यह फिल्म है या शार्ट फिल्म? लाहौर कॉन्फिडेंशियल फिल्म का रिव्यू, फिल्म में क्या अच्छा है और क्या बुरा, किरदार, फिल्म की कहानी का प्लाट

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लाहौर कॉन्फिडेंशियल फिल्म का रिव्यू
भारत और पाकिस्तान के रिश्ते कैसे हैं यह किसी से छुपा नहीं है और इसलिए दोनों ही देश अपने आपको आगे रखने के लिए बहुत कुछ त्याग करते हैं। अब यह त्याग कभी देश को या दुश्मन देश में मौजूद सीक्रेट एजेंट्स को भी करने पड़ते हैं। कुछ इसी कांसेप्ट को भुनाने की कोशिश आपको लाहौर कॉन्फिडेंशियल में देखने को मिलेगा जहाँ फिल्म में दोनों देशों के बीच की टेंशन को दोनों देशों के एजेंट्स के माध्यम से दिखाया गया है।

फिल्म को डायरेक्ट किया है कुणाल कोहली ने और लाहौर कॉन्फिडेंशियल फिल्म आपको इनकी पुरानी फिल्म फना से प्रभावित लगती है। हलाकि यह फिल्म काफी छोटी है इसलिए आप इसमें ज्यादा कुछ अपेक्षा नहीं रख सकते लेकिन अगर आप किसी फिल्म को स्पाई जॉनर में रखकर बना रहे हैं तो इसमें सस्पेंस, एक्शन, ट्विस्ट का होना बहुत जरूरी होती है लेकिन आपको यहाँ ऐसा कुछ नहीं देखने को मिलेगा।

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अगर आप कुणाल कोहली के डायरेक्शन के फैन हैं तो आप बहुत निराश होने वाले हैं क्यूंकि फिल्म में आपको ऐसी कोई जान नहीं देखने को मिलने वाली है। डायरेक्टर ने फिल्म थोड़ा इंटरेस्टिंग बनाने के लिए फिल्म को दोनों तरफ बैलेंस बनाने की कोशिश करी है इसलिए फिल्म को देखने पर आपको यह फील होगा की फिल्म कभी दुश्मन देश की तरफ घूम रही है तो कभी भारत देश की तरफ।


कैसी है लाहौर कॉन्फिडेंशियल फिल्म क्या हमें देखनी चाहिए?
अगर आपके पास कुछ खास नहीं है देखने के लिए तो ही आप इस फिल्म को देखें वह भी इसलिए क्यूंकि फिल्म काफी छोटी है। 


लाहौर कॉन्फिडेंशियल फिल्म की रेटिंग कितनी है?
इस फिल्म को IMDB पे 10 में से 3.6 की रेटिंग मिली है। हम इस फिल्म को 5 में से 1.5 स्टार देंगे।


परफॉरमेंस
अरुणोदय सिंह – फिल्म में अरुणोदय सिंह का काम ही सबसे ज्यादा अच्छा लगेगा, उन्होंने अपने किरदार को काफी साजिन्दगी से निभाया है। एक आशिक, शायर और आतंकवादी के हाव भाव और कमीनापन उनके चेहरे पर काफी अच्छा लगता है। इस बार भी इन्होने अपने काम से सबको प्रभावित किया है इसलिए इन्हे इंडस्ट्री में कम मौके क्यों दिए जाते हैं यह सवाल भी जरूर खड़े होते हैं।

ऋचा चढा – ऋचा चढा के लिए किरदार कितना ही अलग लिख दिया जाये उनके चेहरे पर आपको वही हाव भाव दिखेगा जोकि उनकी ज्यादातर फिल्मों में देखने को मिला था। हालांकि यह फिल्म उनकी अदाकारी के ऊपर बिलकुल सटीक बैठता है, ऋचा चढा एक कंफ्यूज और सीरियस किस्म के एजेंट के रूप में नज़र आती हैं। 

करिश्मा तन्ना – करिश्मा तन्ना के पास हालांकि इस फिल्म में ज्यादा कुछ करने के लिए नहीं था। लेखक ने उन्हें इस तरह के किरदार में बांध दिया की वह अपने आप को पूरी तरह से साबित नहीं कर पाती हैं।


फिल्म में क्या बुरा है? 
फिल्म की पूरी कहानी सिर्फ प्यार के ट्रैक पर नज़र आती है जोकि फिल्म को जॉनर को बदल कर रख देती है। आपको फिल्म में वह ट्विस्ट और सस्पेंस देखने मिलता है जो इस जॉनर की फिल्मों में देखने को मिलता है।

फिल्म में किरदारों को इतना समय नहीं दिया गया की आप उनसे जुड़ सकें सिवाय अरुणोदय सिंह को छोड़कर हालांकि देखा जाये तो अरुणोदय सिंह ने अपनी अदाकारी से दर्शकों को उनकी निभाए किरदार से जल्दी से जोड़ने में सफल हो जाते हैं।

लाहौर कॉन्फिडेंशियल फिल्म के डायरेक्शन में वह बात नज़र नहीं आती जिससे आप इस फिल्म को सराहे। 


फिल्म में क्या अच्छा है?
लाहौर कॉन्फिडेंशियल फिल्म के म्यूजिक को आप औसत कह सकते हो क्यूंकि इतनी छोटी फिल्म में एक गाना और शेरो शायरी का इस्तेमाल ठीक ठाक तरीके से किया गया है।

लाहौर कॉन्फिडेंशियल फिल्म का स्क्रीनप्ले भी आपको औसतन लगेगा क्यूंकि अगर यह फिल्म लम्बी होती तो जरूर दर्शक शुरू के ही कुछ मिंटो में फिल्म को बंद कर देते।


लाहौर कॉन्फिडेंशियल फिल्म के किरदार
ऋचा चढ़ा: अनन्या, निखत खान: अनन्या मदर, अब्दुल्लाह ओस्मान: पठान, खालिद सिद्दीकी: आर.डी, अरुणोदय सिंह: रउफ, करिश्मा तन्ना: युक्ति


लाहौर कॉन्फिडेंशियल फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी शुरुआत होती है जहाँ एक पार्टी में एक आदमी को मार दिया जाता है अब यहाँ से कहानी पीछे जाती है जहाँ हम देखते हैं रॉ की टीम युक्ति से बात करती है रउफ को पकड़ने के लिए क्यूंकि वह एक बहुत बड़ा आतंकवादी है लेकिन युक्ति बताती है की वह पहले ही कई लोगो की नज़र में आ चुकी है इसलिए उन्हें किसी नए एजेंट को भेजना होगा। 

रॉ अब अनन्या को इस मिशन के लिए भेजते हैं और यहाँ अनन्या काज़मी से दोस्ती कर लेती है और उसके धीरे धीरे करीब आना शुरू कर देती है और दोनों में नज़दीकियां भी बढ़ती हैं। काज़मी अब अनन्या को अपने परिवार की कहानी सुनाता है और अनन्या के मन को उसी की टीम के खिलाफ बहकाने की कोशिश करता है। काज़मी बहुत सारी जानकारी और इंडियन एजेंट्स के नाम भी अनन्या के मोबाइल से निकाल लेता है।

अनन्या को जब तक इस बात का पता चलता है तब तक काफी देर हो जाती है और काज़मी सभी एजेंट्स को मार देता है इसलिए रॉ अनन्या को वापिस बुला लेती है। जहाँ अनन्या को अब पता चलता है काज़मी ही रउफ है, लेकिन अब अनन्या वापिस से पाकिस्तान जाती है और रउफ को मार देती है और यही दृश्य फिल्म के शुरू में दिखाया जाता है। अब अनन्या रउफ के बदले अपने आप पाकिस्तान के एजेंट के रूप में शामिल कर लेती है ताकि वह आगे से छुपकर इंडिया की मदद कर सके।


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