नाम बड़े और दर्शन छोटे, क्लास ऑफ़ 83 फिल्म का रिव्यू, फिल्म में क्या अच्छा है और क्या बुरा, किरदार, फिल्म की कहानी का प्लाट

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कैसी है क्लास ऑफ़ 83 फिल्म 
दोस्तों 80-90 का एरा पूरी तरह से अंडरवर्ल्ड और माफिया के कण्ट्रोल में था जिसमे बॉलीवुड पूरी तरह जकड़ा हुआ था इसके सांथ ही पोलिसिटिक्स और बिज़नेस इंडस्ट्री भी इसके प्रभाव में थी। अब यह बात कोई भी सामने से स्वीकार नहीं करता है लेकिन सचाई भी यही है जिसे आप बॉलीवुड की ही कई फिल्मो से समझ सकते हैं क्यूंकि कई फिल्में इसको दिखा चुकी हैं। अब ऐसा तो हो नहीं सकता की बिना सचाई के कोई भी ऐसे ही फिल्म बना रहा है कुछ न कुछ तो उसमे सचाई होगी ही। अब आगे बात करते है क्यूंकि इन माफ़ियास और अंडरवर्ल्ड का कई बड़े लोगो का सपोर्ट भी था इसलिए इनका राज़ काफी लम्बे समय तक चला।

इन्ही कुछ पहलुओं के ऊपर फिल्म बनाई गयी है जिसका नाम है क्लास ऑफ़ 83 जिसमे की पुलिस फाॅर्स के कुछ ईमानदार ऑफिसर्स कैसे इस गन्दगी को साफ़ करना चाहते हैं मगर बगैर अपने हाथ गंदे किये बिना फिल्म में यही दिखाया गया है। फिल्म में पांच नए कलाकारों को मौका दिया गया है जोकि काफी अच्छी बात है वरना इस फिल्म पर भी नेपोटिस्म का टैग जरूर लगता हलाकि फिल्म में बॉबी देओल भी हैं लेकिन इस फिल्म में उनका काफी अच्छा काम है उनके रोल के हिसाब से जोकि काफी कम है। फिल्म में अनूप सोरी भी हैं और इनका काम भी दर्शको को पसंद आएगा एक पॉलिटिशियन के किरदार में उन्होंने बेहतरीन काम किया है।

फिल्म से उम्मीद थी बहुत सारा एक्शन और बॉबी देओल की अच्छी एंट्री और अच्छा रोल देखने को मिलेगा जोकि फिल्म में नहीं है इससे दर्शक जरूर नाराज़ होंगे। फिल्म हलाकि काफी सारी कमियों से भरी हुई है जोकि डायरेक्टर की फिल्म को जल्दी लांच करने के कारण हो सकता है लेकिन फिर भी फिल्म अपने बढ़िया सिनेमेटोग्राफी, कुछ अच्छे डायरेक्शन और कलाकारों की अच्छी अदाकारी की वजह दर्शको को अंत तक बांधे रखने में सक्षम है।

आप इस आर्टिकल को इंग्लिश में भी पढ़ सकते हैं।

क्या क्लास ऑफ़ 83 फिल्म हमें देखनी चाहिए? 
फिल्म हलाकि उम्मीद से थोड़ा कम अच्छी है लेकिन फिर भी कलाकारों काम अच्छा है और स्टोरीलाइन आपको बाँधें रखने में सक्षम जरूर है इसलिए आप इस फिल्म को जरूर देख सकते हैं।

क्लास ऑफ़ 83 फिल्म की रेटिंग
इस फिल्म को IMDB पे 6.4 रेट मिला है 10 में से और वहीँ हम इस फिल्म को 5 में से 2.5 स्टार देंगे। 88% लोगो ने इस फिल्म को गूगल पर लाइक किया है।

क्लास ऑफ़ 83 फिल्म में क्या अच्छा है?
फिल्म में 80 के एरा को बहुत ही बेहतरीन तरीके से डायरेक्ट किया गया है। पूरी फिल्म में प्रयोग की गई गाड़ी, कपडे, किरदारों का मेकअप सभी आपको 80 के एरा में होने का आभास कराते हैं जोकि काफी अच्छी बात है एक सफल डायरेक्टर के लिए।

फिल्म के मुख्य किरदारों का काम काफी अच्छा है चाहे वह बात की जाये बॉबी देओल, विश्वजीत प्रधान, अनूप सोनी की या नए पांच कलाकारों की सभी के काम से आप खुश होंगे।

फिल्म में मुख्य रोल बॉबी की बजाय पांच किरदारों का है और डायरेक्टर ने अच्छे से उनके बैकग्राउंड को बिल्ड किया है जिससे दर्शक उनसे जुड़ पाते हैं।

क्लास ऑफ़ 83 फिल्म में क्या गलत है?
फिल्म का जॉनर क्राइम, ड्रामा, थ्रिलर है जोकि सच कहें तो फिल्म में पूरी तरह से मिसिंग है डायरेक्टर ने पहले ही कह दिया की यह फिल्म काल्पनिक है तो वह इस फिल्म में सस्पेंस और थ्रिल को और ज्यादा बढ़ा सकते थे। पूरी फिल्म को सीधा दिखने की क्या जरूरत थी जिससे दर्शक सबकुछ पहले से अंदाजा लगा लें।

फिल्म में बॉबी के किरदार को ज्यादा महत्व नहीं दिया गया पता नहीं क्यों उनकी एंट्री भी एक नार्मल तरीके सी की गयी और पूरी फिल्म में उनका एक्शन लास्ट में देखने को मिलता है जिससे दर्शक पूरी तरह से निराश हो जाते हैं। अगर फिल्म के पोस्टर में आप बॉबी का प्रयोग कर रहे हो तो फिल्म में भी उन्हें उतना ही रोल देना चाहिए था।

पूरी फिल्म एक विल्लन को पकड़ने के ऊपर फोकस करती है लेकिन वह विल्लन का प्रयोग बहुत ही साधारण तरीके से किया गया है। अंत में उसका एनकाउंटर भी ऐसे हो जाता है जैसे वह कोई बहुत बड़ा गैंगस्टर नहीं एक छोटा मोटा चोर हो।

बॉबी देओल के पास्ट के बारे में बात होती जरूर है की इन्होने आत्हत्या करने की कोशिश की और इनके घर में बहुत कुछ गलत हो गया था मगर उसे अच्छे से परदे पर टाइम नहीं दिया गया है जिसके कारण दर्शक बॉबी के किरदार से अच्छे से जुड़ नहीं पाते हैं।

फिल्म के ट्रेलर का रिव्यू पढ़ने के लिए क्लिक करें।

कैसा है क्लास ऑफ़ 83 फिल्म का डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले और म्यूजिक
फिल्म का डायरेक्शन काफी अच्छा है इसलिए आप फिल्म के किरदारों और 80 के एरा में अपने आप को महसूस करेंगे। फिल्म की प्रोडक्शन क्वालिटी काफी बढ़िया है  इसलिए आप फिल्म के सांथ जल्दी जुड़ जायेंगे।

फिल्म का स्क्रीनप्ले बहुत ज्यादा वीक है, फिल्म की कहानी को देखकर ऐसा लगता है की फिल्म को काट काट के शूट किया गया है क्यूंकि किसी भी समय को अच्छे से नहीं दिखाया गया इसलिए आपको ऐसा लगेगा की अभी यह किरदार जवान थे और इतनी जल्दी यह थोड़ा बूढ़े हो गए। 

फिल्म का म्यूजिक बहुत औसत है जिसके कारण फिल्म में आपको ज्यादा रोमांच आपको महसूस नहीं होगा। 

क्लास ऑफ़ 83 फिल्म की कहानी का प्लाट
फिल्म की कहानी शुरू होती है एक पुलिस ट्रेनिंग स्कूल से जहाँ के डीन हैं बॉबी देओल जोकि जाने जाते हैं अपने पुराने रिकॉर्ड और सख्त सवभाव के लिए। यहाँ पांच नए ट्रेनी हैं जोकि अच्छे दोस्त हैं लेकिन पढ़ने में वीक हैं लेकिन बॉबी इन्हे अलग से ट्रैन करते हैं मुजरिमो का सफाया करने के लिए। बॉबी देओल जोकि माफिया का सफाया करना चाहते थे लेकिन पॉलिटिशंस के दबाव के कारण वह एक बहुत बड़े माफिया को पकड़ने में चूक जाते हैं इसलिए उनकी पोस्टिंग इस ट्रेनिंग स्कूल में कर दी जाती है।

बॉबी आज भी माफिया को पूरी तरह से ख़त्म करने का अपना सपना पूरा करना चाहते हैं जिसमे यह पांचो भी अपनी रूचि दिखाते हैं। अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद यह पांचो दोस्त अपनी पोस्टिंग ज्वाइन कर लेते हैं और अब अपने मकसद को चोरी चुपके पूरा करते हैं। इसी बीच इन दोस्तों में आपस में कुछ रंजिश भी देखने को मिलती है जोकि समय के सांथ ख़त्म हो जाती है।

छोटे मोटे गुंडों को मारकर यह लोग अपना नाम जरूर कमा लेते हैं लेकिन इनके ऊपर शक भी होने लगता है इसलिए इनपर इन्क्वारी भी होती है। धीरे धीरे काफी गुंडों को मारकर यह लोग बड़े माफिया की नज़र में आ जाते हैं जिसका बदला माफिया एक पुलिस अफसर को मारकर ले लेता है। लेकिन अपने दोस्त को गवाने के बाद चारो दोस्तों ने पूरी तरह से ठान लिया है बड़े माफिया को ख़त्म करने का इसलिए वह अपनी आखरी चाल चलते हैं। इस चाल में बॉबी भी उनके सांथ हैं और आखिर का क्लाइमेक्स होता है एक जहाज के ऊपर जहाँ बड़े माफिया और बॉबी की टीम की लड़ाई होती है लेकिन बॉबी की टीम सभी को मारकर अपना बदला ले लेते हैं।

क्लास ऑफ़ एट्टी थ्री फिल्म के किरदार
बॉबी देओल: विजय सिंह, विश्वजीत प्रधान: मंगेश डोईफोड़े, अनूप सोनी: मनोहर पाटकर, जॉय सेनगुप्ता: राघव देसाई, भूपेंद्र जड़वत: प्रमोद शुक्ला, अभिषेक भालेराव: सब इंस्पेक्टर, अंजुम: स्वेता, पृथ्वीक प्रताप: जनार्दन सुर्वे, निनाद महाजनी: लक्ष्मण जाधव, समीर पारांजपे, हितेश भोजराज: विष्णु वर्दे, रवि सिंह: पठान

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