कारगिल वॉर की हीरो गुंजन सक्सेना फिल्म का रिव्यू, फिल्म में क्या अच्छा है और क्या बुरा, किरदार, कहानी का प्लाट

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कैसी है गुंजन सक्सेना फिल्म 
कारगिल वॉर भारत के इतिहास का वह यादगार लम्हा है जब हिंदुस्तानी फ़ौज ने पाकिस्तानी फ़ौज के छक्के छुड़ा दिए थे और पाकिस्तान को उसकी सीमाओं का आभास करा दिया था। इस शानदार विजय का श्रेय भारतीय थल सेना और वायु सेना को दिया जाता है क्यूंकि यह युद मैदान में हुआ था जिसमे इन दोनो का बड़ा योगदान था। हलाकि उस समय पर महिलाओं के लिए सेना में अधिक सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थी लेकिन इसके बावजूद भी महिला सेनाओ ने भी इस युद्ध में भाग लिया था और अपने शौर्य से भारतीय सेना को विजय दिलाने में एक अहम् भूमिका निभाई थी। आज अगर उन वीरांगनाओ की बात जाये जिन्होंने कारगिल युद्ध में भाग लिया था तो  गुंजन सक्सेना का नाम सबके दिमाग में जरूर आता है जिन्होंने अपने साहस और पराक्रम से दुश्मन पीछे खदेड़ने में अहम् भूमिका निभायी थी।

गुंजन सक्सेना फिल्म जान्हवी कपूर के करियर को एक उचाई देने के लिए बहुत मायने रखती है और इसके लिए उन्होंने काफी मेहनत भी की थी जिसके तहत उन्होने रियल लाइफ की गुंजन सक्सेना से एक अच्छा बॉउंडेशन भी बना लिया था। पर क्या यह फिल्म वाकई में गुंजन सक्सेना को उतनी कामयाबी दिला पायी? तो इसका सीधा सा जवाब है नहीं। ऐसा इसलिए नहीं है की इस फिल्म को करण जोहर ने डायरेक्ट किया है और पब्लिक उनसे पहले से ही नाराज़ है और इस बात का खामियाज़ा जान्हवी को भी चुकाना पड़ा हो बल्कि इस फिल्म की स्टोरीलाइन, भारतीय एयर फाॅर्स की नेगेटिव इमेज और जान्हवी कपूर का इस फिल्म में बहुत साधारण सा काम इस फिल्म को डुबाने के प्रमुख करण है।

फिल्म की स्टोरीलाइन गुंजन सक्सेना के इर्द गिर्द घूम रही है इसलिए जरूरी यही था की डायरेक्टर इसमें किसी मझे हुए कलाकार को लेते मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया जिसका नतीजा इस फिल्म की पूरी कास्ट एंड सपोर्टिंग टीम को चुकाना पड़ रहा है। फिल्म का विवाद इसकी प्रमुख कलाकार द्वारा की गयी बचकानी अदाकारी ही नहीं बल्कि लेखक दवारा भारतीय एयर फाॅर्स को एक नेगेटिव इमेज को प्रस्तुत करना भी है जिसके कारण IAF ने पहले ही सेंसर बोर्ड को एक पत्र लिख कर अपनी नाराज़गी जाहिर कर दी थी मगर आजकल भारतीय सिनेमा के कुछ डायरेक्टर्स भारत की एक गलत छवि बनाने पर उतारू है जिसके अंतगर्त यह फिल्म भी आती है।

फिल्म में भारतीय वायुसेना के अंदर लिंग पक्षपात को दिखाया गया है जोकि एक गलत छवि को प्रस्तुत करता है युवाओं में सेना के प्रति। अगर आप गुंजन सक्सेना के कई पुराने बायोपिक भी देखें या पड़ें तो आपको इसका जिक्र नहीं मिलेगा। हाँ, उन्होंने यह जरूर कहा है की शुरुआत में उन्हें जरूर दिक्कत आयी थी मगर समय के सांथ सब सही होता चला गया। फिल्म में सिर्फ गुंजन सक्सेना को एक महिला पायलट के तौर पर दिखाया गया है जबकि उनके सांथ एक और महिला पायलट थी और दोनों ही एक दुसरे की मदद करती थी जिसे की फिल्म में नहीं दिखाया गया है और पूरी तरह से फिल्म को नेगेटिव तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश की गयी है।

आप इस आर्टिकल को इंग्लिश में भी पढ़ सकते हैं।

क्या गुंजन सक्सेना फिल्म हमें देखनी चाहिए?
अगर आप फिल्म के बाकि कलाकारों के बहुत बड़े फैन हैं तो ही आपको यह फिल्म देखनी चाहिए क्यूंकि उनका काम इस फिल्म में काफी अच्छा है। फिल्म में कुछ अच्छी बातें भी हैं जोकि समाज के लिए अच्छे उदहारण बन सकती हैं जैसे बाप का अपनी बेटी के लिए प्यार, युद्ध के दृश्यों को प्रस्तुत करने का तरीका। 

गुंजन सक्सेना फिल्म की रेटिंग
इस फिल्म को IMDB पे 5.3 रेट मिला है 10 में से और वहीँ हम इस फिल्म को 5 में से 2.5 स्टार देंगे। केवल 60% लोगो ने इस फिल्म को गूगल पर लाइक किया है।

गुंजन सक्सेना फिल्म में क्या अच्छा है?
फिल्म की कहानी को दर्शको की रूचि के अनुसार रखा गया है इसलिए फिल्म अपने फोकस पॉइंट को मजबूती से पकड़ कर चलती है जैसे गुंजन सक्सेना क्यों पायलट बनाना चाहती है, उसकी इस इच्छा में क्या मुसीबतें आती हैं, अपने काम में उन्हें क्या परिशानियों का सामना करना पड़ता है और आखिर में जंग के दौरान उन्होंने कैसे बहादुरी से दुश्मनो का सामना किया।

फिल्म के किरदारों के ऊपर पूरा ध्यान रखा गया है इसलिए कहानी में आप अपने आप को किरदारों के सांथ जल्दी से जोड़ पाते हो जिससे कहानी समझने में आसानी होती है।

फिल्म में प्रमुख किरदार को छोड़कर बाकि सभी का काम आपको अच्छा लगेगा जिसकी वजह से यह फिल्म थोड़ा देखने लायक तो जरूर है।

गुंजन सक्सेना फिल्म में क्या गलत है?
भारतीय वायुसेना के शौर्य को अच्छे से परदे पर उतारा नहीं गया है जिससे देखकर बुरा जरूर लगेगा क्यूंकि लड़ाई के दृश्य सिर्फ कुछ ही मिनटों के हैं जिसमे की आप उस जंग के माहौल में उस जोश और उस तनाव को महसूस नहीं कर पाते हो जोकि जंग के दौरान होती है, यह फिल्म की सबसे बड़ी कमी है।

फिल्म की प्रमुख अदाकारा द्वारा इतना बचकाना और भाव रहित प्रदर्शन देखकर दर्शको को जरूर बुरा लगा होगा की क्यों इस फिल्म में किसी अच्छी अदाकारा को नहीं लिया गया।

फिल्म द्वारा भारतीय वायुसेना का नेगेटिव इमेज बनाना किसी भी लिहाज से एक अच्छा कदम नहीं कहा जा सकता है क्यूंकि इससे आप युवाओं को एक बुरा संदेश दे रहे हो जोकि देश के लिए खतरनाक हो सकता है।

फिल्म का डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले और म्यूजिक
फिल्म का डायरेक्शन औसत है और आपको फिल्म में देशभक्ति की भावना बहुत ही कम देखने को मिलेगी जबकि ऐसी फिल्मे देश प्रेम को उजागर करने के मकसद से ही बनाई जाती हैं। फिल्म के क्लाइमेक्स में भी बहुत ही औसत दर्जे का काम देखने को मिलता है जिससे आपको किसी जंग को देखने का एहसास कम ही होता है।

फिल्म का स्क्रीनप्ले बहुत ज्यादा सरप्राइज से भरा हुआ नहीं है और कहानी को बिलकुल सिंपल तरीके से ही खत्म कर दिया गया है जोकि देखने में बुरा लगता है।

फिल्म का म्यूजिक भी कोई जोश से भरा हुआ नहीं और कोई भी ऐसा गाना नहीं है जोकि देश प्रेम या किसी पल को जोश या जूनून से भर दे।

गुंजन सक्सेना फिल्म की कहानी का प्लाट
फिल्म की शुरुआत होती एक छोटी बच्ची से जोकि अपने भाई के सांथ हवाई जहाज में कहीं जा रही है मगर उसे खिड़की वाली सीट पर बैठना है ताकि वह आसमान के बादलों को देख सके मगर उसका भाई नहीं मानता। लेकिन उसकी यह जिद पूरी हो जाती है जब फ्लाइट की एयर होस्टेस उसकी मदद करती है और उसे आसमान का नज़ारा दिखाती है। यह पहला कदम था गुंजन सक्सेना का अपने पायलट बनने के लिए अब उसने ठान लिया है की वह बड़ी होकर पायलट बनेगी लेकिन इसमें उसका सांथ केवल उसके पिता ही देते हैं। वह अपनी पढ़ाई ख़त्म करके पायलट बनने के लिए अप्लाई करती है और यहाँ उसका सेलेक्शन कड़ी मेहनत के बाद ही होता है।

एयर फाॅर्स में ज्वाइन होने के बाद जिंदगी का असली संघर्ष चालू होता है जहाँ उसे उसके जेंडर के हिसाब से आँका जाता है न की उसके टैलेंट और मेरिट के हिसाब से। गुंजन की तमाम कोशिशों के बावजूद भी वह अपना सपना पूरा नहीं कर पाई है जोकि है प्लेन उड़ाने इसलिए बीच में वह हारकर घर भी आ जाती है छुटी का बहाना लेकर और अब वह शादी करने का इरादा बना चुकी है। मगर गुंजन के पिता उसे साहस देते हैं जिससे गुंजन में फिर से जोश आ जाता है और वह वापस से कैंप चली जाती है।

कुछ ही समय बाद कारगिल का युद्ध छिड़ जाता है जिसमे एयर फाॅर्स के सारे सिपाही जाते हैं और गुंजन को भी हेलीकाप्टर मिलता है उड़ाने के लिए और उनकी जिम्मेदारी है घायल सिपाहियों को वापस लाने की जिसे गुंजन सक्सेना काफी सफलता पूर्वक अंजाम देती है जिससे अब फाॅर्स के सभी जवान, सीनियर और मीडिया वाले गुंजन की तारीफ करते हैं। गुंजन की इसी पराक्रम के लिए उन्हें सरकार द्वारा शौर्य चक्र का मैडल दिया जाता हैं। गुंजन की यह कामयाबी उन सभी लोगो के लिए एक सबक है जोकि अब भी मानते हैं की लड़की लड़को का मुकाबला नहीं कर सकती।

गुंजन सक्सेना फिल्म के किरदार
जान्हवी कपूर: गुंजन सक्सेना, पंकज त्रिपाठी: अनूप सक्सेना, अंगद बेदी: अंशुमान सक्सेना, विक्की आहूजा, रीवा अरोरा, आशीष भट्ट, रौनक भिंदर, वीनीत कुमार, गुरनाज़ मिट्टू, गुलशन पांडेय, रचना पारुलकर, बार्बी राजपूत, आयेशा राजा

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