नोटबंदी से किसका फायदा और किसका नुक्सान दर्शाती अनुराग कश्यप की फिल्म – चोक्ड

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फिल्म चोक्ड में एक मिडिल क्लास फैमिली को रियलस्टिक तरीके से दिखाया गया है। अनुराग कश्यप हमेशा अपने फिल्मो के जरिये बड़े और गंभीर विषय लाते हैं। वहीँ इस बार नोटेबंदी जैसे बड़े मुद्दे पर फिल्म बनाना बहुत ही सराहनीय है लेकिन यहाँ वह कहीं चूक गए हैं, जहाँ लग रहा है की वाकई में इस सब  की जरूरत भी थी या जबरदस्ती का मुदा बना दिया है। इस फिल्म को नेटफ्लिक्स पर 8 जून 2020 को रिलीज़ कर दिया गया है।

सीरीज में गलत क्या है 
कहानी का पहला हाल्फ आपको बांधे रखता है लेकिन दूसरा हाल्फ शुरू होते ही लगता है पॉलिटिक्स एजेंडा, बैंक रॉबेरी, किरदारों को फ़्लैश बैक में दिखाना जैसी काफी बातें जैसे जबरदस्ती डाल दिए गए हैं, जिसकी कहीं जरूरत दिखती ही नहीं है। 

सीरीज में अच्छा क्या है 
कहानी मुंबई के चार मंजिला इमारत में रहने वाले लोगो की सचाई जिस तरह से दिखाई गई है सांथ ही आस-पड़ोस की नोक झोंक वो काफी ज्यादा यूनिक है।

इस आर्टिकल को आप इंग्लिश में भी पड़ सकते हैं।

किरदार
सैयामी खेर जो कहानी की मुख्य भूमिका में हैं उन्होंने अपने नेचुरल एक्टिंग से दर्शको का दिल जीत लिया है। इससे पहले वह मिर्जया व मराठी फिल्म माउली में भी काम कर चुकी है वहीँ राकेश मैथ्यू इस फिल्म में अपना डेब्यू करने जा रहे हैं।

पड़ोसियों के किरदार में अमृता, सुभाष व राजपूती पांडे ने कहानी में जान डाल दी है।

सीरीज की कहानी
चोक्ड में कहानी एक मराठी परिवार में हो रही कठिनाइयों को दर्शाती है। जहाँ पूरे परिवार का भार सरकारी बैंक में काम करने वाली केशियर सरिता(सैयामी खेर) के ऊपर है। पति सुशांत(राकेश मैथ्यू) जिसके पास कोई नौकरी नहीं है जो अपने दोस्त के सांथ मिलकर इंश्योरेंस पॉलिसी बेचता है। उनका एक बच्चा है पैसो की तंगी की वजह से दोनों के बीच काफी तनाव भी है, जिसका असर बच्चे पर भी पड़ रहा है।

कहानी की शुरुआत होती है जहाँ एक आदमी 500 और 1000 के नोटों का बंडल बनाता है और उन्हें बाथरूम में जाकर नाले में डाल देता है। दरअसल यह आदमी किसी पॉलिटिशियन का पी.ए. होता है जिसका नाम राजेंद्र है। जो सरिता के बिल्डिंग के सबसे ऊपर वाले फ्लोर में रहता है और जो अपने कमरे की चाबी को डोर मेट के नीचे रखकर घर से निकल जाया करता है।

वहीँ एक रात अचानक सरिता के किचन के सिंक के पाइप से कुछ आवाज़ आ रही होती है तब वह देखती है की पाइप से गंदे पानी के सांथ पैसो के बंडल आ रहे होते हैं। लेकिन यह बात सरिता किसी को नहीं बताती है यहाँ तक की अपने पति सुशांत को भी नहीं क्यूंकि उसे लगता है शायद यह पैसे नकली हैं वह दूसरे दिन उन पैसो को लेकर बैंक में जाती है पर वह सारे नोट असली होते हैं जिससे वह बहुत खुश हो जाती है। धीरे धीरे करके उसे पैसो के बंडल मिलते रहते हैं जिन्हे वह घर के कोनो कोनो में छुपा देती है। जिनसे वह अपने सारे शोक पूरा करने में खर्च करना भी शुरू कर देती है। जब सुशांत उससे पैसो के बारे में पूछता है तो वह बहाना बनाकर बात टाल देती है।

फिर एक दिन भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी नोटेबंदी की घोषणा कर देते हैं की आज से 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए जाते हैं। जिसे सुनकर सरिता बहुत परेशान हो जाती है लेकिन दो दिन बाद ही सिंक के पाइप से 2000 रुपयों की गाड़ियां निकलना शुरू हो जाते हैं। सरिता ख़ुशी से झूमते हुए नोट लेकर बैंक जाती है लेकिन बदकिस्मती से उसी दिन बैंक में रॉबेरी हो जाती है जिससे सरिता का पैसो से भरा बैग भी चला जाता है। वहीँ दूसरे दिन इनकम टैक्स वाले सरिता से पैसो के बारे में पूछताछ करते हैं जहाँ उन्हें पता चलता है की चौथे फ्लोर पे राजेंद्र रहता है जो किसी पॉलिटिशियन का पी.ए. है।

फिर कहानी एक साल बाद की दिखाते हैं जब सरिता और सुशांत कहीं से घूमकर आते हैं तभी उन्हें एक सरकारी लेटर मिलता है जिसमे लिखा है की जिन पैसो को सुशांत ने पकड़वाने में मदद की थी उसके 10% प्रतिशत सरकार उसे देती है इनाम में और कहानी यहीं खत्म हो जाती है।

चोक्ड के ट्रेलर का रिव्यु पढ़ें।

चोक्ड शब्द का इस्तेमाल 
कहानी में चोक्ड शब्द को किरदारों के सांथ अच्छे से इस्तेमाल किया गया है जैसे सरिता जो सिंगर बनना चाहती है लेकिन अपनी जॉब और परिवार में चौक हो जाती है। राजेंद्र जो अपने पैसो को नाले में चौक करता है। नोटबंदी के चलते लोग बैंक की लम्बी कतारों में खड़े है वह चौक हैं। जहाँ हर कोई किसी न किसी वजह से चौक है।

सीरीज की रेटिंग
अगर कहानी को रेटिंग देने की बात की जाये तो हम इसे 5 में से 2.5 स्टार देंगे, वह भी कुछ किरदारों की अच्छी एक्टिंग की वजह से वरना आपको ज्यादा कुछ खास इसमें देखने को नहीं मिलेगा।

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