‘कड़क’ फिल्म का रिव्यू, पूरी स्टार कास्ट, फिल्म में क्या अच्छा है और क्या बुरा, फिल्म की कहानी हिंदी में

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‘कड़क’ फिल्म कैसी है 
‘कड़क’ फिल्म को जोड़ा गया है अचानक आने वाली किसी समस्या से की कैसे एक आम आदमी अपने सामने आई अचानक किसी बड़ी परेशानी से कैसे निपटता है। कैसे उसका परिवार उसकी इस मुसीबत में उसकी मदद करता है और न चाहते हुए भी उस समस्या से जुड़ चुके लोग भी उस समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं किसी भी तरीके से। फिल्म को डायरेक्ट किया है रजत कपूर ने और कहानी भी उन्होंने ही लिखी है, उन्होंने इस फिल्म में एक्टिंग भी की है। इस फिल्म में लीड रोल में रणवीर शोरे और मानसी मुल्तानी और दोनों काफी अच्छे कलाकार हैं जोकि अपने दम पर फिल्म को हिट कराने का मादा रखते हैं।

फिल्म को जानदार तरीके से दर्शको से जोड़ने के लिए फिल्म को दिवाली के माहौल में शूट किया गया है हालांकि इस आईडिया में कुछ गलतियां डायरेक्टर ने की हैं जोकि बहुत से मौको पे आपको बहुत ज्यादा भी लगने लग जाएँगी। लेकिन फिर भी अगर आप एक फिल्म में बहुत सारे कलाकारों को एक ही जगह पे उनका बेस्ट दिखाने की कोशिश कर रहे हो तो यह कुछ गलतियां जरूर देखने को मिल जाती हैं। 

इस आर्टिकल को आप इंग्लिश में भी पढ़ सकते हैं।

कड़क फिल्म में आपको थिएटर का टच देखने को मिलेगा की कैसे बहुत सारे एक्टर एंड एक्ट्रेस केवल एक ही लोकेशंन पे कितने अच्छे तरीके से परफॉर्म करते हैं और फिल्म में आपको माहौल भी थिएटर की ही तरह देखेगा जहाँ कभी खुशी और टेंशन की बारीकी को अपनी एक्टिंग के माध्यम से सही तरीके से दर्शाने की कोशिश की गयी है। फिल्म टोटल 1h 48minute की है और इसे आप सोनी लिव की एप्प पर देख सकते हैं। फिल्म का जॉनर है कॉमेडी, ड्रामा और थ्रिलर जोकि इनकी कास्ट को देखकर लगता ही है की फिल्म इसी तरह के मसाले से भरपूर होगी।

अगर आप कोई हलकी फुलकी कॉमेडी और ड्रामा मूवीज को देखने का मन बना रहे हैं तो बेशक आप इस फिल्म को देख सकते हैं।

‘कड़क’ फिल्म की रेटिंग
इस फिल्म को IMDB पे 6.8 रेट मिला है 10 में से और वहीँ हम इस सीरीज को 5 में से 3 स्टार देंगे।

फिल्म में क्या सही है
फिल्म में आपको नेचुरल एक्टिंग, अच्छी डायलॉग डिलीवरी और ह्यूमर वाले जोक्स देखने को मिलेंगे और इतने कलाकारों के होने के बावजूद बेहतर तालमेल देखने को मिलेगा।

किसी भी किरदार को कैसे डेवेलोप किया जाता है यह आपको इस फिल्म को देखकर पता लगेगा, कैसे हर एक किरदार का अपना वजूद है और वह किस तरह से फिल्म में ऑडियंस को जोड़े रखने में मदद कर रहा है।

सबसे जरूरी चीज़ है एक्टिंग जोकि हर एक कलाकार ने बखूबी तरीके से की है और आपको निराश होने के कम ही पल मिलेंगे इस पूरी फिल्म में एक्टिंग को लेकर।

अगर किसी फिल्म को सिर्फ एक जगह पे शूट किया जाये तो फिल्म के कलाकार उस स्थिति का भी फायदा उठाकर आपको अपनी दमदार एक्टिंग से बांध ले तो समझ जाओ की वह कलाकार वाकई अच्छा है और यहाँ आपको ये देखने को मिलगा।

फिल्म में क्या गलत है
फिल्म में  कहानी के नाम पे ज्यादा कुछ नहीं है इसलिए ज्यादा कुछ सस्पेंस और थ्रिल आपको देखने को नहीं मिलता है जोकि फिल्म के जॉनर में बोला गया है।

फिल्म आधी कहानी पूरी होने पर कुछ हिस्सों में स्लो हो जाती है लेकिन अंत आने पर आपको लगेगा की मूवी बहुत ज्यादा तेजी से चल रही है।

फिल्म के प्राइम किरदार यानि रणवीर और मानसी जोकि पति और पत्नी हैं उनके परिवार का रिलेशन को दर्शको से जोड़ने की कोशिश नहीं की गयी है। फिल्म बहुत ही जल्द अपने मैन स्टोरीलाइन पे आ जाती है और दर्शको का किरदारों से बॉन्डिंग फिल्म में उतनी जल्दी नहीं बन पता है।

हमें जो एक बड़ी गलती लगी इस फिल्म में तो वह थी फिल्म का मैसेज जी हाँ फिल्म के मैसेज को अच्छे विचार के सांथ अंत करना चाहिए न की किसी जुर्म के तरीके से। कई लोग फिल्म से प्रेरित होते हैं और यह बात हमें नहीं भूलनी चाहिए इसलिए समाज के प्रति हमें अपनी जिम्मेदारी को ध्यान में रखना चाहिए।

‘कड़क’ फिल्म की स्टार कास्ट
रणवीर शोरे: सुनील, मानसी मुल्तानी: मालती, पॉलोमी घोष: छाया, चंद्रचूड़ राइ: राघव,  रजत कपूर: राहुल, कल्कि कोएच्लिन: फ्रांकोइस मेरी, श्रुति सेठ: अलका, नूपुर अस्थाना: पारो, सागर देशमुख: जोशी, तारा शर्मा,: शीतल, साहूकार: योगेश, शीना खालिद: शीना, कैज़ाद कोतवाल: कैज़ाद, कृष्णा राज़: राधा, मिन्टी तेजपाल: मिन्टी

‘कड़क’ फिल्म का डिरेक्शंन, स्क्रीनप्ले और म्यूजिक
फिल्म का डायरेक्शन काफी अच्छा है और एक घर के सही इस्तेमाल को बखूबी तरीके से दिखाया गया है और किरदारों को भी सही मात्रा में प्रयोग किया गया है। फिल्म का स्क्रीनप्ले थोड़ा वीक है क्यूंकि ज्यादा थ्रिल इस फिल्म में देखने को नहीं मिलत्ता, कहानी के नाम पे भी ज्यादा स्ट्रांग स्टोरी नहीं है और वहीँ म्यूजिक की बात की जाये तो वह भी थोड़ा औसत से कम है।

‘कड़क’ फिल्म की हिंदी में कहानी 
फिल्म की कहानी शुरू होती है दिवाली के दिन सुबह के समय जब सुनील (रणवीर) अपने घर में अकेले होता है की तभी उसके घर में एक आदमी आता है यह आदमी होता है राघव (चंद्रचूड़ राइ) जोकि अपनी पत्नी की शिकायत लेकर आया था। वह व्यक्ति जब सुनील से बोलता है की तुमने छाया (पॉलोमी घोष) से अफेयर क्यों किया तो रणवीर शॉक होता है और सोचता है की इसको कैसे पता चला गया की तभी राघव अपने आप को गोली मार लेता है और वहीँ मर जाता है।

सुनील इस बात से बहुत घबरा जाता है और वह खून साफ़ करने लग जाता है की तभी मालती (मानसी मुल्तानी) आ जाती है लेकिन वह भी खून साफ़ करने लगती हैं और दोनों लाश को एक बॉक्स में रख देते हैं की इसी बीच में सुनील के घर में दिवाली की पार्टी के लिए लोग आने लगते हैं जिसमे की छाया भी शामिल है। अब कुछ लोग उस बॉक्स को बाहर ले आते हैं और उसमे गेम खेलने लग जाते हैं लेकिन इस बीच काफी लोग घर वापिस चले जाते हैं और अब कुछ ही लोग बचते हैं पार्टी में की तभी सुनील की बीवी को छाया को देखकर शक होता है की सुनील का कोई अफेयर है छाया से तो वह गुस्से में बॉक्स खोल देती है।

अब लाश में और बॉक्स में सब के निशान आ चुके हैं तो सभी लोग इस लाश को ठिकाने लगाने के लिए तैयार हो जाते हैं और अब कुछ लोग लाश को रेलवे प्लेटफोर्म पे लाश को फ़ेंक देते हैं लेकिन यह आईडिया सुनील का बच्चा देता है। इसी के साथ यह फिल्म ख़त्म हो जाती है और एक गन्दा मैसेज छोड़ देती है की क्या ऐसा करना सही है और क्यों लाश को रेलवे ट्रैक पर फेकने का आईडिया एक छोटे से बच्चे के दिमाग में आता है?

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