“चमन बहार” सीरीज का रिव्यू, सीरीज में क्या अच्छा है और क्या बुरा, सीरीज की कहानी का अंत

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सीरीज का ओवरव्यू 
पंचायत वेब सीरीज और शुभ मंगल से ज्यादा सावधान फिल्म के बाद जीतू भैया की एक और वेब सीरीज “चमन बहार” में वह अपनी रियल एक्टिंग द्वारा दर्शको का दिल जितने में सफल रहे हैं। जहाँ वह एक तरफ़ा प्यार करते हुए नज़र आ रहे हैं। फिल्म का निर्देशन अपूर्व धर द्वारा किया गया है यह उनकी पहली फिल्म है जिसे नेटफ्लिक्स पर 19 जून 2020 को रिलीज़ किया गया है। कहानी है एक गांव के आवारा और छिछोरे लड़के की जो एक लड़की रिंकु के पीछे पड़े हुए हैं। वहीँ कहानी को काफी रियलस्टिक रखने की कोशिश अपूर्व धर द्वारा की गयी है।

कहानी में अच्छा क्या है 
किरदारों को काफी रियल रखा गया है जैसे गांव में छिछोरे लड़के, उनकी बोलचाल, रहने व पढ़ने का तरीका खासकर जीतू भाई का। इसके सांथ ही रितिका का प्रजेंस जिसमे उसका एक भी डायलॉग नहीं होने के बावजूद भी उसके हाव-भाव जो काफी रियल लगता है। 

इस आर्टिकल को आप इंग्लिश में भी पढ़ सकते हैं।

उसके अलावा फिल्म में छोटे मोटे मुद्दे दिखाए गए हैं जैसे सिगरेट पीने के नुक्सान और राजनीतिको द्वारा गरीब लोगो का इस्तेमाल करना आदि और वहीँ भूवन और धीरेन्द्र की जोड़ी फिल्म को सफल बनाती है।

कहानी में गलत क्या है
फिल्म कॉमेडी ड्रामा है लेकिन कॉमेडी जैसा कुछ देखने को नहीं मिलता है। फिल्म का पहला हाफ तो काफी बोरिंग लगता है और वहीँ लड़को का लड़कियों के ऊपर भद्दे कमेंट करना उनकी ड्रेस को लेकर यह कहानी में बिलकुल पसंद नहीं आता है और कहीं न कहीं गलत मैसेज भी हमारी युवा पीढ़ी को देता है।

सीरीज की स्टार कास्ट
जीतेन्द्र कुमार, रितिका बडिआनी, भुवन अरोरा, आलम खान, अश्वनी कुमार, भगवन तिवारी, धीरेन्द्र तिवारी

हमारी रेटिंग 
सीरीज को IMDB पर 7.3 की रेटिंग मिली है 10 में से, जिससे पता लगता है की कहानी काफी अच्छी है। हम इस सीरीज को 3.5 स्टार्स देंगे 5 में से।

सीरीज की कहानी का अंत
कहानी छतीसगढ़ के एक गांव की है जहाँ बिल्लू(जितेन्द्र कुमार) का एकतरफा प्यार और पान की दुकान है जिसका नाम चमन बहार है। बिल्लू के पिता चाहते हैं की बिल्लू उन्ही की तरह वन विभाग में चौकीदार की नौकरी करे लेकिन बिल्लू के सपने बहुत बड़े हैं वह तरक्की करना चाहता है।

मगर बिल्लू की दुकान ऐसे विरान जगह पर है जहाँ इंसान तो छोड़ो एक मक्खी तक नहीं भटकती है लेकिन एक दिन अचानक बिल्लू की दुकान के सामने वाले घर में एक इंजीनियरिंग परिवार रहने के लिए आता है। जो घर काफी समय से खाली था और उस परिवार में एक लड़की है जिसका नाम है रिंकू (रितिका बडियानी) जो देखने में बेहद सुन्दर है। जिसे देखकर बिल्लू और सारे गांव के आवारा लड़के मंत्रमुग्ध हो गए हैं। अब जहाँ आज तक बिल्लू की दुकान में कोई दिखता नहीं था वहां अब अचानक दुकान में भीड़ होने लग गयी है। जिनमे राजनितिक परिवार के दो आवारा लड़के भी शामिल हैं, आशु भैया और शैला भैया। 

बिल्लू ने रिंकू कब स्कूल जाती है और कब अपने कुत्ते को घुमाने ले जाती है यह सब टाइम लिख कर रखा हुआ है। अब बिल्लू को रिंकू से एक तरफ़ा प्यार हो जाता है उसे प्रपोज़ करने के लिए बड़े पैतरे अपनाता है लेकिन सफल नहीं हो पता है। वहीँ वह आशु भैया और शैला भैया को अपने रास्ते से हटाने की योजना भी बनाता है। बिल्लू ने एक प्रेम पत्र जोकि अंग्रेजी भाषा में लिखा है और उस पत्र को रिंकू तक भेजने का मौका तलाश करता है लेकिन वह पत्र रिंकू को नहीं उसके चाचा के हाथ लग जाता है।

अब एक दिन बिल्लू दीवारों व नोटों पर लिख देता है रिंकू बेवफा है, बिल्लू की इस हरकत की वजह से पुलिस उसे जेल में दाल देती है और खूब खातिरदारी करती है। अब बिल्लू के पिता को न चाहते हुए भी अपने बेटे की बेल करवानी पड़ती है। जेल से निकलकर बिल्लू रिंकू के परिवार वालो से माफ़ी मागंने जाता है तभी रिंकु की माँ कहती है की वह अब यहाँ से जाने वाले हैं। बिल्लू यह सुनकर वहां से निकल आता है वहां दो चॉकलेट छोड़कर और बाद में खूब रोता है।

कुछ दिन बाद वह देखता है की रिंकू का परिवार वहां से जा चूका है। वह देखता है की उनके घर के बाहर एक कागज़ का टुकड़ा लटका हुआ है जब बिल्लू देखने जाता है तो उस कागज़ पर बिल्लू और उसकी दुकानें का चित्र बना हुआ होता है जिसे रिंकू ने बनाया होता है। उस कागज़ को देखकर बिल्लू के चेहरे पर एक छोटी सी स्माइल आ जाती है और कहानी यहाँ ख़तम हो जाती है।

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