ओ.टी.टी. प्लेटफार्म पर सेंसर बोर्ड की लगाम कब लगेगी?, फ्लैश सीरीज का रिव्यू, सीरीज में क्या अच्छा है और क्या बुरा, किरदार, सीरीज की कहानी का प्लाट

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कैसी है फ्लैश सीरीज?
जबसे ओ.टी.टी प्लेटफार्म आया है दर्शको को अपने मन मुताबिक कंटेंट देखने और डायरेक्टर्स का इसे बनाने का अच्छा जरिया मिल गया है जहाँ डायरेक्टर अपने दिमाग की सभी गंद को परदे पर उतारने को उतारूं हैं। वहीँ दर्शक भी इसे देखकर डायरेक्टर्स को और बढ़ावा दे रहे हैं ऐसे कंटेंट को बनाने के लिए चाहे इसका अंजाम बाद में कितना भी बुरा हो। जब तक ओ.टी.टी. प्लेटफार्म पर सेंसर बोर्ड की तलवार नहीं आती है तब तक डायरेक्टर्स के पास अधिकार है कुछ भी बनाकर दिखने का।

हाल ही में एक नई सीरीज रिलीज़ हुई है एरोस नाव पर जिसका नाम है फ्लैश जिसके अंदर मुख्य किरदार निभाया है स्वरा भास्कर ने तथा अक्षय ओबेरॉय ने। सीरीज का मुख्य विषय है लड़कियों और बच्चो को खरीदने और बेचने जैसे गंभीर जुर्म पर मगर सीरीज में कुछ ज्यादा ही खून ख़राबा, सेक्स और बच्चो को लेकर बहुत ही आपत्तिजनक दृश्य दिखाए गए हैं जिसे देखकर नहीं लगता है की यह सीरीज इस जुर्म को ख़त्म करने पर जोर दे रही है।

सीरीज की कहानी लड़कियों को बेचने के प्लाट से चालू होती है मगर धीरे धीरे उसमे पुरानी दुश्मनी का एंगल नज़र आने लगता है जोकि समझ के ही परे है। सीरीज को डायरेक्ट किया है अमरीश मांजरेकर और सिद्धार्थ आनंद ने जिहोने इस सीरीज को थोड़ा इमोशनल बनाने की भी कोशिश की और उसमे भाई बहन वाला एंगल डालने की कोशिश की जोकि एक तरफ़ा था जिसे देखकर यही लगा की ऐसा करने की क्या जरूरत थी और अगर करना ही था तो बहन के सांथ सांथ भाई को भी थोड़ा इमोशनल दिखाना चाहिए था।

सीरीज की कास्टिंग सीरीज के किरदारों के ऊपर बिलकुल भी फिट नहीं बैठ रही है जिसमे की सबसे पहला नाम आता है स्वरा भास्कर का, उनका रोल सच में एक बड़ी अफसर का तो बिलकुल नहीं लग रहा था। जिस तरह के पैशन और रुवाब की जरूरत होती है बड़े अफसर को दिखाने के लिए वह यहाँ नहीं महसूस हो रहा है। विल्लन के तौर पर अक्षय ने जरूर अच्छा काम किया है मगर उनके रोल को भी डायरेक्टर ने बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है जिसे आप सीरीज देखेंगे तो समझ ही जायेंगे।

आप इस आर्टिकल को इंग्लिश में भी पढ़ सकते हैं।

क्या फ्लैश सीरीज हमें देखनी चाहिए?
सीरीज इंसानो के खरीदने और बेचने के विषय पर बनी है इसलिए इसमें सेक्स, खून खराबा बहुत ही ज्यादा दिखाया गया है जिसे की बहुत हद तक टाला भी जा सकता था। बेशक ही इस तरह की सीरीज किसी के भी दिमाग पर गन्दा असर कर सकती है इसलिए आपको इस तरह की सीरीज को नहीं देखना चाहिए अगर आप इस तरह के कंटेंट को देखने के शौकीन नहीं हैं तो।

फ्लैश सीरीज की रेटिंग
फ्लैश सीरीज को IMDB पे 5.8 रेट मिला है 10 में से और वहीँ हम इस सीरीज को 5 में से 2 स्टार देंगे। 

फ्लैश सीरीज में क्या अच्छा है?
सीरीज में किरदारों का बैकग्राउंड अच्छे से बिल्ड किया गया है ताकि आप कहानी के किरदारों से अच्छे से जुड़ पाएं। कहानी को किरदारों के पास्ट और प्रेजेंट से अच्छे से जोड़कर दिखाया गया है जिससे दर्शक कहानी के किरदारों के बारे में और ज्यादा जान पाएं जोकि जरूरी है किसी भी अच्छी सीरीज के लिए।

सीरीज में किरदारों के काम की बात की जाये तो अक्षय का काम काफी ज्यादा पसंद किया जा रहा है हलाकि अभी भी उनका बेहतरीन काम हमें देखने को नहीं मिला है।

फ्लैश सीरीज में क्या गलत है?
सीरीज में जरूरत से ज्यादा खून खराबा दिखाया गया है, बच्चो को लेकर ऐसे दृश्यों को फिल्माया गया है जोकि किसी भी सभय समाज के लिहाज से सही नहीं कहा जा सकता है।

सीरीज बीच में बहुत ज्यादा स्लो हो जाती है जिससे आप बोर होने लगते हो, सीरीज में ज्यादा थ्रिल और सस्पेंस नहीं है जिससे दर्शक उससे बधें रहे।

सीरीज की कहानी का मकसद मानव तस्करी से बदलकर बदले में आ जाता है जो की सच कहें तो पूरी तरह से बचकाना लगता है।

फ्लैश सीरीज का डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले और म्यूजिक
सीरीज का डायरेक्शन थोड़ा बहुत ठीक कहा जा सकता है की क्यूंकि डायरेक्टर ने सीरीज की लोकेशंस को अच्छे शूट किया है जिससे आपको एक अच्छी कहानी का अनुभव हो सके। डायरेक्टर द्वारा कोशिश की गयी है की वह सभी से उनका बेहतरीन काम ले सके लेकिन किरदार अपना बेस्ट नहीं दे पाए जोकि सीरीज देखकर आपको अंदाजा लग जायेगा।

स्क्रीनप्ले और म्यूजिक बिलकुल औसत दर्जे का है जिसके कारण आपका सारा मजा बेकार हो जाता है।

फ्लैश सीरीज की कहानी का प्लाट
सीरीज की कहानी दो भागो में चल रही है जहाँ एक हिस्से में लड़कियों की तस्करी हो रही हैं तो वहीँ दूसरी तरफ बच्चो की। कहानी में एंट्री होती है कहानी की मैन किरदार स्वरा भास्कर जोकि एक पुलिस अफसर हैं वह लड़कियों की तस्करी करने वाले रैकेट को पकड़ती हैं लेकिन उनके गुस्से की वजह से उन्हें इसके लिए ससपेंड कर दिया जाता है। वहीँ उनके थाने में एक केस आता है एक एन आर आई लड़की की तस्करी का जिसके लिए वह स्वरा भास्कर को पैसे देते हैं की वह इस केस की जाँच करे।

दूसरी तरफ छोटे बच्चो के तस्कर बच्चो को कैद करके रखते हैं ताकि उन्हें वह बेच सकें लेकिन एक बच्ची की समझदारी से सभी बच्चे मिलकर उन अपराधियों को मार देते है और बाकि को पुलिस गिरफ्तार कर देती है लेकिन इसमें एक गुंडा बच निकलता है और वह उस बच्ची के छोटे भाई को अगवा कर लेता है और वही बच्चा आगे जाकर एक बहुत बड़ा मानव तस्कर बन जाता है और वह बच्ची पुलिस अफसर जिसका रोल स्वरा निभा रही है।

अंत में दिखाया गया है की स्वरा अपनी सूझबूझ से एन आर आई लड़की को बच्चा लेती है जिसे बेचने के लिए नहीं बल्कि पुरानी रंजिश को पूरा करने के लिए अगवा किया गया था। स्वरा को पता चल जाता है की उसका छोटा भाई इन सब के पीछे है तो वह पहले उसे समझाती है मगर वह नहीं मानता है तो उसे गोली मार देती है अपनी जान बचाने के लिए, इसी के सांथ यह सीरीज ख़त्म हो जाती है।

फ्लैश सीरीज के किरदार 
स्वरा भास्कर: राधा, महिमा मकवाना: ज़ोया, केविन: जयंत, अक्षय ओबेरॉय: ताज, ईशान अनुराधा खन्ना, विद्या मालवडे, बिजौ तांग्जाम

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