“दिल बेचारा” फिल्म का रिव्यू, फिल्म में क्या अच्छा है और क्या बुरा, फिल्म के किरदार, फिल्म की कहानी

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कैसी है “दिल बेचारा” फिल्म
फिल्म में एक मैसेज स्ट्रॉन्ग्ली दिया गया है की आप लाइफ को किसी लक्ष्य की तरह न जी कर उसे जिंदादिली से जियोगे तो ज्यादा एन्जॉय कर पाओगे भले ही आपके पास कुछ ही दिन क्यों न बचे हों। जीवन को लक्ष्य के सांथ जीकर आप अपने लक्ष्य को तो पा लोगे लेकिन जिंदगी के खूबसूरत पलो को मिस कर दोगे। फिल्म का यह मैसेज को बहुत ही बेहतरीन तरीके से परदे पर निभाया है सुशांत सिंह राजपूत ने, उनकी एक्टिंग देख आपको यह जरूर महसूस होगा की इतने अच्छे कलाकार की यह फिल्म और बाकि की फिल्मे भी उन्हें जरूर थिएटर में जाकर जरूर देखनी चाहिए थी।

एक बात को जरूर इस फिल्म से और सामने आयी है की आप इस फिल्म सुशांत की आखरी फिल्म समझ कर बार बार देखने की बजाय अच्छे कलाकारों की फिल्मो को अगर थिएटर में जाकर देखें तो सुशांत को ज्यादा जस्टिस मिलेगा क्यूंकि बॉलीवुड की बहुत सारी फिल्में सिर्फ कचरा होने के बावजूद हिट हो जाती हैं जबकि “सोन चिड़िया” जैसी फिल्में अपना कलेक्शन भी पूरा नहीं कर पाती हैं। ऐसे में कोई भी कलाकार जोकि काफी अच्छा काम कर रहा है उसे ऑडियंस के इस रविये से जरूर फरक पड़ता है फिर भले ही बाद में उसकी याद में आप कितने ही कैंडल जला लें।

“दिल बेचारा” फिल्म कैसी है अगर इसका जवाब देना हो तो हम सीधे शब्दों में यही कहेंगे की यह फिल्म एक हॉलीवुड फिल्म “फाल्ट इन स्टार्स” की कॉपी है मगर डायरेक्टर मुकेश छाबरा और लेखक शशांक खेतान ने इस फिल्म को भारतीय कल्चर के हिसाब से इसमें कुछ बदलाव कर दिए और यही बदलाव इस फिल्म के लिए डिजास्टर बन गए जी हाँ दोस्तों फिल्म बहुत ही ज्यादा बेकार बनी है अगर इसकी तुलना की जाये “फाल्ट इन स्टार्स” से क्यूंकि यह फिल्म बहुत ही अच्छी लिखी और डायरेक्ट की गयी थी।

“दिल बेचारा” फिल्म के लेंथ है 1h 41min और इस फिल्म का जॉनर है कॉमेडी, ड्रामा, रोमांस और इस फिल्म को आप डिज्नी+ हॉटस्टार पर देख सकते हैं। पर हमारी राय में यह फिल्म सिर्फ एक बार देखने लायक है और वह भी सिर्फ सुशांत की एक्टिंग और ए.आर.रेहमान के म्यूजिक की वजह से वरना फिल्म में कुछ भी खास नहीं है की आप इसे बार बार देखकर अपना कीमती समय बर्बाद करें।

आप इस आर्टिकल को इंग्लिश में भी पढ़ सकते हैं।

“दिल बेचारा” फिल्म की रेटिंग
इस फिल्म को IMDB पे 9.6 रेट मिला है 10 में से और वहीँ हम इस फिल्म को 5 में से 2.5 स्टार देंगे। गूगल पे इसे 99% दर्शको ने लाइक किया है। यहाँ साफ़ दिख रहा है लोग इस फिल्म को भावुकता में आकर फिल्म को ज्यादा लाइक दे रहे हैं मगर ऐसा सिर्फ एक फिल्म को ही इतना पसंद करने से कुछ फायदा नहीं होगा बल्कि आपको हर अच्छी फिल्म को पसंद करना होगा।

फिल्म में क्या अच्छा है
फिल्म में क्या अच्छा है अगर इसकी बात की जॉए तो सिर्फ आपको सुशांत सिंह राजपूत की एक्टिंग ही देखेगी क्यूंकि इस फिल्म को सुशांत ने अपने कंधो पर उठा कर रखा है वरना यह फिल्म बहुत बुरी तरह से गिर जाती।

शुरुआत के आधे घंटे में फिल्म का पेस बहुत ही सही चलता है और ऑडियंस अपने आप को फिल्म से बाँध लेते हैं।

सैफ अली खान का एक छोटा सा किरदार है जोकि उन्होंने बहुत ही अच्छे से निभाया है और फिल्म को सही मोड़ प्रदान करता है।

फिल्म में क्या गलत है
इस फिल्म में गलतियां बहुत ज्यादा है लेकिन फिर भी हम कोशिश करेंगे की कुछ जरूरी बातें ही आपके सामने रखें।

इस फिल्म में करैक्टर बिल्ड बहुत ही ज्यादा बुरा है आपको किरदार आधी फिल्म में बदले हुए दिखेंगे लेकिन ऐसा क्यों हुआ है यह नहीं दिखाया गया है। जैसे कीजी बासु की माँ का किरदार अपने आप बदल जाता है जबकि ऐसा क्यों हुआ यह फिल्म में नहीं दिखाया जाता।

मेंनी और कीजी दोनों ही कैंसर के पेशेंट थे मगर जो भाव एक कैंसर पेशेंट के लिए बनाना चाहिए था वह इस फिल्म में मिसिंग था क्यूंकि ओरिजिनल फिल्म में दोनों को कैंसर के कारण क्या क्या परेशानी होती हैं जिंदगी जीने में उसे भी फिल्माया गया था जबकि वह दृश्य इस फिल्म में मिसिंग है। 

फिल्म के बाकि किरदारों पर ज्यादा फोकस नहीं दिया गया जिसके कारण आपका पूरा ध्यान सिर्फ मैन किरदारों पर चला जाता है जबकि अगर आप एक्चुअल फिल्म देखेंगे तो पाएंगे की उसमे सभी किरदारों का रोल सही से लिखा और दर्शाया गया था।

फिल्म को इंडिया के दर्शको के हिसाब से बहुत ज्यादा एडिट किया गया है और इसलिए बहुत सारे दृश्य फिल्म से हटा दिए गए और कुछ दृश्यों को आखिर की बजाय पहले दिखा दिया गया जोकि बहुत ज्यादा लॉजिक से बाहर निकल जाता है क्यूंकि फिर उस दृश्य की होने का सही कारण ही मिस हो जाता है।

सैफ अली खान का रोल देखने पे आपको अच्छा तो लगता है लेकिन इसमें भी काफी ज्यादा एडिट करके छोटा कर दिया गया जबकि फिल्म के हिसाब से यह बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट था।

एक दृश्य जो हमने इस फिल्म में नोटिस किया है की दोनों मैन कलाकार के बीच में रिलेशन का दृश्य भी इस फिल्म से हटा दिया गया है शायद यह फैसला बाद लिया गया है ताकि इस फिल्म को हर उम्र के लोग देख पाएं।

फिल्म का डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले और म्यूजिक
फिल्म के डायरेक्शन की बात की जाये तो वह स्वीट तो लगेगा लेकिन बहुत औसतन लगेगा क्यूंकि किरदारों पे फोकस बहुत ही कम हो गया है और फिल्म फर्स्ट हाफ के बाद फिल्म कभी ज्यादा स्लो और कभी हो जाती है।

फिल्म का स्क्रीनप्ले ही इस फिल्म की बर्बादी का बड़ा कारण है क्यूंकि किसी फिल्म को अगर आप अडॉप्ट करने की कोशिश कर रहे हो तो किसी दृश्य के होने का कारण आप डिलीट नहीं कर सकते वरना दर्शक कंफ्यूज हो जाते हैं और वही इस फिल्म में देखने को मिलता है।

फिल्म का म्यूजिक औसत है हलाकि आप ए.आर.रेहमान के म्यूजिक को एन्जॉय तो करेंगे लेकिन कोई भी गाना आपको ऐसा नहीं मिलेगा जिसे आप एक साल तक याद कर सकें।

“दिल बेचारा” फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी शुरू होती है कीजी (संजना संघी) से जोकि अपने परिवार के सांथ ज़ाम्बिया से इंडिया आयी है और उसने जमशेदपुर के कॉलेज में एड्मिशन लिया है आगे की पढाई के लिए। उसे थाइरोड कैंसर है और उसके पास बस कुछ दिन है जिंदगी के इसी बात से वह बस हर दिन और हर पल को काट रही है और अपनी मौत का इंतज़ार कर रही है। कीजी का परिवार बहुत ही सुप्पोर्टिव हैं और हर बात में कीजी का सांथ देते हैं कभी भी परेशान और रोते नहीं हैं वरना उनकी बेटी भी हताश हो जाएगी यह देखकर। कीजी के कॉलेज में मेनी (सुशांत कपूर) भी पढता है जोकि बहुत ही जिंदादिल है और बहुत ही हंसी मजाक करता है अपने दोस्तों के सांथ।

मेनी को भी कैंसर है और उसके पास कीजी से भी कम समय है लेकिन उसके जीने का अंदाज़ कीजी से बहुत अलग है और वह अपने बच्चे हर समय को मस्ती के सांथ जीना चाहता है। मेनी अपने दोस्त जगदीश (साहिल वैद) के सांथ मिलकर एक फिल्म बना रहा है और उसमे वह कीजी को हीरोइन कास्ट कर लेता है। धीरे धीरे कीजी मेनी की तरफ खींचने लग जाती है। मेनी की फिल्म में एक गाना है अभिमन्यु वीर का और कीजी अभिमन्यु वीर की बहुत बड़ी फैन है और वह एक बार उनसे मिलना चाहती है और पूछना चाहती है की उनका आखरी गाना अधूरा क्यों है। मेनी कीजी को पेरिस ले जाना चाहता है मगर उससे पहले कीजी बीमार हो जाती है और कीजी का

 परिवार अब कीजी को कहीं नहीं भेजना चाहता लेकिन मेनी बताता है उसे भी कैंसर है लेकिन वह अपने फिल्म बनाने के सपने को पूरा कर रहा है यह सुन कीजी के परिवार वाले मान जाते हैं।

मेनी कीजी को पेरिस लेकर जाता है जहाँ अभिमन्यु वीर कीजी को बताता है की उसका प्यार अधूरा ही रह गया था इसलिए उसका आखिरी गाना भी अधूरा है। अब कीजी को समझ आ जाता है की जरूरी नहीं की हर किसी की जिंदगी पूरी हो बहुत लोगो की जिंदगी यहाँ अधूरी है। अब कीजी को मेनी की चिंता लगी रहती है क्यूंकि वह उसे प्यार करती हैं लेकिन मेनी की उसकी बीमारी के कारण मौत हो जाती है। लेकिन आखिर में कीजी मेनी की बनाई फिल्म को कॉलेज में दिखती है अभिमन्यु वीर के उसी गाने के सांथ जिसे अब कीजी ने पूरा कर दिया है। इस फिल्म को देख सभी की आँखों में आंसू आ जाते हैं और सभी को यह एहसास होता है की अपने हर एक पल को जिंदादिली से जीना चाहिए और फिल्म यहाँ खत्म हो जाती है।

“दिल बेचारा” फिल्म की स्टार कास्ट 
सुशांत सिंह राजपूत: मेनी, संजना संघी: कीजी बासु, साहिल वैद: जगदीश पांडेय, सास्वता चटर्जी: कीजी के फादर, स्वस्तिक मुख़र्जी: कीजी की मदर, सुनीत टंडन: डॉ. झा, सैफ अली खान: अभिमन्यु वीर, माइकल मुथु: मेनी फादर, रजिए विजय सारथी: मेनी मदर, सुब्बलक्ष्मी: मेनी नानी

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