नए साल का बड़ा धमाका, नेल पोलिश फिल्म का रिव्यू, फिल्म में क्या अच्छा है और क्या बुरा, किरदार, फिल्म की कहानी का प्लाट

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कैसी है नेल पोलिश फिल्म?
भार्गव कृष्णा द्वारा लिखी और निर्देशित फिल्म नेल पोलिश सच में एक मास्टर पीस है जिसमे आपको सस्पेंस, ड्रामा, थ्रिल का कॉम्बो देखने को मिलता है लेकिन इसके सांथ ही जैसे की हम पहले भी कह चुके हैं की जब कोई दो चीज़ों को एक सांथ करने की कोशिश करता है तो वह उसमे कमियां छोड़ ही देता है और इसी कारण से इस फिल्म में काफी गलतियां रह गयी हैं। फिल्म फिर भी अपने मैसेज को दर्शकों तक पहुंचने में सफल रही है इसलिए इस फिल्म को अच्छा रिस्पांस भी मिला है।

आप इस फिल्म का सस्पेंस इसके टाइटल ले लगा सकते हैं लेकिन तारीफ जरूर करनी होगी की इस बात को पेश करने के लिए डायरेक्टर ने काफी अच्छा माहौल बनाया है जोकि आपको आखिर में समझ भी आता है। नए साल के लिए इससे अच्छी कहानी शायद ही हो सकती है जहाँ आपको गाली और एडल्ट दृश्यों के बिना रोमांचित करने वाली फिल्म देखने को मिल जाये।

फिल्म एक साइकोलोजिकल थ्रिलर फिल्म जहाँ डायरेक्टर ने आपको बांधे रखने के लिए फिल्म कई ट्विस्ट रखें हैं जोकि आपको कहानी में कुछ पुरानी यादों और मौजूदा समय के कुछ ट्विस्ट से भरे हुए दृश्यों को देखने पर पता चलता है। फिल्म की मुख्य कहानी एक रिटायर्ड आर्मी अफसर पर लगे बच्चों की निर्मम हत्या के आरोपों पर है जिसे बचाने का जिम्मा अर्जुन रामपाल को दिया गया है।

फिल्म की कहानी जैसे जैसे आगे बढ़ती है तब आपको लगता है की अब कहानी साफ़ हो गयी है लेकिन तभी नयी दलील इस कहानी को फिर से रोमांचित कर देती है। इसलिए कहा जा सकता है डायरेक्टर ने बहुत ही बारीकी से कोर्ट में होने वाले इन सभी दृश्यों को बेहतरीन तरीके से परदे पर उतारा है। कहानी की असली जान इसका क्लाइमेक्स है जहाँ आप यह सोचने में मजबूर हो जाओगे की यहाँ जीत किसकी हुई है।

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क्या नेल पोलिश फिल्म हमें देखनी चाहिए?
नए साल में काफी अच्छा मनोरंजन आपको देखने को मिल रहा है इसलिए आपको नेल पोलिश फिल्म जरूर देखनी चाहिए। इस फिल्म में दिल को परेशान कर देने वाले दृश्य भी हैं इसलिए इस बात का ध्यान रखिएगा।

क्या नेल पोलिश फिल्म रेटिंग कितनी है?
नेल पोलिश फिल्म को IMDB पे 10 में से 7.6 की रेटिंग मिली है और हम इस फिल्म को 5 में से 3 स्टार देंगे।

परफॉरमेंस
मानव कॉल – फिल्म में बात की जाये मुख्य भूमिकाओं की तो आप सबसे पहले मानव कॉल का ही नाम लेंगे जिन्होंने इतने मझे हुए तरीके से इस किरदार को निभाया है की सच में आप उनकी एक्टिंग के कायल बन जाओगे। जिस तरह से वह एक सख्त अफसर जोकि बड़ी ही बेदर्दी से किसी की आँख को निकल कर प्लेट पर रख देता है तो वही एक स्त्री की अदाओं को बेहतरीन तरीके से अपने अंदर समां लेता है। 

इनकी डायलॉग डिलीवरी और चेहरे के भाव आपको सच में उनपर विश्वास करने के लिए मजबूर कर देंगे की उन्होंने कुछ भी जुर्म नहीं किया है।

अर्जुन रामपाल – अर्जुन रामपाल जैसे फिल्मों में अपने किरदार को बखूबी निभाते हैं ठीक उसी प्रकार उनका अच्छा प्रदर्शन यहाँ भी देखने को मिलता है। एक कामयाब वकील जोकि काफी महत्वकांशी, चिड़चड़ा और अकेला है इन सभी भाव को उन्होंने अच्छे से निभाया है। कोर्ट में उनके केस को लड़ने का तरीका भी काफी पसंद किया जायेगा।

आनंद तिवारी – एक शरीफ और सुलझा हुआ इंसान जोकि अपनी ईमानदारी से अपनी दलीलों को रखता है जोकि काफी अच्छा लगता है और आप इस किरदार से काफी जल्दी जुड़ जायेंगे क्यूंकि आनंद ने अपने किरदार को इतने बेहतरीन तरीके से निभाया है।

नेल पोलिश फिल्म में क्या अच्छा है?
फिल्म में सभी किरदारों ने काफी अच्छा काम किया है और सभी किरदारों को उनके जीवन और व्यवसाय दोनों के सांथ दिखाया गया है जिससे दर्शक उनसे जुड़ पाते हैं।

नेल पोलिश फिल्म का स्क्रीनप्ले काफी कसा हुआ है इसलिए आपको ज्यादा बोरियत नहीं होगी और आपको कुछ न कुछ सस्पेंस जरूर देखने को मिलेगा। 

फिल्म के अंत आपको रोमांचित करता है तो वहीँ दूसरी और इसको देखकर जरूर लगेगा की मुजरिम को उचित सजा मिली है।

नेल पोलिश फिल्म में क्या बुरा है?
नेल पोलिश फिल्म के डायरेक्शन की बात की जाये तो वह भी आपको बहुत से दृश्यों में अच्छा देखने को मिलता है लेकिन कुछ दृश्यों में इतना बचकाना लगेगा की आप मन में यह सोचने को मजबूर हो जायेंगे की क्या में एक नाटक तो नहीं देख रहा। अब यह सब कुछ पैसे बचाने के लिए किया गया हो या जिस भी वजह से लेकिन आपका मजा जरूर किरकरा हो जायेगा।

फिल्म में सभी किरदारों के पर्सनल जीवन को भी दिखाया गया है लेकिन वह आधी अधूरी दिखाई गयी है जिससे आप जरूर निराश हो जायेंगे। इन सभी के बीच मुख्य किरदार के जीवन के केवल कुछ ही भाग फिल्म में दिखाए जाते हैं।

नेल पोलिश फिल्म का म्यूजिक उतना अच्छा नहीं है की आपको याद रखो या यह फिल्म इसके म्यूजिक की वजह से याद की जाये।

नेल पोलिश फिल्म के किरदार
अर्जुन रामपाल: सिद्धार्थ जैसिंघ, मानव कॉल: वीर सिंह, आनंद तिवारी: अमित कुमार, राजित कपूर: जज किशोर भूषण, मधु: शोभा भुसन, समरीन कौर: चारु रैना, सुकेश आनंद: हरपाल फेरा, दीपक चड्ढा: दादा शाह, मानसी देशमुख: माया कवल, नेहा हिन्ज: मैथी कुमार

नेल पोलिश फिल्म की क्या कहानी है?
फिल्म की कहानी शुरू होती है हॉस्पिटल से जहाँ सिद्धार्थ भागते हुए एक मरीज को देखने जाते हैं जिसपर बच्चों के खून का इल्जाम है और सिद्धार्थ इस मुल्जिम के वकील हैं। हॉस्पिटल में डॉक्टर बताता है की वीर सिंह जोकि एक आर्मी से रिटायर्ड है वह अपनी पर्सनालिटी को भूल चूका है और एक औरत की पर्सनालिटी जी रहा है। 

ऐसे में कहानी पास्ट की तरफ जाती है की कैसे पुलिस को वीर सिंह के खुनी होने के सुराग मिलते हैं और वीर सिंह को जेल हो जाती है। कोर्ट में जज भी दुविधा में हैं की कैसे यह केस आगे बढ़ाया जाए। अब वीर सिंह को सजा होगी या नहीं और वीर सिंह कहीं नाटक तो नहीं कर रहा है यही इस फिल्म की कहानी है।

अगर इस आर्टिकल से रिलेटेड कोई भी सुझाव और शिकायत है तो हमें digitalworldreview@gmail.com पर मेल करें


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