साउथ वाले इतनी बेहतरीन स्टोरी कहाँ से लाते हैं? रत्सासन फिल्म का रिव्यू हिंदी में, फिल्म में क्या अच्छा है और क्या बुरा, किरदार, फिल्म की कहानी का प्लाट

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रत्सासन फिल्म का रिव्यू
यह फिल्म 2018 की जरूर है लेकिन इस फिल्म कंटेंट इतना ज्यादा फ्रेश है की आपको अंत तक बांधे रखने में सक्षम है। जी हाँ हम बात कर रहे हैं रत्सासन फिल्म की जिसे लिखा और डायरेक्ट किया है राम कुमार ने। जी हाँ, फिल्म में कोई बड़ा नाम नहीं देखने को मिलता है, लेकिन अगर बात की जाये डायरेक्शन, कलाकारों, अच्छी कहानी और अच्छे अभिनय तो इन पहलुओं से हर फिल्म को खास बनाया जा सकता है जैसा की हमें इस फिल्म में देखने को मिलता है।

अगर भारत में सस्पेंस मनोवैज्ञानिक फिल्मों की बात की जाये तो ऐसी फिल्में पहले बहुत ही कम ही देखने को मिलती थी। लेकिन हाल ही के कुछ वर्षों में ऐसी फिल्में हमें देखने को मिल रही है खासतौर पर साउथ इंडस्ट्री की तरफ से जोकि एक से बढ़कर फिल्में बना रहे हैं। हलाकि बॉलीवुड आज भी इस क्षेत्र में काफी पीछे नज़र आता है इसलिए ऐसी कम ही फिल्में आपको याद आएँगी जिसमे इतना अच्छा सस्पेंस, अदाकारी और छोटा मगर क्वालिटी का एक्शन देखने को मिलता है।

फिल्म की खासियत यही है की फिल्म ने किसी भी तरह के विवादित विषयों को नहीं छेड़ते हुए कहानी को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया है। फिल्म की कहानी शहर में होने वाले खून और पुलिस के इस खून की तफ्तीश में आने वाले ट्विस्ट के बीच दौड़ती है। खून करने के खौफनाक तरीकों के कारण ही इस हत्यारे को डिमोन यानि रत्सासन कहा जाता है और यकीन मानिये की जब आप इस खूनी के खून करने के तरीके और वह ऐसा क्यों करता है इसको विषय जितना जानेंगे आप भी उसे एक रत्सासन ही कहेंगे।

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फिल्म न केवल इस खूनी खेल को रोकने के ऊपर है बल्कि यह भी अच्छे से दिखाने में सफल रही है की कैसे ऊंचे ओहदे के लोग आसानी से किसी को आगे नहीं बढ़ने देते हैं चाहे कोई कितना ही काबिल क्यों न हो। पुलिस के रवैये के कारण ही बहुत बार जो काम जल्दी हो जाने चाहिए वह बहुत देर में होते हैं जिसका नुक्सान बहुत भारी भी होता है। 

इस फिल्म में कहने के लिए इतना कुछ है की सायद शब्द भी कम पद जाये लेकिन हम चाहेंगे की आपको छोटा और कस्सा हुआ रिव्यु दें। 


कैसी है रत्सासन फिल्म क्या हमें देखनी चाहिए?
जी हाँ, बहुत ही कम फिल्में ऐसी होती हैं जिसमे कोई भी एडल्ट दृश्य, गली गलोच के बिना एक अछि सस्पेंस से भारी हुई फिल्म देखने को मिले इसलिए इस फिल्म को आपको जरूर देखना चाहिए, हलाकि यह फिल्म थोड़ा डार्क जरूर है।


रत्सासन फिल्म की रेटिंग कितनी है?
इस फिल्म को IMDB पे 10 में से 8.7 की रेटिंग मिली है और गूगल पर 98% लोगो ने इस फिल्म को पसंद किया है। हम इस फिल्म को 5 में से 4.5 स्टार देंगे।


परफॉरमेंस
विष्णु विशाल
– फिल्म में एक नाम जोकि आपकी जुबान पर कई दिन तक रहेगा वह है विष्णु विशाल का। इतनी बेहतरीन कॉमेडी, इमोशंस और क्यूट बॉय के सभी बातें उन्होंने अपने अंदर इतनी सफाई से उतारी हैं की आपको उनसे कुछ ही मिनटों में जुड़ाव हो जायेगा। शुरू से लेकर आखिर तक आप उनके द्वारा निभाए गए हर रोल और डायलॉग की तारीफ करते चले जायेंगे।

क्रिस्टोफर – फिल्म में दूसरा कलाकार जोकि आपको हमेशा याद रहेगा वह है सारावनन जिनका फिल्म में एक भी डायलॉग नहीं है लेकिन फिर भी आप इनकी अदाकारी देखकर एक दिमागी रूप से बीमार कातिल की जब भी कल्पना करेंगे तो आपके दिमाग में इस किरदार की ही छवि आएगी। चेहरे के भाव, क्रूरता, और लड़ाई के दृश्य सभी में इन्होने अच्छा काम किया है।

अमला पॉल – अमला पॉल का फिल्म में उतना गहरा रोल नहीं है लेकिन फिर भी वह इस फिल्म में अपनी छाप छोड़ने में कामयाब हुई हैं।

फिल्म में क्या अच्छा है?
बात की जाये इस फिल्म के अच्छे पहलुओं के बारे में तो इस फिल्म ने अपने हर क्षेत्र में धमाकेदार मनोरंजन दर्शकों को दिया है।

रत्सासन फिल्म का डायरेक्शन – फिल्म की ताकत है इसका डायरेक्शन, शुरू से ही फिल्म आपको इस तरह से अपनी कहानी को पेश करती है की आप कहानी और किरदार आपसे क्या कहना चाहते हैं आप उसे समझते हुए फिल्म में आगे बढ़ते हैं। कोई भी चीज़ आपको ऐसी नहीं लगेगी की शुरू होकर कहीं बीच में खो गयी है या इस दृश्य को दिखाने का कोई मतलब नहीं है।

रत्सासन फिल्म का स्क्रीनप्ले – फिल्म की दूसरी ताकत है इसकी कहानी और इसका कस्सा हुआ स्क्रीनप्ले जोकि आपकी रूचि कहानी में शुरू से लेकर अंत तक बनाये रखता है। फिल्म जरूरत के हिसाब से आपको ट्विस्ट भी देती है जिससे दर्शकों की उत्सुकता भी बढ़ती जाती है।

रत्सासन फिल्म का संगीत – फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक इतना ज्यादा बेहतरीन है की जब भी बैकग्राउंड म्यूजिक बजना चालू हो जाता है तो आप समझ जायेंगे की जरूर कुछ होने वाला है। पियानो का संगीत प्रयोग फिल्म में सस्पेंस के लिए इस्तेमाल किया जाना वाकई में काफी अच्छा लगता है जिसका श्रेय फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर को जाना चाहिए।

फिल्म में मुख्य किरदार जैसे विष्णु और सारावनन दोनों के किरदार निर्माण को पूरा समय दिया गया है जिससे दर्शक उनसे जुड़ सकें और दोनों पहलुओं से कहानी को समझें।

फिल्म का सिनेमेटोग्राफी और मेकअप की भी जरूर तारीफ होनी चाहिए जोकि काफी ज्यादा अच्छी है।


फिल्म में क्या बुरा है? 
फिल्म में थोड़ा एक्शन की कमी लगती है क्यूंकि फिल्म में एक मात्र एक्शन फिल्म के आखिर में है जिससे आपको थोड़ा निराशा तो जरूर होती है।

इस फिल्म में आपको रिचनेस की कमी लगती है जोकि बड़ी बजट की फिल्मों में देखने को मिलती है।


रत्सासन फिल्म के किरदार
विष्णु: अरुण, अमला पॉल: विजी, राधा रवि: इंस्पेक्टर राजमणिकम, संगीली मुरुगन: अरुण के माकन मालिक, निजहालगाल रवि: डॉक्टर नन्दन, काली वेंकट: वेंकट, अभिरामि अभिरामि: अम्मू, मुनिष्कंठ: रामदॉस, सारावनन: क्रिस्टोफर, विनोदिनी वैद्यनाथन: अरुण सिस्टर, गजराज: सीनियर पुलिस अफसर, सुज़ैन जॉर्ज: ऐ.सी.पी लक्ष्मी


रत्सासन फिल्म की कहानी क्या है?
फिल्म की कहानी शुरू होती है अरुण से जोकि एक लेखक है और कई डायरेक्टर के पास अपनी कहानी को लेकर जाता है ताकि उसकी लिखी कहानी के ऊपर कोई फिल्म बनाये लेकिन उसे हर जगह से निराशा ही हाथ लगती है। अरुण के घरवाले उसकी जिद से उससे परेशान हो जाते हैं और खुद अरुण भी अब धीरे धीरे हार मानने लग जाता है इसलिए वह अपनी बहन और जीजा के पास चला जाता है ताकि वह उसकी मदद कर सकें पुलिस की नौकरी दिलाने के लिए।

अरुण की नौकरी अब पुलिस में लग और वह एक मर्डर केस की जांच में अपने सीनियर के सांथ जुट जाता है लेकिन अरुण खुद भी जांच करता रहता है और उन्हें कामयाबी भी मिलती है। अरुण एक टीचर को गिरफ्तार करता है जोकि लड़कियों को छेड़ता था लेकिन वह टीचर हॉस्पिटल से भागने की कोशिश करता है एक आदमी को बंदी बनाकर इसलिए अरुण उसे गोली मार देता है। अरुण के इस व्यवहार के कारण उसे ससपेंड कर दिया जाता है।

खूनी अपनी सनक को आगे बढ़ाता है और वह अरुण की भांजी को मार देता है जिससे अरुण, उसके जीजा काफी टूट जाते है और वह इस कातिल को ढूढ़ने में अपनी पूरी ताकत लगा देते हैं।

लेकिन असली खूनी अभी भी आज़ाद घूम रहा होता है इसलिए वह एक और बच्ची को उठा लेता है लेकिन इसबार अरुण की होशियारी के कारण वह बच्ची बच जाती है लेकिन खूनी अरुण के हाथ से निकल जाता है। यहाँ अरुण को खूनी की झलक देखने को मिलती है और वह उसके बारे में पता करने की कोशिश करता है। कुछ दिन बाद विजी की भतीजी अगवा हो जाती है अब इसे बचाने के अरुण लिए दोबारा जूट जाता है खूनी को पकड़ने में।

आखिर में अरुण को पता लग जाता है की यह खूनी एक जादू दिखाने वाला मानसिक रोगी है जोकि स्कूल जाने वाली बच्चियों को ही अपना शिकार बनता है, बचपन में हुए उसके अपमान का बदला लेने के लिए। खूनी के सांथ एक जादुई लड़ाई के बाद अरुण खूनी को मार देता है।

हम इसे एक ज्ञान वर्धक इनफार्मेशन की तरह दिखा और बता रहे हैं । अगर इस आर्टिकल से रिलेटेड कोई भी सुझाव या शिकायत है तो हमें digitalworldreview@gmail.com पर मेल करें!


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