क्या “शकुंतला देवी” के जीवन के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों को फिल्म में नहीं दिखाया गया है? शकुंतला देवी फिल्म का रिव्यू और कहानी का प्लाट

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कैसी है “शकुंतला देवी” फिल्म
शकुंतला देवी को भारत के इतिहास में ह्यूमन कंप्यूटर के नाम से जाना जाता है और शायद ही कोई मैथ का लवर होगा जोकि शकुंतला देवी को न जानता हो। लेकिन इसी बात की पुष्टि आप आज की जनरेशन के लिए नहीं कर सकते क्यूंकि समय के सांथ सांथ समाज के आदर्श भी बदल जाते हैं और लोग बाहर के लोगो को अपना आदर्श मनाने लगते हैं। ऐसा ही आजकल भारत में भी देखने को मिलता है क्यूंकि अगर आप आज किसी बच्चे से स्टीव जॉब्स के बारे में पूछेंगे तो बहुत से बच्चे इनके बारे में जरूर जानते होंगे लेकिन अगर आप शकुंतला देवी या किसी और प्रसीद भारतीय का नाम पूछेंगे तो वह नहीं बता पाएंगे। ऐसा इसलिए है क्यूंकि हमें उनके बारे में कोई ज्ञान बचपन से नहीं दिया जाता बल्कि हमारी किताबे शुरू से ही बाहर के साइंटिस्ट और डॉक्टर को आदर्श बताकर हमें हमारे देश के महान व्यक्तियों की जानकारी से महरूम रखती हैं।

शकुंतला देवी फिल्म की डायरेक्टर अनु मेनन और नयनिका महतानी ने भारत के एक रत्न के ऊपर फिल्म बनाने का फैसला लेकर वाकई कबीले तारीफ काम किया है जिससे आज हर कोई शकुंतला देवी को जान पाया है। लेकिन क्या वाकई में शकुंतला देवी की यह बायोपिक उनके पूरे जीवन और सच्चाई को बयां करती है यह थोड़ा चर्चा का विषय बन सकता है क्यूंकि इस फिल्म को देखने के बाद पता लगता है की बहुत सारे दृश्य फिल्म में नहीं दिखाए गए जोकि शकुंतला देवी के फैंस के लिए काफी मायूश करने वाली बात जरूर है। 

यह फिल्म शकुंतला देवी के जीवन को दर्शाती है की कैसे उन्होंने आजीवन अपने आप को सिर्फ मैथ के लिए समर्पित कर दिया था। इसके कारण वह अपने परिवार से दूर होती जा रही थी लेकिन उन्होंने अपने परिवार को वक़्त रहते खोने से बचा लिया इसपर भी लोगो का ध्यान केंद्रित करने की कोशिश की गयी है। शकुंतला देवी ने पूरी दुनिया में भारत का और अपना काफी नाम कमाया था लेकिन इस बीच वह अपनी बच्ची और अपने पति के प्यार को मिस करने लगी थी और तब उन्होंने समझा की परिवार ही जिंदगी की सबसे बड़ी सफलता है और इसलिए वह अपने परिवार की खुशी को किस प्रकार वापस हासिल कर लेती हैं इन्ही तमाम विषयो पर इस फिल्म को फोकस किया गया है।

आप इस आर्टिकल को इंग्लिश में भी पढ़ सकते हैं।

क्या शकुंतला देवी फिल्म देखनी चाहिए
यह फिल्म जिंदगी में परिवार की जरूरत और महत्व को अच्छे से समझाती है जिसे आजकल के बच्चों को बताना बहुत ही जरूरी है इसके सांथ ही फिल्म में मैथ के प्रति जूनून और प्यार को अच्छे से दर्शाया गया है जिसे देखकर बच्चे जरूर प्रेरित होंगे। डायरेक्टर ने इस फिल्म को पारिवारिक सम्बन्धो को ध्यान में रखकर बनाया है इसलिए आपको यह फिल्म जरूर परिवार के सांथ देखनी चाहिए। इस फिल्म को अमेज़न प्राइम पर देख सकते हैं।

“शकुंतला देवी” फिल्म की रेटिंग
इस फिल्म को IMDB पे 6.4 रेट मिला है 10 में से और वहीँ हम इस फिल्म को 5 में से 2.5 स्टार देंगे।

फिल्म में क्या अच्छा है
फिल्म की सबसे पहली ताकत उसके किरदारों की अदाकारी होती है जिसमे यह फिल्म काफी खरा उतरती है। सभी कलाकारों ने काफी अच्छा काम किया है खासतौर पर विद्या बालन ने बेहरीन काम किया है और शकुंतला देवी की छवि को अपने अंदर ही समां लिया है।

फिल्म में शकुंतला देवी के बचपन से लेकर उनके ग्रैंड मदर बनने तक के इस लम्बे सफर को कवर किया गया है जिससे लोग उन्हें और अधिक तरीके से जान सके।

फिल्म को खूबसूरत तरीके से शूट किया गया है इसलिए आप उस एरा में अपने आप को महसूस करते हो जब कंप्यूटर का नया नया अविष्कार ही हुआ था।

फिल्म में क्या गलत है
फिल्म काफी ज्यादा तेज़ी से भागती हुई दिख रही है इसलिए कई बार दर्शको को समझ में ही नहीं आता की अभी क्या हुआ और अगले दृश्य में हम पास्ट में क्यों पहुँच गए। डायरेक्टर ने यहाँ पास्ट और प्रेजेंट को फिल्माने में बहुत ज्यादा जल्दी कर दी इसलिए दर्शको को समझ ही नहीं आता है की फिल्म इतनी तेज़ी से क्यों भाग रही है और बार बार पास्ट दिखाने की क्या जरूरत है जबकि कोई रिलेशन नहीं है उसका प्रेजेंट से।

करैक्टर बिल्डिंग के नाम पे सिर्फ शकुंतला देवी को ही अच्छे पोट्रे किया गया है जबकि बाकि कलाकार सिर्फ अपने किरदार को निभा कर चले जाते हैं उनकी कोई भी हिस्ट्री फिल्म नहीं दिखाई गयी जिसके कारण बाकि कलाकारों से दर्शक उतना कनेक्ट नहीं हो पाते हैं।

फिल्म में कहीं न कहीं शकुंतला देवी के पति के त्याग को पूरी तरह से जस्टिफाई नहीं किया गया है। उन्होंने पहले अपनी पत्नी और बाद में अपनी बच्ची की ख़ुशी को ज्यादा ध्यान दिया लेकिन अंत में उन्हें फिल्म से गायब ही कर दिया गया जिससे फिल्म में उनके त्याग को कोई भी महत्व नहीं दिया गया।

फिल्म में बड़ी खामियां 
अगर आप शकुंतला देवी के फैन हैं या उनके बारे में थोड़ा बहुत पढ़ चुके हैं तो आप इस फिल्म को देखकर जरूर कहेंगे की उनके जीवन के कई महत्वपूर्ण पलो को फिल्म में नहीं दिखाया गया है जैसे शकुंतला देवी भगवन गणेशा को अपना दोस्त मानती थी, बचपन से ही उनके मंदिर में जाती थी यह फिल्म में देखने को मिलता है। 

शकुंतला देवी की बायोपिक में आपको जानने को मिलेगा की शकुंतला देवी और अल्बर्ट आइंस्टीन के बीच में एक मुकाबला हुआ था जिसमे शकुंतला देवी ने अल्बर्ट आइंस्टीन के कंप्यूटर से पहले ही जवाब दे दिया था।

ऐसे कई महत्वपूर्ण पहलु इस फिल्म में नहीं दिखाए गए जोकि काफी निराश करेंगे अगर आप शकुंतला देवी के फैन हैं।

फिल्म के ट्रेलर का रिव्यू पढ़ने के लिए क्लिक करें।

फिल्म का डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले और म्यूजिक
फिल्म के डायरेक्शन की बात की जॉए तो वह ठीक ठाक लगेगा, डायरेक्टर ने पूरी कोशिश की वह हर एरा को अच्छे से परदे में उतार सकें जिसमे वह बहुद हद तक कामयाब भी हुए हैं।

फिल्म के स्क्रीनप्ले की बात की जाये तो यहाँ फिल्म बहुत ज्यादा मार खा जाती है क्यूंकि फिल्म में करैक्टर बिल्ड बहुत वीक है और फिल्म बहुत ज्यादा तेज़ी से भागती है जोकि दर्शको को उस मोमेंट को महसूस करने में बहुत ज्यादा प्रॉब्लम करती है।

फिल्म का म्यूजिक कुछ भी खास नहीं है इसलिए आप फिल्म को सिर्फ फिल्म अदाकारी के लिए ही देखोगे।

“शकुंतला देवी” फिल्म की कहानी का प्लाट
फिल्म की शुरुआत होती है जब शकुंतला की बेटी अनु अपनी माँ के एक नोटिस का जवाब देने के लिए इंडिया से लंदन आती है और वह अपनी माँ से काफी नाराज़ रहती है। अब कहानी पीछे जाती है जब एक बच्ची (शकुंतला) जोकि अपने माता पिता के सांथ रहती है। शकुंतला के पिता मेले में खेल दिखाते है और उसी से पैसे कमाते हैं एक दिन जब शकुंतला ने अपने पिता की मदद करते हुए कार्ड्स का बहुत अच्छा खेल दिखाया तो उसके पिता समझ गए की उसकी बच्ची मैथ में बहुत अच्छी है और वह उसके बहुत से प्रोग्राम करने लगे धीरे धीरे शकुंतला बहुत प्रसिद हो गयी जिससे वह अपने माता पिता की पैसो से मदद करने लगी। लेकिन इसके कारण वह अपना स्कूल छोड़ चुकी थी और अपना ध्यान सिर्फ प्रोग्राम पे लगाने लगी क्यूंकि उसे भी इसमें मजा आने लगा है।

शकुंतला काफी फेमस हो गयी है और बड़ी भी, शकुंतला को अरुण से प्यार है और वह उससे शादी करना चाहती है मगर अरुण किसी और से शादी कर लेता है जिसके कारण शकुंतला को गुस्सा आता है और वह उस पर गोली चला देती है लेकिन अरुण बच जाता है। अब शकुंतला प्रोग्राम करने लंदन जाती है और यहाँ भी कई प्रोग्राम करती है और खूब पैसा कमाती है। इस बीच उनकी मुलाकात होती है परितोष से जोकि एक इंडियन अफसर हैं दोनों एक दुसरे को पसंद करने लगते हैं और शादी कर लेते है। कुछ समय बाद जब परितोष इंडिया वापस जाने की बात कहता है तो शकुंतला देवी लंदन से माना कर देती हैं लेकिन परितोष इंडिया में ही रहना चाहते थे अब दोनों एक दुसरे को समझते हुए अलग रहने लगते हैं। इस कारण शकुंतला देवी अपनी बच्ची के सांथ लंदन में ही रहने लगती है।

जब शकुंतला देवी की बच्ची अनु बड़ी होती है तो वह भी अपनी माँ के प्रोग्राम के कारण स्कूल पूरा नहीं कर पाती है और वह अपने बचपन को खोने का दोषी अपनी माँ को मानती है। लेकिन धीरे धीरे अनु को अपनी गलती का एहसास होने लगता है जब अनु की बच्ची होती है और वह भी अपनी बच्ची को पूरा समय नहीं दे पाती है अपने काम की वजह से। वहीँ शकुंतला देवी भी अपनी गलती सुधारना चाहती है इसलिए अनु को बुलाने के लिए उसपर एक झूठा केस कर देती है जिसके लिए अनु लंदन आती है। आखिर में दोनों ही अपनी गलती मानते हुए एक दुसरे को गले लगते हैं। इसके सांथ ही फिल्म यहाँ ख़त्म हो जाती है जोकि हमें सीख देती है की कोई भी सफलता आपके परिवार की खुशी से बड़ी नहीं है इसलिए कामयाबी के पीछे अपने परिवार को नहीं भूलना चाहिए।

“शकुंतला देवी” फिल्म की स्टार कास्ट 
विद्या बालन: शकुंतला देवी, सैन्य मल्होत्रा: अनुपमा बनर्जी, जीशु सेनगुप्ता: परितोष, अमित साध: अजय, अहन निर्बन: श्रीनिवास, बरनबी जागो: इंग्लिश प्रेसेंटर

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