सच्चे प्यार को बयाँन करती फिल्म खुदा हाफिज का रिव्यू, फिल्म में क्या अच्छा है और क्या बुरा, किरदार, फिल्म की कहानी का प्लाट

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कैसी है खुदा हाफिज फिल्म
काफी समय से बॉलीवुड पर नेपोटिस्म का आरोप लगता आ रहा है और इसके लिए कुछ डायरेक्टर्स को मुख्य रूप से इसका जिम्मेदार भी माना जा रहा है क्यूंकि यह लोग इंडस्ट्री के बाहर के कलाकार को इंडस्ट्री में जमने का मौका ही नहीं देते हैं। इसके लिए बाकायदा यह उस कलाकार के खिलाफ फेक रिव्यू और फेक पब्लिसिटी भी करवाते हैं, कुछ इस तरह के आरोप भी इंडस्ट्री पर लगते हैं। शायद इन्ही बातों का शिकार एक और होनहार अदाकार विद्युत् जामवाल भी हैं, अगर उनकी बॉलीवुड में शुरुआत देखी जाये तो वह काफी शानदार थी मगर उसके बाद उन्हें कोई भी बड़े प्रोडक्शन से काम नहीं मिला है लेकिन फिर भी उन्होंने अपने आप को छोटी फिल्मो से प्रूफ करने की लगातार कोशिश की है।

खुदा हाफिज विद्युत् की हाल ही में रिलीज़ फिल्म है जिसमे वह एक आम नागरिक का रोल करते हुए नज़र आ रहे हैं और उनके सांथ इस फिल्म में अनु कपूर भी नज़र आ रहे हैं। विद्युत् का काम इस फिल्म में काफी सराहा भी जा रहा है क्यूंकि इस फिल्म में उन्हें उनकी पहचान से कुछ हटके करने को मिला है। फिल्म को विद्युत् के करियर की सबसे बेहतरीन फिल्म भी कहा जा रहा है उनकी अदाकारी के लिए न की उनके एक्शन वाले अंदाज़ के लिए। विद्युत् अपने आप को बॉलीवुड के लिए तैयार करते हुए नज़र आएंगे जहाँ उन्हें रोमांस और इमोशंस से दर्शको को अपनी अदाकारी से साबित करना है।

खुदा हाफिज फिल्म एक इंसान की कहानी है जो आपकी पत्नी को बचाने के लिए दूसरे देश में जाकर वहां ह्यूमन ट्रैफिकिंग के जाल से अपनी पत्नी को बचाता है। इसके लिए विद्युत् को क्या क्या संघर्ष करना पड़ता है यही इस फिल्म की कहानी है। चूँकि फिल्म एक साधारण से इंसान की आपबीती है इसलिए आपको फिल्म में विद्युत् का एक्शन वाला रूप न के बराबर देखने को मिलेगा जोकि कहीं हद तक फिल्म के कई दर्शको को नाराज़ भी कर रहा है। इसलिए फिल्म को दर्शको दवारा कुछ मिला जुला रिस्पांस मिल रहा है लेकिन फिर इस फिल्म को विद्युत् की अच्छी अदाकारी के लिए जरूर सपोर्ट मिलेगा।

आप इस आर्टिकल को इंग्लिश में भी पढ़ सकते हैं।

क्या खुदा हाफिज फिल्म हमें देखनी चाहिए?
अगर आप विद्युत् के एक्शन के फैन हैं तो जरूर निराश होंगे लेकिन आप इसे विद्युत् के सपोर्ट के लिए जरूर देख सकते हैं क्यूंकि एक कलाकार के तौर पर विद्युत् को इस तरह की फिल्म करना भी जरूरी है। विद्युत् को एक अच्छे कलाकार के तौर पर साबित भी करना है जोकि इस फिल्म से विद्युत् ने किया भी है इसलिए इस फिल्म को एक बार जरूर देख सकते हैं।

खुदा हाफिज फिल्म की रेटिंग
इस फिल्म को IMDB पे 8.0 रेट मिला है 10 में से और वहीँ हम इस फिल्म को 5 में से 2.5 स्टार देंगे। केवल 97% लोगो ने इस फिल्म को गूगल पर लाइक किया है।

खुदा हाफिज फिल्म में क्या अच्छा है?
फिल्म को बहुत हद तक साधारण रखा गया है यानि की आपको कोई भी जबरदस्त एक्शन जैसा कुछ भी देखने को नहीं मिलेगा जोकि फिल्म को आम आदमी से जोड़ न पाए।

फिल्म में सभी किरदारों की कहानी को अच्छे से लिखा गया है जिससे दर्शक उनसे आसानी से जुड़ सकें।

फिल्म में सभी किरदारों का काम काफी अच्छा है लेकिन यहाँ बाज़ी मार जाते हैं अनु कपूर, विद्युत् का काम भी काफी बेहतरीन है और उनके फैंस विद्युत् की इस फिल्म से काफी खुश होंगे।

खुदा हाफिज फिल्म में क्या गलत है?
फिल्म सेकंड हाफ के बाद काफी बोरिंग होती चली जाती है जिससे दर्शक धीरे धीरे काफी बोर होने लगते हैं।

फिल्म में सस्पेंस और थ्रिल के नाम पर कुछ भी नहीं है जिससे दर्शको में फिल्म को देखने का रोमांच बना रहे।

फिल्म में विद्युत् जैसे एक्टर होने के बावजूद एक्शन के दृश्यों को काफी छोटा रखा गया है जोकि एक एक्शन हीरो के सांथ इन्साफ नहीं है। जितना भी एक्शन इस फिल्म में दिखाया गया है उसमे भी आपको काफी नकलीपन सा लगेगा जोकि फिल्म का मजा किरकरा कर देता है।

फिल्म का डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले और म्यूजिक
फिल्म का डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले और म्यूजिक तीनो ही औसत दर्जे की हैं जहाँ पर दर्शको को कुछ भी नया या बेहतरीन नहीं दिखेगा। फिल्म को हलाकि इसके डायरेक्शन के लिए थोड़ा ज्यादा याद रखा जायेगा क्यूंकि चीज़ो को बारीकी से रखा गया है जिससे दर्शकों को कहानी बिलकुल सच्ची लगे।

खुदा हाफिज फिल्म की कहानी का प्लाट
फिल्म की कहानी शुरू होती है लखनऊ में रहने वाले समीर चौधरी (विद्युत् जामंवाल) से जोकि एक छोटी सॉफ्टवेयर कंपनी का मालिक है और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना चाहता है जिसके लिए उसके माता पिता अब उसकी शादी कर देना चाहते हैं। कुछ ही दिनों बाद समीर की शादी नरगिस (शिवलीका ओबेरॉय) से कर दी जाती है और दोनों ही इस रिश्ते से काफी खुश होते हैं। लेकिन उनकी जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आता है जब 2018 में मंदी आ जाती है जिसके कारण नरगिस अपनी जॉब गवानी पड़ती है और समीर की कंपनी बंद हो जाती है। दोनों अब इस मुश्किल से सामना करने के लिए विदेश में जॉब करने का फैसला करते हैं और इसके लिए अप्लाई भी करते हैं।

दोनों की जॉब लग जाती है मगर नरगिस को वहां पहले ज्वाइन करने के लिए बोला जाता है इसलिए वह पहले जाती है। लेकिन कुछ दिनों बाद समीर को पता लगता है की उसकी पत्नी किसी मुसीबत में है इसलिए वह भी ओमान जाता है अपनी पत्नी को बचाने के लिए। जहाँ उसकी मुलाकात होती है उस्मान (अन्नू कपूर) से जोकि समीर की काफी मदद करता है लेकिन इसी बीच गुंडों को भी पता चल जाता है और वह समीर को फसाने की कोशिश करते हैं लेकिन समीर अपनी बेगुनाही का सबूत दे देता है अपनी पत्नी की मिसिंग रिपोर्ट दिखाकर।

समीर अब अपनी पत्नी को बचाने के लिए उन गुंडों से भीड़ जाता है और बड़ी ही मुश्किल से अपनी पत्नी तक पहुँच पता है। ओमान पुलिस भी इस गैंग से जुड़े सभी लोगो को गिरफ्तार कर लेती है जिसमे की कुछ पुलिस वाले भी थे जोकि समीर को शुरू से ही गुमराह कर रहे थे। आखिर में समीर और नरगिस वापस से अपने देश लौट आते हैं और यह फिल्म यहाँ पर ख़त्म हो जाती है। प्यार अगर सच्चा हो तो आप उसे हर हालत में हासिल कर लेते हैं चाहे इसके लिए कितनी ही मुश्किल का सामना क्यों न करना पड़े।

खुदा हाफिज फिल्म के किरदार
विद्युत् जामंवाल: समीर चौधरी, शिवलीका ओबेरॉय: नरगिस समीर चौधरी, अन्नू कपूर: उस्मान, शिव पण्डित्त: फैज़ अबू मालिक, आहना कुमरा: टमीना हामिद, नवाब शाह: इत्ज़ाक रेगिनी, गार्गी पटेल: नंदिनी चौधरी, मोहित चौहान: हर्ष राजपूत, सुपर्णा मारवाह: नगमा राजपूत, अजित शिधाये: नोमान कमिश्नर  

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