कितनी समझ में आयी यह सीरीज आपको? बिच्छू का खेल वेब सीरीज का हिंदी में रिव्यू, सीरीज में क्या अच्छा है और क्या बुरा, किरदार, सीरीज की कहानी का प्लाट

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बिच्छू का खेल सीरीज कैसी है?
मिर्ज़ापुर 2 की असफलता के बाद दिव्येंदु शर्मा की अगली सीरीज से लोगो को काफी ज्यादा उमीदें थी लेकिन क्या यह दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाने में कामयाब हुई है या नहीं यह आपको पूरा आर्टिकल पढ़ने पर अपने आप ही पता लग जायेगा। बिच्छू का खेल एक क्राइम, थ्रिलर, एक्शन से भरी हुई कहानी है जिसे डायरेक्ट किया है आशीष शुक्ला ने और इसके प्रोडूसर हैं एकता कपूर और शोभा कपूर.

एकता जहाँ धीरे धीरे टीवी सीरियल्स के अलावा ओ.टी.टी प्लेटफार्म पर अपना कब्ज़ा बनाने की कोशिश कर रही हैं जिसमे की उन्हें काफी हद तक अभी कामयाबी मिल भी चुकी हैं क्यूंकि उनके द्वारा कुछ अच्छी सीरीज भी बनायीं गयी हैं लेकिन वहीँ दूसरी और फैंस उनसे काफी नाराज़ भी रहते हैं। इस सीरीज में भी आपको एकता की सीरीज का भाव जरूर देखने को मिलेगा इसलिए यह दर्शकों के ऊपर है की वह किस इस भाव से इस सीरीज को कैसे देखते हैं।

सीरीज में कहानी के नाम पर कुछ नया नहीं है लेकिन सस्पेंस थोड़ा अच्छा जरूर लगेगा। कहानी को उत्तर प्रदेश के माहौल में दर्शाने की कोशिश की गयी है लेकिन एक गलती आजकल हर डायरेक्टर कर रहा है और वह गलियों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल। सीरीज की कहानी एक जबरदस्त स्पीड से भागती हुई नज़र आती है और इसके सांथ ही कुछ दृश्यों को बीच में ही छोड़ दिया जाता है जिसे आगे जोड़ने की कोशिश भी नहीं की गयी है।

सीरीज हालांकि बहुत ज्यादा तेज़ी से भागती है लेकिन फिर भी आप इस सीरीज को फ़ास्ट फॉरवर्ड करके देखना पसंद करेंगे और इसका कारण है कहानी का कमजोर पड़ना, बहुत से किरदारों दवारा बिलकुल बेजान एक्टिंग करना। सीरीज पर पकड़ बनाने के लिए डायरेक्टर ने कहानी में कई सस्पेंस डालने की कोशिश जरूर करी है लेकिन सीरीज को देखते हुए आपको बहुत सारे सस्पेंस का अंदाज़ा पहले ही लग जाता है। 

इस आर्टिकल को इंग्लिश पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

क्या बिच्छू का खेल सीरीज हमें देखनी चाहिए?
इसका सीधा सा जवाब है – हाँ। सीरीज आपको कई प्रकार से रोमांचित करने के उदेश्य से बनाई गयी है जिसमे डायरेक्टर बहुत हद तक कामयाब भी हुए हैं। लेकिन अगर आप किरदारों की अच्छी अदाकारी और कहानी के लिए इस सीरीज को देखने का विचार बना रहे हैं तो आप थोड़ा निराश जरूर होंगे।

सीरीज में गाली गलोच भी हैं इसलिए इसे पारिवारिक सीरीज नहीं कहा जा सकता है।

बिच्छू का खेल सीरीज की रेटिंग कितनी है?
बिच्छू का खेल सीरीज को IMDB पे 10 में से 8.2 की रेटिंग मिली है और हम इस सीरीज को 5 में से 2.5 स्टार देंगे।

बिच्छू का खेल सीरीज में क्या अच्छा है?
सीरीज बहुत तेज़ी से आगे बढ़ती है इसलिए आप बोर तो नहीं होंगे। इसके सांथ ही कहानी में कुछ सस्पेंस आपको कहानी के बीच में भी देखने को मिलते हैं जिससे आप थोड़ा रोमांचित भी होंगे।

सीरीज के प्रमुख किरदारों ने भी अपना बेहतरीन प्रदर्शन दिया है जिसे देखकर आपको काफी मजा आने वाला है। दिव्येंदु शर्मा अपने काम से दर्शकों को अपना फैन बनाने में फिर से कामयाब हो गए हैं शायद इसलिए हर पांच में से एक वेब सीरीज में दिव्येंदु जरूर होते हैं। अपने किरदार को लेकर दिव्येंदु काफी अच्छी तैयारी करते हैं इसलिए उन्हें उस किरदार में ढलने में ज्यादा समय नहीं लगता है।

बिच्छू का खेल सीरीज में क्या बुरा है?
सीरीज में बहुत सारे किरदारों ने इतना बेजान पर्दशन किया है की आप उस पूरे दृश्य को ही काट कर आगे बढ़ जाओगे। सीरीज को परदे अपर उतारने में भी आपको उतनी महारत नहीं दिखने को मिलेगी जिसके कारण सीरीज के किसी भी दृश्य में आपको मंत्र मुग्ध वाला एहसास नहीं होगा।

सीरीज में तकनिकी तौर से भी कई खामियां दिखती हैं जिसके कारण कई फाइट दृश्य आपको नकली से प्रतीत होंगे।

सीरीज के किसी भी किरदार को अच्छे से डेवेलोप नहीं किया गया है जिसके कारण आप उस किरदार से अच्छे नहीं जुड़ पाते हैं और इसका बड़ा कारण है सीरीज की कहानी का बहुत तेज़ी से भागना।

कुछ बातें बिलकुल लॉजिक से परे की लगती हैं जहाँ दिव्येंदु के पिता लगभग उसी के ही उम्र के लगते हैं लेकिन इसके सांथ ही उनमे इतना ज्यादा याराना है की वह अपने पिता से हर तरह की बातें कर लेता है जबकि वह एक बनारस के एक मध्यम वर्ग के लोग हैं।

बिच्छू का खेल सीरीज का डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले और म्यूजिक कैसा है?
सीरीज का डायरेक्शन आपको औसत लगेगा इसलिए आपको एक औसत दर्जे की सीरीज देखने एहसास बार बार होगा। इसी प्रकार कहानी भी आपको हलके फुल्के मौको पर सरप्राइज जरूर देती हुई नज़र आती है मगर कहानी को पूरे सीरीज के हिसाब से कमजोर ही माना जायेगा। 

सीरीज का म्यूजिक आपको थोड़ा एंटरटेन जरूर करता है पुराने ज़माने के गानो से लेकिन सीरीज का बैकग्राउंड म्यूजिक भी उतना कमाल का नहीं है।

बिच्छू का खेल सीरीज के किरदार
दिव्येंदु शर्मा: अखिल श्रीवास्तव, अंशुल चौहान: रश्मि चौबे, सईद ज़ीशान क़ादरी: निकुंज तिवारी, मुकुल चड्डा: बाबू श्रीवास्तव, सत्यजीत शर्मा: अनिल चौबे, राजेश शर्मा: मुकेश चौबे, तृष्णा मुख़र्जी: प्रोतिमा चौबे, गगन आनंद: राजवीर, आकांक्षा ठाकुर: रेनू सिंह, प्रशंसा शर्मा: पूनम तिवारी, अभिनव आनंद: विकास, श्रीधर दुबे: प्रेम पांडेय, मोनिका चौधरी: सरोज 

बिच्छू का खेल सीरीज कहानी का प्लाट
कहानी की शुरुआत होती है एक प्ले से जिसमे अखिल एक वकील का खून कर देता है और अपने आप को सरेंडर कर देता है लेकिन वह अपने आप को मुजरिम होने से बचा लेता है। अब पुलिस को तलाश है की उस वकील का खून अखिल ने कैसे किया है लेकिन अखिल अपने पिता के हत्यारों से बदला लेने के लिए यह सब कुछ कर रहा है लेकिन अभी भी उसे अपने पिता मुख्य आरोपी को ढूढ़ना है। 

इसके लिए अखिल शहर में हुए एक बाहुबली के खुनी को ढूढ़ने में लग जाता है जिसके हत्या के झूठे इल्जाम में अखिल के पिता को जेल हुई थी और फिर उनकी हत्या। अखिल की प्रेमिका रश्मि चौबे जोकि वकील की बेटी है वह भी अखिल का सांथ देती है लेकिन अब पुलिस रश्मि चौबे को गिरफ्तार कर लेती है इसलिए अखिल के ऊपर दबाव ज्यादा बढ़ गया है खुनी को जल्द से जल्द ढूढ़ने का।

इसी बीच अखिल की प्रेमिका जेल से छूट तो जाती है मगर वह अगवा हो जाती है। अंत में दिखाया जाता है की वकील और प्रसिद बाहुबली दोनों का खून वकील के बड़े भाई ने किया होता है लेकिन निखिल अपनी जान पर खेल कर अपनी प्रेमिका को बचा लेता है अपराधी को भी पकड़ लेता है।

अगर इस आर्टिकल से रिलेटेड कोई भी सुझाव और शिकायत है तो हमें digitalworldreview@gmail.com पर मेल करें


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