‘स्पेशल ऑप्स’ सीरीज का हिंदी रिव्यू, पूरी स्टार कास्ट, फिल्म में क्या अच्छा है और क्या बुरा, सीरीज की कहानी हिंदी में

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‘स्पेशल ऑप्स’ सीरीज कैसी है?
‘स्पेशल ऑप्स’ सीरीज उन कुछ चुनिंदा फिल्मस में से एक है जिसमे आतंकवाद और उससे होने वाले देश को नुक्सान के बारे में सही तरीके से दर्शाया गया है। आतंकवाद के कितने खतरनाक अंजाम होते हैं और हमारे सिपाहियों को कितनी कुर्बानियां इसके लिए देनी पड़ती है इसके ऊपर पूरा फोकस सीरीज पे किया गया है। सीरीज आपको अंत तक बाधें रखने सक्षम है और इसका कारण है इसका बड़ा प्रोडक्शन हाउस, अच्छी लोकेशंस, अच्छा स्क्रीनप्ले, अच्छी एक्टिंग और अच्छी कहानी। 

हलाकि इससे पहले “द फॅमिली मैन” नाम की सीरीज भी इसी पहलू को ध्यान में रखकर बनाई गयी थी लेकिन इस सीरीज में आपको आतंकवाद को जस्टिफाई करने की कोशिश की गयी है जोकि सत्य के सांथ समझौता करने की एक नाकामयाब कोशिश थी डायरेक्टर द्वारा। शायद इसलिए इस सीरीज को काफी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा था।  

फिल्म आपको देश में हुए आतंकवाद से जोड़ने की कोशिश करती है और इस आतंकियों को पकड़ने के लिए किये जाने वाले हमारे देश के रक्षको के संघर्ष को भी दर्शाती है। फिल्म का डायरेक्शन किया है नीरज पांडेय ने जोकि इस तरह की फिल्म बनाने में काफी माहिर हैं शायद इसलिए ही ठीक वैसा ही एक्शन और थ्रिल हमें इस सीरीज में भी देखने को मिलता है।

हमारी आपको यह राय है की आपको यह सीरीज जरूर देखनी चाहिए जिसमे की आतंकवाद का असली चेहरा दिखाया गया है।

स्पेशल ऑप्स सीरीज में कुल 8 एपिसोड्स हैं और हर एपिसोड्स 40-50 का मिनट है। डायरेक्टर ने इस सीरीज को एक्शन, थ्रिलर के जॉनर में रखा है और इस फिल्म को आप हॉटस्टार के प्लेटफार्म पर देख सकते है।

इस आर्टिकल को आप इंग्लिश में भी पढ़ सकते हैं।

‘स्पेशल ऑप्स’ सीरीज में क्या अच्छा है?
स्पेशल ऑप्स में बात की जाये अच्छा क्या है तो सबसे पहले नंबर पर आता है इसका स्क्रीनप्ले जोकि काफी कमाल का है। सीरीज आपको कभी प्रेजेंट और पास्ट दोनों की कहानी को बड़ी ही अच्छे तरीके से दिखाने की कोशिश करती है। आप सीरीज में जल्दी से जुड़ जाते हैं और कहानी के असली मुद्दे को समझ पाते हैं की कहानी आपको क्या समझाने की कोशिश कर रही है।

सीरीज में किरदारों का काम काफी ज्यादा बेहतरीन हैं और खासतौर पर के.के.मेनन का काम आपको सबसे ज्यादा पसंद आएगा। सीरीज पे उनकी पकड़ सबसे ज्यादा है और बाकि किरदारों ने भी अपने किरदार के सांथ अच्छा जस्टिस किया है।

सीरीज की असली जान है इसकी सिनेमाग्राफी जोकि आपको एक बड़े बजट की फिल्म वाला एहसास कराती है और आपको यही लगेगा आप एक बेहतरीन फिल्म को देख रहे हैं।

‘स्पेशल ऑप्स’ सीरीज में क्या बुरा है?
फिल्म बीच में थोड़ा स्लो जरुर होती है खासतौर पे हाफिज के ऊपर जब भी कैमरा आता है तो लगता है कहानी थोड़ा स्लो पेस पे चल रही है।

फिल्म में बहुत से ऐसे किरदार हैं जिनका इस्तेमाल अच्छे से नही किया गया है जैसे विंनय पाठक, दिव्या दत्ता, और इस सीरीज के बाकि के किरदार उन्हें ज्यादा बड़ा रोल नहीं दिया गया है जिसके कारण वे अपने किरदार में अपना दमदार परफॉरमेंस देने से थोड़ा वंचित रह गए हैं।

‘स्पेशल ऑप्स’ सीरीज की रेटिंग
इस सीरीज को IMDB पे 8.6 रेट मिला है 10 में से और वहीँ हम इस सीरीज को 5 में से 4.25 स्टार देंगे।

‘स्पेशल ऑप्स’ सीरीज के किरदार
के के मेनोन, कारन टक्कर, सैयामी खेर, सना खान, दिव्या दत्ता, विनय पाठक, करन अशर, रजत कौल, मैहर विज, विपुल गुप्ता, गौतमी कपूर, परमीत सेठी, रेवती पिल्लई, काली प्रसाद, बिक्रमजीत कंवरपाल, मुज़म्मिल इब्राहिम, सज्जाद डेलफिरोज़, शरद केलकर, राजेन्द्र चावला, मीर सिरवार

‘स्पेशल ऑप्स’ सीरीज की कहानी हिंदी में 
फिल्म की शुरुआत होती है इंटेलिजेंस की मीटिंग रूम से जहाँ भारत के सभी बड़े बड़े इंटेलिजेंस ऑफिसर्स मौजूद हैं और भारत के संसद पर हुए हमले पर अपने विचार रखते है की हमले में 5 लोग शामिल थे और वो लोग कैसे भारत में आये। मगर हिम्मत सिंह (मेनन) की राय अलग है क्यूंकि वह कहते हैं की हमले में पांच नहीं बल्कि 6 आतंकवादी थे और जो बच गया है वही मास्टर माइंड है इस हमले का लेकिन वह कौन है और दिखता कैसा है यह किसी को नहीं पता है। इस हमले के बाद और भी हमले हुए हैं भारत में और इन सब में इसी मास्टर माइंड का हाथ रहा है जिसका नाम है इखलाख खान और इसी को पकड़ने की कोशिश में हिम्मत सिंह की टीम लगी हुई है और इसके लिए हिम्मत सिंह ने अपने कई साँथी अलग अलग देशो में भेजे हुए हैं।

अब हिम्मत सिंह को पता लगता है की इस इखलाख खान का खास आदमी है हाफिज और हाफिज के लिए काम करता है इस्माइल और इस्माइल का एक क्लब है और इसका मैनेजर है जावेद। अब हिम्मत सिंह इसके लिए अपने टीम के मेंबर फ़ाहरुख को एक बिज़नेस मैन बना कर उसके होटल भेजता है और प्लान के मुताबिक अब फ़ाहरुख जावेद के जरिये इस्माइल से दोस्ती बना लेता है। अब फ़ाहरुख मौका ढूंढता है हाफिज से मिलने का और कुछ समय बाद उसको मौका मिल जाता है हाफिज से मिलने का उसकी एक बहुत बड़ी मदद करके। 

कुछ समय बाद फ़ाहरुख को मौका मिलता है इखलाख खान को पकड़ने का एक डील के दौरान मगर इसमें फ़ाहरुख कामयाब नहीं होता लेकिन जल्द ही फ़ाहरुख और हिम्मत सिंह को पता चल जाता है की हाफिज ही इखलाख खान है और फ़ाहरुख अब हाफिज को एक सुमसान जगह पे ले जा कर उसे मार देता है। लेकीन हाफिज का नया प्लान है दिल्ली में होने वाले इंडिया और पाकिस्तान की एक बड़ी मीटिंग को बर्बाद करना और इसके लिए ये लोग उस होटल को बम से उड़ाना चाहते हैं जिसमे की यह मीटिंग होने वाली है जिसके लिए इखलाख खान अपनी तीसरी पत्नी सादिया कुरैशी (दिव्या दत्ता) का सहारा लेता है। लेकिन हिम्मत सिंह की टीम वक़्त रहते ही सादिया कुरैशी को पकड़ लेती है लेकिन उन्हें बम नहीं मिलता और पहला सीजन इसी के सांथ यहीं खत्म हो जाता है।

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