शिक्षा पर एक गरीब के संघर्ष और हक़ की कहानी को दर्शाती फिल्म परीक्षा का रिव्यू, फिल्म में क्या अच्छा है और क्या बुरा, किरदार, कहानी का प्लाट

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कैसी है परीक्षा फिल्म?
शिक्षा ही एक ऐसा हथियार है जिससे आप जिंदगी में किसी भी सफलता को हासिल कर सकते हैं और इसलिए हर देश की सरकार अपने देश के लोगो शिक्षित बनाने पर जोर देती है जिससे उस देश के लोग अपने अधिकारों को जान सकें और अपने जीवन को चलाने के लिए किसी भी देश में किसी भी कार्य को आसानी कर सकें। हलाकि एक विकसित देश जहाँ इस पहलु को हकीकत में अमल कर रही हैं तो वही विकासशील देश अभी भी शिक्षा को एक बिज़नेस मॉडल के रूप में देखते हैं जिसमे भारत भी है। भारत में आज भी अच्छी और एडवांस शिक्षा केवल अमीर लोगो के लिए उपलब्ध होती है तो वहीँ गरीब बच्चे केवल अपनी मेहनत से आगे बढ़ते हैं।

भारत की इसी शिक्षा प्रणाली की कमियों को उजागर करती फिल्म है परीक्षा। परीक्षा के नाम को फिल्म में हर तरीके से इस्तेमाल किया गया है की कैसे एक गरीब आदमी को अपने गरीब बच्चे को पढ़ने के लिए रोज़ गरीबी से परीक्षा देनी पड़ती है। कैसे सरकारी स्कूल में टीचर के न होने के बावजूद होनहार बच्चों को अपनी पढाई के लिए परीक्षा देनी पड़ती है। जब एक गरीब पिता अपने बच्चे के लिए अच्छे स्कूल और अच्छी पढाई का सपना देखता है तो उसे अपनी गरीबी के कारण अपनी ईमानदारी और सचाई की परीक्षा देनी पड़ती है।

फिल्म के डायरेक्टर प्रकाश झा जिन्होंने की इस फिल्म की कहानी भी लिखी है फिल्म को बहुत ही साधारण भाषा में दर्शको तक पहुंचने की कोशिश की है जिससे शिक्षा के महत्व को समाज तक पहुंचाया जा सके। आज भी अमीर लोग गरीबो के सांथ पढ़ना पसंद नहीं करते और उन्हें अपने बराबर पहुंचने के लायक नहीं समझते। फिल्म अपने मुद्दे को समझाने में कामयाब होती दिख रही है, फिल्म में देश के लिए शिक्षा के महत्व और लोगो का शिक्षा को पाने के प्रति जागरूकता को दर्शाया गया है।

फिल्म में मुख्य भूमिका में नज़र आएंगे आदिल हुसैन जोकि रिक्शा चलाने वाले के रूप में दिखेंगे और शुभम जोकि आदिल का बेटा है और वह पढ़ने में काफी होनहार है। उसकी इसी काबिलियत को देखते हुए ही आदिल उसे अच्छे स्कूल में पढ़ाने का सपना देखता है लेकिन क्या वह ऐसा कर पायेगा और उसे ऐसा करने के लिए क्या क्या करना पड़ेगा इसी मुद्दे को फिल्म में दिखाया गया है। फिल्म सीधा एक गरीब पिता की आकांशाओ को दर्शाती है जोकि अपने बच्चे के लिए अच्छे सपने देखता है।

आप इस आर्टिकल को इंग्लिश में भी पढ़ सकते हैं।

क्या परीक्षा फिल्म हमें देखनी चाहिए? 
फिल्म का सब्जेक्ट काफी चर्चित है लेकिन इसे बड़ी ही सादगी और अच्छी अदाकारी के सांथ परदे पर उतारा गया है इसलिए यह फिल्म आपको जरूर देखनी चाहिए। यह फिल्म बच्चो को ध्यान में रखकर बनायीं गयी है इसलिए आप इसे परिवार के सांथ देख सकते हैं और सांथ ही इससे आपके बच्चो में शिक्षा के प्रति और अपने पेरेंट्स के प्रति अच्छा मैसेज दिया गया है।

परीक्षा फिल्म की रेटिंग
इस फिल्म को IMDB पे 8.1 रेट मिला है 10 में से और वहीँ हम इस फिल्म को 5 में से 3 स्टार देंगे। 98% लोगो ने इस फिल्म को गूगल पर लाइक किया है।

परीक्षा फिल्म में क्या अच्छा है?
फिल्म का सब्जेक्ट काफी बोल्ड है जोकि हमारे शिक्षा प्रणाली को आइना दिखाने का काम करती है। कैसे गरीब आदमी को अच्छी शिक्षा के लिए बुरे कामो को अपनाना पड़ता है। क्या अच्छी शिक्षा सिर्फ अमीरो के लिए गरीबो के लिए नहीं, क्यों समाज के बड़े लोग गरीब बच्चो को अपने बच्चो से कम समझते है। कोई भी जब गरीबो का भला करता है निस्वार्थ तो क्यों स्वार्थी लोग उसमे भी अपना फायदा देखते हैं।

फिल्म का एक्सिक्यूशन काफी अच्छा है इसलिए आपको फिल्म के किरदारों और कहानी से जुड़ाव जल्दी हो जाता है जोकि अच्छी फिल्म के लिए जरूरी है।

फिल्म की खासियत है इसकी अदाकारी जिसमे आदिल और प्रियंका बोस अपने किरदारों के सांथ पूरा न्याय करते हुए नज़र आते हैं।

फिल्म में संजय सूरी एक छोटे से रोल के लिए आते हैं लेकिन उनके इस रोल को भी फिल्म में बखूबी इस्तेमाल किया गया है और उनका काम वाकई में कमाल का है।

परीक्षा फिल्म में क्या गलत है?
फिल्म की खामी की बात की जाये तो बुलबुल के किरदार जोकि काफी मैन है वह काफी वीक लगता है, एक अदाकार के रूप में शुभम के भाव फिल्म में नकली लग रहे हैं।

फिल्म की कहानी में कोई बड़ा ट्विस्ट नहीं है जिससे कहानी थोड़ा ज्यादा सिंपल बन जाती है और दर्शक आगे की कहानी को आसानी से जज कर लेते हैं।

फिल्म का डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले और म्यूजिक
फिल्म को अच्छे से परदे पर उतारा गया है और दर्शक आसानी से कहानी और किरदारों से जुड़ पाते हैं। गरीबी और अमीरी के अंतर को बड़ी ही सरलता से समझाया गया है इसलिए इस फिल्म के डायरेक्शन को अच्छा कह सकते हैं।

फिल्म का स्क्रीनप्ले थोड़ा सिंपल है और किरदारों के पास भी कोई बड़े डायलॉग नहीं हैं जोकि इस फिल्म की पहचान बन जाये इसलिए इस फिल्म स्क्रीनप्ले वीक लगता है।

फिल्म का म्यूजिक औसत से कम है क्यूंकि फिल्म होने के बावजूद कोई भी गाने का न होना, कोई भी थीम सांग का न होना फिल्म को बहुत सिंपल बना देता है और फिल्म अपनी पहचान बनाने में असफल हो जाती है। ऐसा ही यहाँ भी देखने को मिल रहा है, गाने और थीम सांग के न होने से फिल्म का म्यूजिक बहुत बेकार लग रहा है।

परीक्षा फिल्म की कहानी का प्लाट
फिल्म की कहानी शुरू होती है एक गरीब परिवार से जिसमे बुचि (आदिल हुसैन) जोकि रिक्सा चलता है उसके सांथ उसकी पत्नी प्रियंका (प्रियंका बोस) रहती है जोकि एक फैक्ट्री में काम करती है और अपने पति का हाँथ बटाती है। इन दोनों का एक बच्चा है बुलबुल (शुभम) जोकि एक सरकारी स्कूल में पड़ता है और काफी होनहार है। बुलबुल की इसी काबिलियत को देखकर ही उसके पिता के मन में ख्याल आता है उसे अच्छे स्कूल में पढ़ाने का मगर उसकी गरीबी उसके आगे आ जाती है।

बुचि अब कोशिश करता है की अपने बच्चे का एक बड़े स्कूल में एडमिशनन कराने के लिए जहाँ उसे अपने बच्चे के लिए ढेर सारे पैसे जमा करने हैं और सांथ ही बुलबुल को एक परीक्षा देनी है उस स्कूल में एडमिशन के लिए। बुलबुल अपनी इस परीक्षा में सफल हो जाता है और उसे स्कूल में एडमिशन मिल जाता है मगर बुचि को उसकी फीस और दुसरे आवशयकताओ को पूरा करने के लिए अब अपनी ईमानदारी से समझौता करना पड़ता है और वह एक चोर बन जाता है लेकिन एक दिन वह चोरी करते हुए पकड़ा जाता है।

अब बुचि की इस मजबूरी का पुलिस अफसर को चलता है तो वह उसपर दया दिखते हुए उसके केस को मीडिया से दूर रखते हैं लेकिन यह बात फेल जाती है और बुलबुल के स्कूल को भी पता चल जाती है। इसके कारण बुलबुल का एग्जाम देना मुश्किल हो जाता है लेकिन बुलबुल के रिक्वेस्ट करने पर उसे एग्जाम देने की इजाजत मिल जाती है और वह स्कूल में टॉप कर देता है। जिसके कारण उसके पिता भी खुश हो जाते हैं और बुलबुल को स्कूल में काफी इज्जत मिलती है। इसी के सांथ फिल्म की कहानी यहाँ ख़त्म हो जाती है एक सिंपल से मैसेज के सांथ की हर तरह शिक्षा पर हर बच्चे का अधिकार है।

परीक्षा फिल्म के किरदार
प्रियंका बोस: प्रियंका, शौर्य डीप: गौरव भटिआ, अनंत कुमार गुप्ता: पियोन, आदिल हुसैन: बुचि, शीना राजपाल: रिपोर्टर, शुभम: बुलबुल, सीमा सिंह: स्कूल प्रिंसिपल, संजय सूरी: पुलिस अफसर

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