गुलाबो सिताबो फिल्म का रिव्यू, पूरी कास्ट और फिल्म में क्या अच्छा है, क्या बुरा है।

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फिल्म का ओवरव्यू
लालच एक बुरी बला है जो अच्छे से अच्छे को रोड़ पर ले आती है, गुलाबो सिताबो फिल्म एक मकान मालिक और किरायेदार की नोक झोंक और हवेली का लालच के ऊपर है। यह फिल्म आपको खूब गुदगुदाएगी, जहाँ अमिताभ बच्चन मकान मालिक और आयुष्मान खुराना किरायेदार के किरदार निभा रहे हैं।

इस आर्टिकल को आप इंग्लिश में भी पढ़ सकते हैं।

फिल्म में अमिताभ बच्चन की जबरदस्त एक्टिंग, मेकअप और बोलने का लेह्जा आपको सोचने पर मजबूर कर देती है की अमिताभ 80 साल में होने के बावजूद भी अच्छे अच्छे कलाकारों की छुट्टी करने की क्षमता रखते हैं। फिल्म का निर्देशन सुजीत सरकार द्वारा किया गया है जोकि 12 जून 2020 को अमेज़ॉन प्राइम पर रिलीज़ की जा चुकी है। फिल्म के जोनर की बात की जाये तो यह एक कॉमेडी ड्रामा फिल्म है।

फिल्म की कहानी का प्लाट 
कहानी नवाबो के शहर लखनऊ की है जहाँ लखनऊ के पुराने गलियारों को दिखाया गया है। वही पर है एक फातिमा महल जो फातिमा बेगम को उनके दादा से विरासत में मिला था, फातिमा बेगम को इस महल से इतना प्यार है की उन्होंने इस महल के लिए अब्दुल रेहमान की मोहबत को ठुकरा दिया था और मिर्जा साहब से शादी कर ली क्यूंकि वे घर जमाई बनाने को तैयार थे।

मिर्जा साहब पैसो के बहुत बड़े लालची हैं। उनके महल में कुछ किरायेदार रहते है जिनमे बाके रस्तोगी(आयुष्मान खुराना), मिश्रा जी, सैयद जोकि पूरी फैमिली के सांथ यहाँ पर रहते हैं। सारे किरायेदार जो इस हवेली में रहते हैं वह सभी 70 रूपये महीने का किराया देते हैं लेकिन बाके सिर्फ 30 रूपये ही किराया देता है। यदि मिर्जा साहब किराया बढ़ाने की बात करे तो उन्हें डांट देता है। मिर्जा साहब कई पैतरे अपनाते हैं बाके को घर से निकलवाने के लिए लेकिन बाके भी अपनी जिद को नहीं छोड़ता।

वहीँ पुरातत्व विभाग का ज्ञानेश शुक्ला जिसकी नज़र भी इस हवेली पर टिकी हुई है। जोकि इस हवेली को ऐतिहासिक विरासत साबित करने पर लगा हुआ है। वही मिर्जा साहब हवेली को अपने नाम पर करना चाहते हैं जोकि फातिमा बेगम के नाम पर है। अब लालची मिर्जा साहब की मुलाकात होती है एक किरायेदार से जिनका वकालत का काम है और इसकी मदद से वे हवेली को अपने नाम पर करवाना चाहते है।

कई पैतरों को अपनाने के बाद भी मिर्जा साहब के हाथ सिर्फ दो कमरों वाला एक खण्डहर मकान और एक कुर्सी आती है। जो उन्हें काफी पसदं थी क्यूंकि फातिमा मरने से पहले फातिमा महल को बड़ी चालाकी से सांथ अब्दुल रेहमान के नाम कर आई थी। लालची मिर्जा साहब अब बग्गी चला रहे हैं और अपना गुजरा कर रहे है।  

फिल्म में क्या अच्छा है – फिल्म में अच्छा यह है की अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना यानि मकान मालिक और किरायेदार की नोक झोंक को काफी अच्छे से दिखाया गया है जोकि आपको काफी एंटरटेन करेगी।

कहानी में गलत क्या है – कहानी में गलत यह है की कहानी काफी स्लो चलती है जो कभी कभी काफी ज्यादा बोर करती है।

फिल्म के ट्रेलर का रिव्यू पढ़िए

फिल्म की कास्ट
इस फिल्म में आपको अमिताभ बच्चन – मिर्ज़ा का रोल प्ले करते हुए नज़र आएंगे तथा बाकि कास्ट की बात की जाये तो आयुष्मान खुराना – बांके रस्तोगी, विजय राज़ – ज्ञानेश शुक्ला, बृजेन्द्र काला – क्रिस्टोफर क्लार्क, सृष्टि Shrivastava – गुड्डो, फर्रुख जफर – फातिमा बेगम, टीना भतिअ – दुलहीन, नलनीश नील – शेखु।

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