‘बुलबुल’ फिल्म का हिंदी रिव्यू, कहानी में क्या अच्छा है और क्या बुरा, फिल्म की कहानी।

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‘बुलबुल’ फिल्म कैसी है 
अनुष्का शर्मा के प्रोडक्शन हाउस के तले बनी फिल्म बुलबुल की काफी सराहना हो रही है जोकि एक नए कंटेंट के सांथ दर्शको का एंटरटेनमेंट कर रही है। बुलबुल एक काल्पनिक कहानी है जोकि 19 वी सदी में हुई घटनाओ पर आधारित है। जैसे पुरुष प्रधान, बाल विवाह और सती प्रथा जैसी कुप्रथायें हुआ करती थी। फिल्म का निर्देशन अन्विता दत्ता द्वारा किया गया है तथा कहानी भी उन्होंने ही लिखी है इससे पहले उन्होंने काफी फेमस गाने और डायलॉग भी लिखे हैं।

कहानी में उल्टे पैर वाली चुड़ैल है जो कुछ लोगो के लिए तो दिव्य शक्ति है और कुछ लोगो के लिए एक चुड़ैल है। फिल्म 1 घंटा 34 मिनट की है, यदि फिल्म को आप  हॉरर फिल्म समझकर देखेंगे तो आपको सिर्फ निराशा ही होगी क्यूंकि फिल्म में कुछ भी डरावने सीन नहीं हैं फिर भी कहानी आपको अंत तक बाधें रखती है जोकि फिल्म के थोड़ा बहुत सस्पेंस के कारण होता है।

इस आर्टिकल को आप इंग्लिश में भी पढ़ सकते हैं।

फिल्म की रेटिंग
फिल्म को IMDB पे 6.6 रेट मिला है 10 में से और वहीँ हम इस फिल्म को 5 में से 2 स्टार देंगे।

फिल्म में क्या सही है
फिल्म का डायरेक्शन काफी अच्छा है, फिल्म आपको 1800 की सदी में ले जाने का प्रयास करती है जिसमे कहीं हद तक फिल्म कामयाब भी हुई है।

पुराने ज़माने में औरतो को क्या क्या सहना पड़ता था इसे दर्शाने की कोशिश की गयी है और समाज को आईना दिखाने की कोशिश की गयी है। 

फिल्म में क्या गलत है 
इस फिल्म को हॉरर जॉनर में रखा गया है जोकि बिलकुल गलत है क्यूंकि पूरी फिल्म में कोई भूत या चुड़ैल है ही नहीं बल्कि आप अगर थोड़ा मजबूत माइंडसेट के सांथ इस फिल्म को देखेंगे तो आपको डर भी नहीं लगेगा। आखिर में जब लोग उस चुड़ैल को मारने के लिए इकट्ठा होते है तो वह चुड़ैल को गोली भी मारते है और वह गोली चुड़ैल को लग भी जाती है।

चुड़ैल को लेकर जो रचना इस फिल्म में की गयी है वो कहीं से भी हजम नहीं होती क्यूंकि सिर्फ छोटा सा पास्ट दिखाकर आपको यह बोल दिया जाता है की इसलिए यह चुड़ैल बनी।

पूरी फिल्म सिर्फ सिंपल सी थ्योरी पर चल रही है कोई सस्पेंस या थ्रिल आपको ज्यादा देखने को नहीं मिलता क्योंकि जब आप इस फिल्म को देखेंगे तो आप खुद अंदाजा लगा लेंगे की आगे क्या होने वाला है जबकि हॉरर फिल्म में सस्पेंस या थ्रिल को होना जरूरी होता है।

फिल्म में बड़े और अच्छे किरदार होने के बावजूद उनका रोल काफी ज्यादा बेजान सा है, किसी भी किरदार को अच्छे से भुनाया नहीं गया है।

फिल्म में लाल रंग का प्रयोग बहुत अधिक किया गया है जोकि क्यों दिखाया गया है यह तो समझ से ही परे है, कहा जा रहा है की खून जोकि लाल होता है और चुड़ैल को इसी खून की प्यास है और इसी को दर्शाने का यह एक तरीका है जोकि सच कहें तो बकवास आईडिया है।

फिल्म की स्टार कास्ट
तृप्ति डिमरी: बुलबुल, राहुल बोस: इंद्रनील / महेंद्र, अविनाश तिवारी: सत्या, परमब्रता चट्टोपाध्याय: सुदीप, पाओली दाम: बिनोदिनी

फिल्म की कहानी का प्लाट
कहानी है एक छोटी बच्ची बुलबुल (तृप्ति डिमरी) की जिसकी महज 7 साल में शादी हो जाती है उससे 20 साल बड़े आदमी इंद्रनील (राहुल बोस) ठाकुर से। लेकिन बुलबुल को लगता है उसकी शादी सत्या (अविनाश तिवारी) से हुई है जो उसी की हम उम्र का है, सत्या इंद्रनील का छोटा भाई है। बुलबुल सत्या के सांथ ही खेलते हुए बड़ी हुई है और वो उसी को ही अपना पति मानती है। इसके अलावा इंद्रनील का एक और भाई है महेंद्र (अविनाश तिवारी) जोकि इंद्रनील का जुड़वाँ भाई है और महिंद्रा की एक पत्नी है जिसका नाम है बिनोदिनी (पाओली दाम)।

फिर कहानी सीधे बीस साल आगे बढ़ जाती है जैसे-जैसे बुलबुल बड़ी होती है वह सत्या से प्यार करने लगती है, सत्या भी उसे मन ही मन पसंद करता है। इंद्रनील को सत्या और बुलबुल की नज़दीकियां बहुत खटकती हैं और वह फैसला लेता है की वह सत्या को लॉ की पढाई के लिए लंदन भेज देगा पांच साल के लिए। इस खबर से बुलबुल पूरी तरह टूट जाती है और अपनी एक डायरी जला देती है यह इंद्रनील देख लेता है। डायरी तो जल गयी लेकिन उसे एक पेज दिखता है जिसमे बुलबुल और सत्या लिखा होता है। इससे इंद्रनील बहुत गुस्सा होता है और एक लोहे की रोड से मारते मारते बुलबुल को अधमरा कर देता है फिर बुलबुल के इलाज के लिए डॉक्टर सुदीप (परमब्रता चट्टोपाध्याय) को बुलाता है यह कहकर की बुलबुल सीढ़ियों से गिर गयी है और इंद्रनील हवेली छोड़कर कहीं चला जाता है। तभी एक दिन महेंद्र जिसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है वह बुलबुल का रेप कर देता है, जिससे बुलबुल मर जाती है परन्तु कुछ समय बाद वह फिर से अपने आप जिन्दा हो जाती है।

फिल्म की कहानी अब एक साल आगे बढ़ती है जहाँ इंद्रनील अब वापस घर लौट आया है और सत्या घर छोड़कर वापिस लंदन जा चूका है क्यूंकि वह इंद्रनील के जैसा नहीं बनना चाहता है और वहीँ बिनोदिनी विधवा आश्रम जा चुकी है। अब रात को सोते हुए इंद्रनील की जब आँख खुलती है तो वह बुलबुल को आग की लपटों से  निकलते हुए देखता है जिसका मतलब अब बुलबुल अपना आखरी बदला लेने के लिए वापिस आ चुकी है और फिल्म यहीं पर खत्म हो  जाती है। 

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