
सीरीज में अगर अचे काम की बात की जाये तो सुनील ग्रोवर ने अपनी पर्सनालिटी, चेहरे के भाव और अदाकारी से ही लोगो को अपनी तरफ खींच लिया है इसलिए उनकी तारीफ तो जरूर होनी चाहिए।

सैफ अली खान और डिंपल कपाड़िया का काम भी बहुत अच्छा है लेकिन सैफ ने अपने किरदार को ज्यादा अच्छे से निभाया है क्यूंकि उनका किरदार परदे पर बहुत ही कम दीखता है लेकिन फिर भी उन्होंने काफी अच्छा काम किया है।

तांडव सीरीज में क्या अच्छा है?
तांडव सीरीज के डायरेक्शन की बात की जाये तो उसमे कुछ दृश्य बहुत वाइड रेंज और ड्रोन से शूट किये गए हैं जोकि देखने काफी अच्छे लगते हैं।

सैफ के शूट सीरीज में आपको बदले हुए नज़र आएंगे लेकिन आपको फिर वह जरूर पसंद आएंगे भले ही उसका ज्यादा मतलब न हो।

तांडव सीरीज के किरदार
सैफ अली खान: समर प्रताप, डिंपल कपाडिया: अनुराधा किशोर, ज़ीशान अय्यूब: शिवा शेखर, सुनील ग्रोवर: गुरपाल चौहान, कृतिका कमरा: सना मीर, सराह जाने दियस: आयेशा प्रताप सिंह, कृतिका अवस्थी: ऋचा अवस्थी, भावना चौधरी: प्रीती सिंह, विख्यात गुलाटी: रोशन ठाकुर, कुणाल गुप्ता: संदीप महाजन, तस्नीम खान: दिशा कपूर, निहारिका कुंडू: सिमरन आहूजा, भूमिका मीणा: स्नेहा भरद्वाज, गौरव पराजुली: चेतन क्रांति, जतिन शर्मा: सुमित दहिया, इंद्रा मोहन सिंह: राहुल सिंह, लातिन घई: इमरान ज़ैदी, डिनो मोरिया: प्रोफेसर  जिगर संपथ, अनूप सोनी: कैलाश कुमार

तांडव सीरीज की क्या कहानी है?
कहानी में एक राजनीति परिवार को दिखाया गया है जिसमे एक देवकी नंदन अपने बेटे समर के सांथ इलेक्शन लड़ रहे हैं और चुनाव में जीत भी देवकी नंदन की होती है लेकिन देवकी नंदन और समर में अब कुर्सी को लेकर थोड़ा मनमुटाव हो गया है इसलिए समर अपने पिता को मरवा देता है। इस घटना का फायदा अनुराधा उठाती है और वह समर को मजबूर कर देती है की वह प्रधानमंत्री पद के लिए उसका नाम रखे और समर को मजबूर होकर ऐसा करना पड़ता है।

समर अब कुछ कॉलेज के बच्चों के आंदोलन का फायदा उठाकर एक हंगामा खड़ा करने में भी कामयाब हो जाता है और इसके सांथ ही वह अनुराधा के खिलाफ भी सबूत जुटाने में लग जाता है की उसे देवकी नंदन की मौत का पता कैसे चला जिसमे उसकी मदद उसका वफादार गुरपाल करता है और वह अंत में सबूत जुटाने में कामयाब हो जाता है। अब समर अनुराधा को मजबूर कर देता है कुर्सी छोड़ने के लिए लेकिन वह फिर प्रधानमंत्री नहीं बनता बल्कि उसकी पार्टी को सपोर्ट करने वाले गोपाल दास को बना देता है।

सीरीज की कहानी अब अगले सीजन के लिए तैयार हो रही है इसलिए बहुत सी बातें अभी नहीं पता चली हैं जैसे क्यों समर ने ऐसा किया, वह कौन है जिसके पास देवकी नंदन की मौत के सबूत हैं।

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