दृश्यम 2 फिल्म का हिंदी में रिव्यू, किरदार, फिल्म की कहानी का प्लाट। फिल्म क्या अच्छा है और क्या बुरा। (drishyam 2 film ka hindi mein review, star cast, kahani hindi mein)

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दृश्यम 2 फिल्म का हिंदी में रिव्यू (drishyam 2 film ka hindi mein review)

अगर आप भी बेहतरीन राइटिंग, अदाकारी, सस्पेंड, स्क्रीनप्ले के लवर हैं तो यह फिल्म आपके लिए बेहतरीन विक्लप है जिससे आपको यह एहसास होगा की अच्छी फिल्म बनाने के लिए यह जरूरी नहीं की उसमे ढेर सारा एक्शन और बड़ी स्टार कास्ट हो। दोस्तों मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में आपको एक से बढ़कर एक फिल्म देखने को मिलेगी जिसका एक और नमूना है दृश्यम 2 फिल्मजीतू जोशफ ने इस फिल्म को लिखा और डायरेक्ट किया है जिनके काम को देखकर अच्छे से अच्छा डायरेक्टर भी उनके काम की तारीफ किये बिना नहीं रह सकता है।

कहानी की खासियत है की शुरू के कुछ घंटे आपको इस तरह से बढ़ने की कोशिश करते हैं की आपको वह सब कुछ देखने में काफी बोरिंग लगेगा लेकिन जैसे कहानी आगे बढ़ती है और जब अंत में क्लाइमेक्स खुलता है तब आपको शुरू के उन दृश्यों का महत्व समझ में आयेगा। डायरेक्टर ने बेहतरीन तरीके से कहानी की शुरुआत की है जिससे कहानी का हर एक दृश्य का मतलब हो और जोकि दर्शकों को समझने में भी आसान हो की यह सब कैसे हुआ। यह सब आपके अच्छे डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करना है इसकी पकड़ पर निर्भर करता है जिसमे यह फिल्म ने कमाल कर दिया है।

फिल्म की खासियत यह है की दृश्यम की पहला पार्ट जहाँ पर ख़त्म हुआ था दृश्यम 2 फिल्म वहीँ से आगे बढ़ती है और अपने दूसरे भाग को दर्शकों के बीच पहुंचाने में कामयाब साबित रही है। अधिकतर फिल्म जिनके पहले भाग हिट होते हैं उनके दूसरे भाग उतने अच्छे नहीं बन पाते हैं सिवाय कुछ फिल्म को छोड़कर लेकिन इस फिल्म का जादू दूसरे भाग में और अच्छे से निकल कर आया है।

दरअसल में फिल्म के कुछ बातें जिनकी वजह से मोहन लाल का परिवार पकड़ा जा सकता था, जोकि हो सकता है आपने पहले भाग में आपके दिमाग में आये हो ऐसी ही छोटी बातों को जोड़कर दूसरे भाग को तैयार किया गया है। पहले भाग के सभी कमजोर कड़ियों को दोबारा से पक्का किया गया है ताकि एक बार फिर मोहन लाल कैसे अपने परिवार को बचा पाते हैं इसकी तारीफ इस फिल्म को देखने वाले हर दर्शक करे।

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दृश्यम 2 फिल्म की रेटिंग कितनी है? (drishyam 2 film ki rating)

इस फिल्म को IMDB पे 10 में से 8.8 की रेटिंग मिली है और हम इस फिल्म को 5 में से 4 स्टार देंगे।


कैसी है दृश्यम 2 फिल्म और क्या हमें इसे देखना चाहिए? (kaisi hai drishyam 2 film aur kya hamein isey dekhna chahiye?)

हाँ, यह एक सस्पेंस, थ्रिल और भावनाओं से भरी हुई फिल्म है जिसे देखने पर आपको अपने पैसे वसूल होने की पूरी खुशी मिलेगी।


दृश्यम 2 फिल्म में परफॉरमेंस (drishyam 2 film mein performance)

मोहनलाल ने यह साबित कर दिया की क्यों उन्हें एक्टिंग का बादशाह कहा जाता है और यह भी सवाल उठना बनता है की क्यों उन्हें अभी तलक बॉलीवुड की बड़ी फिल्मों में नहीं बुलाया गया। चेहरे के भावों को किस तरह से परदे पर उतरना है जिसमे दर्शकों को सही में महसूस हो की हाँ एक बाप इस दृश्य में डरा हुआ है या इस दृश्य में एक बाप एक खो चुके बच्चे को ढूंढ रही है तो उसके लिए अपने चेहरे पर हल्का सा गम और खेद को जताना हो। सच कहें तो आपको अल्फ़ाज़ नहीं मिलेंगे इतनी अच्छी अदाकारी को देखकर।

सच कहें पूरी फिल्म में सभी का काम तो अच्छा है लेकिन मोहनलाल ने सभी के हिस्से के तारीफ अपनी और खींच ली है अपनी लाजवाब एक्टिंग से। फिल्म सिंपल तरीके से लिखी गयी है इसलिए एक्शन न होते हुए भी आपको मोहनलाल सच में सिटी और ताली बजाने के लिए मजबूर कर देते हैं।

मीणा का किरदार हलाकि पूरी फिल्म में एक घबराई हुई माँ, पत्नी के रूप में दिखाया गया है लेकिन सच कहें तो इसमें कुछ गलत भी नहीं था क्यूंकि एक आम इंसान के हाथों एक खून हो जाये जिसके कारण उसका पूरा परिवार मुसीबत में पद सकता है तो वह घबराएगा ही जिसे डायरेक्टर ने अच्छे सी समझा और मीणा के रूप में उसे दिखने की कोशिश की जिसे मीणा ने अच्छे से निभाया भी है।

एस्तेर अनिल, अनसिबा दोनों ही अपने रोल में परफेक्ट नज़र आती हैं जहाँ दोनों परेशान और आगे आने वाली मुसीबतों के सांथ अपने घर का हौसला बढ़ाने की कोशिश करती हुई नज़र आती हैं। बाकि किरदारों की बात करें आशा शरथ, सिद्दीकी का रोल इस फिल्म में उतना ज्यादा और प्रभावी नहीं लगता है लेकिन फिर भी उनका काम तारीफ के काबिल जरूर है।

साईकुमार, गणेश कुमार और पुलिस विभाग के ज्यादातर कलाकार अपनी छाप छोड़ने में अच्छे से कामयाब हुए हैं क्यूंकि उनकी अच्छी और कस्सी हुई अदाकारी के बिना भी यह फिल्म उतनी अच्छी नहीं बन सकती थी।


दृश्यम 2 फिल्म में क्या अच्छा है?

दृश्यम 2 फिल्म की ताकत है इसका स्क्रीनप्ले जोकि इतना सटीक है की इसमें शुरू में दिखने वाले बोरिंग दृश्य फिल्म के लिए कैसे उपयोगी बन जाते हैं और आपका मजा दुगना कर देते हैं यही फिल्म को खास बना देते हैं। बीच में आने वाले ट्विस्ट और इमोशंस आपको किरदारों के सांथ जुड़ने के लिए मजबूर कर देते हैं। फिल्म की कहानी को पहले पार्ट से जोड़कर उसी को आगे उसी तरह लेकर जाना एक कमाल की राइटिंग और स्क्रीनप्ले के जरिए ही मुकीम है जोकि यहाँ आपको देखने को मिलेगा।

दृश्यम 2 फिल्म का म्यूजिक जोकि औसत है लेकिन बैकग्राउंड संगीत आपको फिल्म के सांथ जुड़े रखने में सहायता करता है।

फिल्म के शुरू के कुछ समय में किरदारों के सांथ जुड़ने के लिए कहानी को थोड़ा धीमा लिखा गया है जोकि काफी अच्छा आईडिया था।

फिल्म का डायरेक्शन और सिनेमाटोग्राफी काफी अच्छा है जिसमे सभी की भावनाओ और तनाव को अच्छे से परदे पर लाया गया है। इसके सांथ ही सारी लोकेशन पहले वाली ही रखी गयी है जोकि आसानी से आपको पुरानी फिल्म के सांथ जोड़ने में कामयाब हो जाती है।


दृश्यम 2 फिल्म में क्या बुरा है?

फिल्म का पहला पार्ट जहाँ आपको हकीकत से जुड़ा हुआ लगता है लेकिन सेकंड सीजन आपको कुछ हद तक फ़िल्मी लग सकता है क्यूंकि इतना कुछ करना आम आदमी के बस की बात नहीं है यह आपको जरूर लगेगा।

फिल्म शुरू में आपको थोड़ा बोर कर सकती है लेकिन उसे छोड़ना आपके फिल्म के क्लाइमेक्स के मजे को कम कर देगा इसलिए उसे देखना भी जरूरी है इसलिए उस लम्बे भाग को थोड़ा छोटा करके फिल्म को और अच्छा किया जा सकता था क्यूंकि इसके कारण फिल्म भी कुछ लम्बी बन गयी है।


दृश्यम 2 फिल्म के टीम मेंबर्स (drishyam 2 film ke crew members)

डायरेक्टर: जीतू जोसफ
राइटर: जीतू जोसफ

 

दृश्यम 2 फिल्म की स्टार कास्ट (drishyam 2 film ki star cast)

मोहनलाल: जॉर्ज कुट्टी, मीणा: रानी, अनसिबा: अंजू, एस्थेर अनिल: अनु, सिद्दीकी: प्रभाकर, आशा शरथ: गीता प्रभाकर, साईकुमार: विनया चंद्रन, मुरली गोपी: आइ.जी थॉमस बास्टिन, गणेश कुमार: फिलिप मेंथियु, अंजलि नायर: सरिता, सुमेश चंद्रन: साबू, अंटोनी पेरुम्बवूर: अंटोनी जोसफ, दिनेश प्रभाकर: राजन, अजित कुठाटुकुलम: जोस, नारायणन नायर: सुलैमान   


दृश्यम 2 फिल्म की कहानी(drishyam 2 film ki kahani hindi mein)

फिल्म की कहानी शुरू होती है जंगल में भागते हुए एक आदमी से जोकि अपने साले को मार कर भाग रहा था और छुपने की जगह ढूंढ रहा था इस बीच वह जॉर्ज कुट्टी को रात के अँधेरे में फावड़ा लेकर एक बन रही बिल्डिंग में देखता है। इसके बाद वह अपनी बीवी के पास पहुँचता है लेकिन यहाँ पर पुलिस आ जाती है और इस आदमी (जॉर्ज) को पकड़ लेती है।

अब कहानी 6 साल आगे बढ़ती है जहाँ जॉर्ज कुट्टी अपनी पत्नी मीरा के सांथ दिखाई देते हैं जहाँ मीरा अपने पति को फिल्म न बनाने की बात कहती है लेकिन जॉर्ज जोकि फिल्म बनाने का सपना पूरा करना चाहता है उसकी बात को ताल देता है। इनके बगल में एक पति पत्नी (साबू और सरिता) रहते हैं जोकि लड़ते रहते हैं जिसके कारण साबू अपनी पत्नी को मरता रहता है इसलिए जॉर्ज सरिता को राय देता है की वह साबू की कंप्लेंट कर दे लेकिन वह ऐसा नहीं करती है और वह ऐसा क्यों नहीं करती यह बाद में पता चलेगा।

जॉर्ज ने अपने थिएटर में कैमरा लगाए जिससे वह अपने थिएटर पर नज़र बनाये रखे अगले दृश्य में हम देखते हैं जॉर्ज की मुलाकात वरुण के पिता से होती है जोकि फिर से उससे अपने बच्चे की लाश के बारे में पूछते हैं लेकिन जॉर्ज उन्हें नहीं बताता और माफ़ी मांगता है इसके लिए। जॉर्ज जोकि एक फिल्म बनाना चाहता है और उसके लिए एक कहानी के लेखक के पास जाता है और उन्हें पैसे देता है की वह लिखी हुई कहानी का अंत बदल दें क्यूंकि उसे उसमे कमी लग रही है।

अगले दृश्य में हम देखते हैं की वह कैदी अब जेल से बहार आ गया है और काम की तलाश कर रहा है। वहीँ जॉर्ज की बहन को उस दिन के हादसे की वजह से रात को बुरे ख्याल आते हैं और इसके लिए जॉर्ज अपनी बहन का इलाज भी करवाता है। मीरा अपने ग़मों और दुःख को अपनी पड़ोसन सरिता के सांथ बाटंती है।

अब मीरा जोकि काफी बेचें हो चुकी है वह कुछ हद तक अब सरिता के आगे अपने राज़ को धीरे धीरे खोलने लगती है अब यहाँ राज़ खुलता है की सरिता और साबू दरअसल में पुलिस के ही लोग हैं और उन्होंने जॉर्ज के घर में माइक छुपा कर लगा रखे हैं। अब पुलिस को लगता है की जरूर जॉर्ज ने लाश कही और रख दी है जिसके कारण उन्हें लाश नहीं मिल रही है।

पुलिस का शक चर्च पर जाता है इसलिए वह वहां खोदने के लिए जाती है जिसके बारे में सरिता मीरा को बताती है जिससे मीरा घबरा कर जॉर्ज से लाश के बारे में पूछती है लेकिन जॉर्ज नहीं बताता जिसे सरिता और साबू भी सुन रहे होते हैं अपने हैडफ़ोन पर। कैदी अब जॉर्ज से मिलता है और उसे याद आ जाता है की यह वही आदमी है जिसे उसने फावड़े के सांथ देखा था अब यह बात वह पुलिस को बता देता है कुछ पैसे लेकर।

पुलिस अब थाने में खोदती है तो उन्हें लाश मिल जाती है इसलिए वह जॉर्ज के परिवार को गिरफ्तार कर लेती है और कोर्ट में पेश करती है लेकिन यहाँ एक और ट्विस्ट सामने आता है की वह लाश किसी और की है। दरअसल में जॉर्ज ने दूसरी लाश और नकली सबूत रख दिए और अपने जीवन पर घटी कहानी को वह लेखक की मदद से किरदारों को बदलकर एक किताब के रूप में छाप देता है और इसी किताब का उदहारण देकर वकील पुलिस पर झूठे आरोप लगाने का दावा करते हैं जिसके कारण कोई सबूत न होने के कारण जॉर्ज को छोड़ दिया जाता है।

इस फिल्म का असली क्लाइमेक्स इसके अंत में ही है जिससे आपको शुरू में समझने की कोशिश की गयी है बस आपको उसे ध्यान से देखना है।


अंत में यह कहना चाहेंगे इस फिल्म का हिंदी डब न होने के कारण हमें और हर अच्छे रिव्यु करने वालों के लिए बड़ा मुश्किल था इसका रिव्यु जल्दी लेकर आना अगर आप इस फिल्म की भाषा में परफेक्ट न हो तो। लेकिन हमने कोशिश करी है की भले ही सबटाइटल के सांथ ही इस फिल्म को देखकर इसका जितना हो सके उतना सही रिव्यु आपके सामने रखें।


हम इसे एक ज्ञान वर्धक इनफार्मेशन की तरह दिखा और बता रहे हैं। अगर इस आर्टिकल से रिलेटेड कोई भी सुझाव या शिकायत है तो हमें digitalworldreview@gmail.com पर मेल करें!


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