कहीं आप भी अपने बच्चे का बचपन तो नहीं छीन रहे? सीरियस मैन फिल्म का रिव्यू हिंदी में, फिल्म में क्या अच्छा है और क्या बुरा, किरदार, फिल्म की कहानी का प्लाट

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सीरियस मैन फिल्म कैसी है?
कहा जाता है की बच्चे हर देश का भविष्य हैं क्यूंकि उन्हें बड़े होकर देश की जिम्मेदारी को निभाना है और देश को आगे लेकर जाना है। बच्चे वह साँचा है जिसे आप किसी भी आकार में ढाल कर किसी भी तरीके से भविष्य के लिए तैयार कर सकते हो। मगर आज की तेज़ी से भागती दुनिया में माँ बाप अपने बच्चों को दूसरो से आगे रखने या अपनी इच्छा को बच्चों के ऊपर लादकर अपने बच्चो के लिए मुसीबत पैदा कर देते हैं। बच्चा अब वह नहीं करता है जो उसका मन करता है बल्कि अपने माँ बाप की इच्छा को पूरा करने की कोशिश में लग जाता है और यहीं से उनका दिमागी दमन शुरू हो जाता है। कई बार इसके घातक परिणाम भी देखने को मिलते हैं जिसे बॉलीवुड की कई फिल्मों में भी दिखाने की कोशिश की गयी है।

इसी विषय को और अधिक प्रभावी ढंग से दिखाने का प्रयास किया गया है फिल्म सीरियस मैन में। यह एक बाप और बच्चे की कहानी है जिसमे एक बाप अपने आप को गरीबी से निकालने और अपने बच्चे को फेमस बनाने के लिए झूट का सहारा लेता है लेकिन आगे जाकर उसे और उसके बच्चे को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वह इन सभी परेशानियों से कैसे मुकाबला करता है यही इस फिल्म की कहानी है।

फिल्म के मुख्य किरदार में नज़र आएंगे नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और अक्षत दास जिनका काम इतना बेहतरीन है की आप अपने आप को ही उस बाप और अपने बच्चे को अक्षत के अंदर पाएंगे। फिल्म में इंदिरा तिवारी और निस्सार भी अपनी अदाकारी से आपका दिल जित लेंगे। वैसे इस फिल्म की खासियत इसकी काफी सदी हुई कहानी और दमदार अदाकारी है। जहाँ फिल्म की कहानी को मनु जोसफ द्वारा लिखी गयी किताब से लिया गया है लेकिन पूरी किताब की कहानी को सिर्फ 2 घंटे में परदे पर उतारने के लिए निरेन भट्ट, अभिजीत खुमान, भावेश मांदलिआ और निखिल नायर जैसे राइटर का बहुत बड़ा हाथ है।

आप इस आर्टिकल को इंग्लिश में भी पढ़ सकते हैं।

क्या सीरियस मैन फिल्म हमें देखनी चाहिए?
फिल्म में बहुत ही गंभीर मुद्दों को उठाया गया है जिससे हम रोज़ाना की जिंदगी में देखते हैं। किस तरह का दबाव बच्चों के ऊपर हमेशा बना रहता है इसे समझाना जरूरी है इसलिए यह फिल्म सभी को देखना जरूरी है लेकिन यहाँ यह बात बताना जरूरी है की यह फिल्म आप अपने बच्चों के सांथ न देखें क्यूंकि इसमें गलियों और कुछ एडल्ट दृश्यों का इस्तेमाल किया गया है।

सीरियस मैन फिल्म की रेटिंग कितनी है?
सीरियस मैन फिल्म को IMDB पे 7.4 रेट मिला है 10 में से। हम इस फिल्म को बेहतरीन अदाकारी और अच्छे स्क्रीनप्ले के लिए 5 में से 3 स्टार देंगे।

सीरियस मैन फिल्म में क्या अच्छा है?
फिल्म में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है जैसे बच्चो से उनका बचपन छीनना, अपने इच्छा को बच्चो पर लादना, क्रिस्चियन मिशनरी द्वारा लालच देकर गरीब लोगो का धर्म परिवर्तन करवाना, गरीब आदमी का अच्छे जीवन के लिए संघर्ष।

फिल्म में किरदारों के डेवलपमेंट पर काफी फोकस किया है जिससे सभी किरदारों को पूरा समय मिला है लोगो के सांथ जुड़ने का।

फिल्म का स्क्रीनप्ले काफी कसा हुआ है इसलिए आप फिल्म में कभी भी बोर नहीं होंगे हर एक दृश्य आपके लिए कुछ न कुछ मैसेज लेकर आता है।

सीरियस मैन फिल्म में क्या गलत है?
फिल्म को देखकर आपको जरूर लगेगा की फिल्म थोड़ा ज्यादा तेज़ गति से भाग रही है, यह शायद इसलिए क्यूंकि एक पूरी बुक को सिर्फ 2 घंटे में समेटना इतना भी आसान नहीं है।

सीरियस मैन फिल्म का डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले और म्यूजिक कैसा है?
फिल्म का डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले काफी बेहतरीन है, जहाँ डायरेक्टर ने गरीबी से लड़ते हुए एक बाप की तंगहाली को अच्छे से परदे पर उतारा है तो वहीँ बच्चे की मानसिक परेशानी को भी दर्शकों तक अच्छे से पहुंचाया है। फिल्म का स्क्रीनप्ले काफी कसा हुआ है इसलिए सिर्फ कुछ ही पलों को छोड़कर आपको नहीं लगेगा की यह दृश्य नहीं भी होता तो फिल्म को कोई नुकसान नहीं होता।

फिल्म का म्यूजिक औसत है इसलिए आप इससे ज्यादा उम्मीद न रखें।

सीरियस मैन फिल्म के किरदार
नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी: अय्यान, इंदिरा तिवारी: ओझा मानी, अक्षत दास: अदि मानी, निस्सार: डॉ. आचार्य, संजय नार्वेकर: केशव धावरे, श्वेता बासु प्रसाद: अपर्णा, दुर्गेश कुमार: कमेंटेटर, विधि चितलिआ: ओपरना सेनगुप्ता, उदय महेश: नम्बूदरी

सीरियस मैन फिल्म की कहानी का प्लाट हिंदी में
कहानी की शुरुआत होती है अय्यान (नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी) से जोकि एक साइंस रिसर्च कंपनी में काम करता है और उसके सीनियर हैं डॉ. आचार्य (निस्सार) जोकि हमेशा  अय्यान को गली देते हैं और उसे निचा दिखाते हैं। अय्यान जानता है की आचार्य सिर्फ झूटी अफवाव फैला कर मीडिया और देश को गुमराह करते हैं इसकी खबर वह सीनियर्स को कर देता है जिसके कारण आचार्य की नौकरी चली जाती है। अय्यान चाहता है की उसका बेटा उसकी अमीरी की सीढ़ी बन जाये इसके लिए हर तरह के झूट बोलता है जिससे उसका बेटा लोगो के सामने एक जीनियस आदि (अक्षत दास) से जाना जाता है।

अक्षत दास अपने पापा के सपने पूरे करने के चक्कर में लगातार दिमागी रूप से बीमार होता जा रहा था। अक्षत अब अपने स्कूल और अपने इलाके में काफी फेमस हो गया था जिसका फायदा अब राजनीति के लिए होने लगा। लेकिन अब अक्षत काफी ज्यादा बीमार हो गया इसलिए अब अय्यान को अपनी गलती का एहसास होता है इसलिए अब वह अपने बच्चे को इन सभी चीज़ों से दूर कर देता है जिसके परिणामसवारूप अब अक्षत ठीक हो जाता है। अंत में दिखाया जाता है की अय्यान अब अपने सपनो को पूरा नहीं कर पाया इसलिए वह खुद डिप्रेसन में चला गया है।

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