मैडम चीफ मिनिस्टर फिल्म का हिंदी रिव्यू, फिल्म में क्या अच्छा है और क्या बुरा, किरदार, फिल्म की कहानी का प्लाट

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जो फिल्म और वेब सीरीज के दीवाने हैं और इस इंतज़ार में हैं की उन्हें बॉलीवुड में कुछ अच्छा देखने को मिलेगा तो इनका यह इंतज़ार अभी कुछ और लम्बा होने वाला है क्यूंकि लम्बे समय से कोई ऐसी नहीं आयी है जिसमे आपको एंटरटेनमेंट, कहानी और इसके सांथ बेहतरीन अदाकारी देखने को मिली हो। अगर बात की जाये हिट फिल्मों के सूखे की तो अब यह उमीदें जब तक बड़े कलाकारों या बड़ी फिल्मों से ही पूरी होंगी यह नज़र आता है क्यूंकि स्माल बजट की वेब सीरीज और फिल्में अभी तलक कुछ खास कमाल नहीं कर पाई हैं एक दो फिल्म या वेब सीरीज को छोड़कर।

शायद बॉलीवुड इस बात की गंभीरता को समझ नहीं रहा है की अगर ऐसी फिल्में परदे पर आएँगी जिसे देखने के लिए मुश्किल से लोग जाएं तो इससे बॉलीवुड के प्रति लोगो का झुकाव और भी कम होता चला जायेगा अगर हम इन तीनो फिल्मों के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बात करेंगे तो यह एक मजाक से कम नहीं होगा।

हाल ही में बॉलीवुड में तीन फिल्में मैडम चीफ मिनिस्टर, शकीला और द पावर रिलीज़ हुई हैं जिनका हाल भी कुछ खास नहीं रहा है जिसकी वजह से आप फिर से निराश होने वाले हैं। हलाकि यह तीनो फिल्में अपने अलग कांसेप्ट को लेकर चर्चा में जरूर थी और उम्मीद थी की यह फिल्में कुछ अलग करके दिखाएंगी। आइये नज़र डालते हैं इन तीनो फिल्मों की परफॉरमेंस और रिव्यु पर।

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मैडम चीफ मिनिस्टर का हिंदी रिव्यू
इस फिल्म में एक औरत के संघर्ष को दर्शाया गया है जोकि भारत में चले आ रहे ऊंची जात और छोटी जात की परेशानियों को झेलते हुए उस राज्य की चीफ मिनिस्टर बनती है। फिल्म को लिखा और डायरेक्ट किया है सुभाष कपूर ने जिन्होंने इस फिल्म के लिए सच में काफी मेहनत की है जोकि आप अगर इस फिल्म को देखेंगे तो आपको फिल्म के डायलॉग और डायरेक्शन को देखने पर पता लग जायेगा लेकिन कहीं न कहीं फिल्म के एक्सिक्यूशन में उतना दम नहीं निकल पाया जिससे यह फिल्म अच्छी बन सकती थी।


मैडम चीफ मिनिस्टर फिल्म की रेटिंग कितनी है?
इस फिल्म को IMDB पे 10 में से 2.6 की रेटिंग मिली है और हम इस फिल्म को 5 में से 1.5 स्टार देंगे।


कैसी है मैडम चीफ मिनिस्टर फिल्म और क्या हमें यह फिल्म देखनी चाहिए?
फिल्म में ऐसा कुछ ख़ास नहीं है की आप अपने जरूरी काम को छोड़कर इस फिल्म को देखें परन्तु अगर देखने के लिए कुछ भी नहीं है जोकि मुश्किल है, तो आप इस फिल्म को देख सकते हैं।


फिल्म में क्या अच्छा है
मैडम चीफ मिनिस्टर फिल्म के डायरेक्शन की थोड़ी तारीफ की जा सकती है की उन्होंने कहानी को अपने लेवल के अनुसार कहानी को परदे पर अच्छे से उतारा है जिससे उस माहौल और तनाव को महसूस किया जा सकता है जो एक इंसान को इन सभी परेशानियो का सामना करने पर होता है।


फिल्म में क्या बुरा है
फिल्म की असली दिक्कत इसकी कास्टिंग को कहा जायेगा क्यूंकि फिल्म के मुख्य किरदार यानि ऋचा चढ़ा आपको एक दबंग औरत और नेता के रोल को बिलकुल भी खरी नहीं उतरती हैं। ऋचा चढ़ा की अदाकारी बेशक फुकरे की डॉली मेडम में बिलकुल सटीक बैठती है क्यूंकि वहां एक शांत और अड़ियल किरदार की जरूरत है जोकि ऋचा पर सटीक बैठती है लेकिन इसमें वह अगर किसी को डाटने का दृश्य भी करती हैं तो वह भी बिलकुल शांत चेहरे के भाव से करती हैं। यह बात फिल्म के ऊपर बुरा असर करती है और आधे से ज्यादा दर्शक सिर्फ इसी बात के कारण फिल्म से जुड़ाव नहीं बना पाते हैं।

मेडम चीफ मिनिस्टर के हेयर आर्टिस्ट के काम की बात जरूर करनी होगी और यह समझाना होगा की यह जरूरी नहीं की हर लेडी पॉलिटिशियन के बाल छोटे हों। अगर आप इस तरह से करने की सोच भी रहे हो तो वह बहुत हद तक रियल दिखना चाहिए जोकि सच में नहीं लग रहा है।

मैडम चीफ मिनिस्टर फिल्म का स्क्रीनप्ले औसत कहा जा सकता है लेकिन आधी फिल्म निकल जाने के बाद कहानी थोड़ी खींची हुई सी लगती है जहाँ कोई बड़ा मुद्दा फिल्म के पास नहीं है दिखाने के लिए।

फिल्म में मुख्य किरदार को छोड़कर बाकी किरदारों के लिए ज्यादा कुछ नहीं रखा गया है जिससे वह इस फिल्म में थोड़ा जान ला पाते।


फिल्म के किरदार
ऋचा चढ़ा: तारा, मानव कॉल: डेनिश रेहमान खान, सौरभ शुक्ला: सूरजभान, अक्षय ओबेरॉय: इंद्रमणि त्रिपाठी, तूलिका बनर्जी: जज, लज्जावती मिश्रा: दादी, कपिल तिलहरी: अरविन्द सिंह, निखिल विजय: बबलू


मैडम चीफ मिनिस्टर फिल्म की कहानी क्या है?
इस फिल्म की कहानी थोड़ा सुनी हुई सी लगती है जहाँ एक गर्भवती महिला के घर लड़की (तारा) होने पर उसके घर वाले उससे नाराज़ हो जाते हैं और उसे मारने की कई बार कोशिश करते हैं लेकिन वह इसमें कामयाब नहीं होते हैं। लड़की इन सभी परेशानियों के सांथ बड़ी होती है जहाँ उसका अफेयर एक नेता के सांथ होता है जोकि पहले से ही शादी शुदा है और ऊँची जात का है। तारा अपने गर्भवती होने की बात जब नेता को बताती है तो वह उसे अपनाने से इंकार कर देता है।

नेता इस बात को जानता है की अगर तारा समाज के सामने आकर बोल देगी तो उसका राज़नीति का करियर ख़त्म हो जायेगा इसलिए वह उसे मरवाने की योजना बनता है लेकिन इंद्रमणि त्रिपाठी उसे बचा लेता है। तारा अब अपने हक़ के लिए लड़ने को मजबूर हो जाती है इसलिए वह राजनीति में उतर जाती है जहाँ वह जनता के सहयोग से राज्य की मुख्यमंत्री बन जाती है।

लेकिन आगे वह इस पद पर बानी रहेगी या नहीं और उसके सामने अब और क्या मुसीबतें आएँगी यह जानने के लिए आपको फिल्म को देखना होगा।


हम यह पोस्ट एक ज्ञान वर्धक इनफार्मेशन की तरह दिखा और बता रहे हैं। अगर इस आर्टिकल से रिलेटेड कोई भी सुझाव या शिकायत है तो हमें digitalworldreview@gmail.com पर मेल करें!


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