हवाई जहाज से जुड़े 15 चौकाने वाले फेक्ट्स और जानकारी जो आप शायद नहीं जानते होंगे।

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दोस्तों बचपन से हम सब एक सपना जरूर देखते हैं और वह है हवाई जहाज़ में सफर करने का अब चाहे वह एक यात्री के रूप में हो या एक जहाज़ के स्टाफ के रूप में। यह सपना कई लोगो का पूरा तो हो जाता है लेकिन बहुत से ऐसे लोग भी होते हैं जिनका यह सपना काफी देर में पूरा होता है या तो होता ही नहीं है। अगर बात की जाये जहाज़ के बारे में जानकारी की तो बहुत से लोगो को जहाज़ में यात्रा करने के बावजूद जहाज़ के बारे में बहुत कम जानकारी होती है।

आइये दोस्तों कुछ ऐसी जानकारियों के ऊपर नज़र डालते हैं जिससे आपके ज्ञान में और अधिक वृद्धि होगी।

1 – सबसे पहले जहाज़ का निर्माण किसने किया था?
दोस्तों अगर आपने यह पढ़ा होगा की हवाई जहाज़ का निर्माण किसने किया था तो हर जगह आपको राइट ब्रदर्स का ही उत्तर मिलेगा जिन्होंने 1903 में इसका निर्माण किया था लेकिन बहुत कम लोग जानते होंगे की शिवकर बापूजी तलपड़े ने 1895 में मुंबई में अपना पहला हवाई जहाज़ का अविष्कार लोगो के सामने दिखाया था जोकि कुछ समय तक हवा में उड़ने में सक्षम था लेकिन ब्रिटिश के दबाव के चलते उन्हें कुछ फण्ड नहीं मिला इस अविष्कार को आगे बढ़ाने के लिए और जब उन्हें इसके लिए फण्ड मिल गया तो ब्रिटिशर्स ने उन्हें बंदी बना लिया था ताकि वह अपनी खोज को आगे न कर सकें।

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2 – जहाज़ में कितने पायलट होते हैं और क्यों?
दोस्तों क्या आपको पता है की टेक्नोलॉजी की इस वक़्त में हर मशीनरी ऑटो मोड यानि की खुद से चलने में सक्षम है, यहाँ तक की हवाई जहाज़ भी लेकिन फिर हवाई जहाज़ में आपको दो पायलट हमेशा मिलेंगे। पर ऐसा नहीं है की हर जहाज़ में दो पायलट ही होते है बल्कि जब कोई पायलट ट्रेनिंग पर होता है तो वह तीसरे पायलट के रूप में फ्लाइट में मौजूद होता है।

प्लेन में अगर एक पायलट को नींद आ जाये तो दूसरा पायलट जहाज़ को संभाल लेता है लेकिन अगर दोनों को ही नींद आ जाये तो इसके लिए ही जहाज़ को तकनिकी रूप से इतना सक्षम बनाया गया है की अगर जहाज़ को चलाये जाने वाले सिस्टम में कोई भी हलचल नहीं होती है तो जहाज़ का सिस्टम अपने आप ही एक मैसेज ऑपरेटिंग रूम यानि जहाँ से सारे जहाज़ों को दिशा निर्देश दिए जाते हैं तक पहुंचा देता है। 

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3 – जहाज़ उड़ाने के लिए कौन सी भाषा जरूरी है?
जहाज़ को उड़ाने वाले पायलट के लिए इंग्लिश भाषा आना जरूरी है क्यूंकि इंग्लिश एक इंटरनेशनल भाषा है यानि दुनिया के सभी एयरपोर्ट्स पर इंग्लिश भाषा जरूरी है जिससे किसी भी प्रकार की दिक्कत होने पर आप आसानी से दूसरे देश के एयरपोर्ट या आपातकालीन सुविधा का लाभ उठा सकें।


4 – जहाज़ के पायलट कभी भी एक खाना नहीं खाते?
जी हाँ, सुनने में यह आपको अजीब लग रहा होगा लेकिन यह सच है। जहाज के दो पायलट अगर एक ही खाना खाये और अगर उस खाने में कुछ भी खराबी हुई तो उसका असर उन दोनों पायलट के अलावा जहाज़ में सफर कर रहे कई मुसाफिरों पर भी पड़ सकता है इसलिए दोनों पायलट कभी एक खाना नहीं खा सकते, जब भी वह जहाज़ को उड़ाने वाले हो या उड़ा रहे हों ।

5 – दोस्तों जहाज़ में ऑक्सीजन की कमी होने पर आपको ऑक्सीजन मास्क प्रयोग करने के लिए बोला जाता है मगर क्या आपको पता है की एक ऑक्सीजन मास्क से आप सिर्फ 15-20 मिनट तक ही ऑक्सीजन ले सकते हैं।

6 – हवाई जहाज़ में सफर करते वक़्त क्या आपने इस बात पर ध्यान की हवाई जहाज़ में मिलने वाला खाना आपको उतना सवादिष्ट क्यों नहीं लगता। ऐसा इसलिए है क्यूंकि हवाई जहाज़ जब उचाई पर होता है तो हमारी जीब के स्वाद में परिवर्तन हो जाता है जिससे आपको कभी कभी जहाज़ का खाना स्वादिष्ट नहीं लगता है।


7 – पुशबैक ट्रक का क्या काम होता है?
दोस्तों यह सवाल आपने हवाई यात्रा करने से पहले जरूर अपने आप से पूछा होगा। पुशबैक ट्रक का इस्तेमाल हवाई जहाज़ को रनवे पर ले जाने और वापिस लाने का काम करता है। इसका इस्तेमाल इसलिए किया जाता है क्यूंकि प्लेन को एक जगह से दूसरी जगह मूव करने के लिए अपने जेट इंजन का इस्तेमाल करना पड़ता है लेकिन ऐसा करने रनवे पर मौजूद मिटटी और धुल का जेट इंजन में घुसने का डर रहता है जिसके कारण इंजन के ख़राब हो सकता है।

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8 – प्लेन में कितने ऑटो पायलट होते हैं?
ऑटो पायलट एक कंप्यूटर प्रोग्राम होता है जिससे इमरजेंसी के हालत में कुछ फैसले खुद से लेने का हक़ दिया गया है। लेकिन कोई भी कंप्यूटर प्रोग्राम इतना सुरक्षित नहीं होता की उसे गलत लोग हैक न कर सकें इसलिए हर हवाई जहाज़ में दो ऑटो पायलट होते हैं जिससे अगर एक ऑटो पायलट कंप्यूटर किसी तरीके से गलत लोगो के कण्ट्रोल में आ जाये और वह हवाई जहाज़ को अपने दिशा निर्देश देने लग जाये तो दूसरा ऑटो पायलट कंप्यूटर उस निर्देश को पहले परखता है। अगर उसे लगता है की यह निर्देश बिना किसी ठोस कारण के दिया गया है तो वह तुरंत ही पहले ऑटो पायलट कंप्यूटर को बंद कर देता है।


9 – क्या यात्रा के समय हवाई जहाज़ के दरवाजे खुल सकते हैं?
कई बार आपके मन में विचार अवश्य आया होगा की क्या होगा अगर यात्रा के समय हवाई जहाज़ के दरवाजे खुल जाये। दोस्तों जब हवाई जहाज़ हवा में होता है तो उसमे प्रेशर बनना चालू हो जाता है जितने देर तक और जितने उचाई पर जहाज़ उड़ता है उतना ही प्रेशर बनता चला जाता है। लेकिन सवारियों को घबराने की जरूरत नहीं है क्यूंकि हवाई जहाज़ के दरवाजे इसी प्रेशर को ध्यान में रखते हुए बनाये जाते हैं जिससे साधारण तरीके से नहीं खुलते हैं इसलिए हवा में दरवाजे के खुल जाने का दर कम रहता है।

दरवाजे को खोलने के लिए आपको पहले दरवाजे को अंडर की तरफ खींचना होगा फिर साइड में धक्का देकर आखिर में बाहर की तरफ खोला जाता है। ऐसे में यात्रा के दौरान या कभी भी हवाई जहाज़ के दरवाजे के खुलने की आशंका काफी कम होती है। 

यह बात सत्य है की अगर यात्रा के दौरान अगर गलती से दरवाजा खुल जाता है तो सामान सहित सभी लोग जहाज़ से बाहर निकल जायेंगे।


10 – क्या हवाई जहाज़ की लेटरिंग हवा से नीच फेंकी जाती है?
हर हवाई जहाज़ के अंदर करीबन 200 गेलन का एक टैंक होता है जिसके अंदर जहाज़ का शौचालय स्टोर होता है, जब जहाज़ लैंड होता है तो इस टैंक को खली कर दिया जाता है। आधुनिकता के इस युग में शौचालय भी वैक्यूम की तकनीक से निर्मित हैं इसलिए मल और पानी दोनों को ही टैंक में अलग अलग स्टोर किया जाता है।


11 – क्या हवाई जहाज़ की शीट पर बैठकर फ्लश दबाना खतरनाक हो सकता है?
जी हाँ, हवाई जहाज़ में यात्रा के दौरान हवा का दबाव बहुत ज्यादा हो जाता है इसलिए जब भी शौचालय में फ्लश को दबाया जाता है तो अतिरिक्त दबाव बन जाता है। अगर कोई भी शौचालय में बैठकर फ्लश दबाता है तो यह उसके लिए खतरनाक हो सकता है और आप इस दबाव के कारन आप फँस सकते हो। शौचालय में इसी से संभदित जानकारी का पोस्टर या स्टीकर जरूर लगाया जाता है जिससे लोगो को पहले से जानकारी मिल जाये।


12 – हवाई जहाज़ की खिड़कियां गोल आकर की क्यों होती हैं?
शुरू में हवाई जहाज़ की खिड़कियां चौकोर होती थी लेकिन कुछ घटनाओ के बाद यह पाया गया की चौकोर खिड़कियां हवा का ज्यादा विरोध करती हैं इसलिए जहाज़ पर ज्यादा दबाव बन जाता है इसलिए इन खिड़कियों को बाद में थोड़ा गोल आकार में बदल दिया गया। यह शेप हवा का ज्यादा विरोध नहीं करते और हवा का ज्यादा दबाव नहीं बनता।

13 – हवाई जहाज़ की हर खिड़कियों में गोल आकर का छोटा सा छेद होता है ताकि हवा का आना और जाना आसान हो सके जिससे हवा का दबाव संतुलित रहता है। इसके सांथ ही सर्दी के समय खिड़कियों पर कोहरे को भी संतुलित करता है। हवाई जहाज़ की खिड़कियां ऐक्रेलिक मटेरियल से बनाई जाती हैं।

14 – हवाई जहाज़ में यात्रा के समय अधिकतर सवारियों को कान में दिक्कत होती है ऐसा इसलिए होता है क्यूंकि हवा का दबाव हमारे कान के आसपास ज्यादा हो जाता है इसलिए अगर आपको ऐसा लगे तो आपको अपने नाक और मुँह को बंद करके हवा को कान से निकालने की सलाह दी जाती है या आप कोई कैंडी या चुईगम को भी चबा सकते हैं।

15 – हवाई जहाज़ को उड़ने के लिए सिर्फ एक इंजन ही काफी होता है क्यूंकि इसके इंजन को लम्बे समय तक चलने के लिए बनाया जाता है इसलिए जहाज़ को केवल एक इंजन से भी उड़ाया और लैंड किया जा सकता है। जहाज़ के पायलट की ट्रेनिंग भी इसी तरह से की जाती है की वह भी केवल इंजन की मदद से जहाज़ को उदा सकें।

हमारी यह पोस्ट 2020 में इंटरनेट पर मौजूद इनफार्मेशन के अकॉर्डिंग है। हम इसे एक ज्ञान वर्धक इनफार्मेशन की तरह दिखा और बता रहे हैं। अगर इस आर्टिकल से रिलेटेड कोई भी सुझाव या शिकायत है तो हमें digitalworldreview@gmail.com पर मेल करें!


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