भारतीय संगीत धरोहर की महानता को दर्शाती सीरीज बंदिश बैंडिट्स का रिव्यू, सीरीज में क्या अच्छा है और क्या बुरा, सीरीज के किरदार, कहानी का प्लाट

bandish-bandits-series-ka-review-hindi-mein-kirdar-kahani
Spread the love

कैसी है बंदिश बैंडिट्स
इसमें कोई दौराय नहीं है की भारतीय संगीत जितना पुराना है उनकी महानता और विवधता भी उतनी ही विशाल है शायद इसलिए भारतीय इतिहास में कई सारे संगीत सम्राट हुए हैं जोकि संगीत को कई ऊचाइंयों तक लेकर गए थे। उनकी इन्ही प्रतिभा के कारण देश और विदेश में भारतीय संगीत को और ज्यादा पहचान मिली और भारतीय संगीत को आज विदेशो में भी सीखा जा रहा है। संगीत की इस संस्कृति को परदे पे भी कई फिल्मो में दर्शाया गया है और कुछ इसी कोशिश को दोबारा से एक नए रूप में लेकर आये हैं डायरेक्टर आनंद तिवारी। 

अगर बात की जाये इस सीरीज की तो यह सीरीज इसके ट्रेलर के बिलकुल अपोजिट दिखती है इसलिए कई लोग थोड़ा सरप्राइज जरूर होंगे। सीरीज के ट्रेलर को देखकर लगा था की इसमें  पॉप और पुराने संगीत के सांथ पुराने और नए ज़माने की जुगलबंदी और दोनों के बीच कोई मुकाबला देखने को मिलेगा मगर ऐसा सीरीज में नहीं है। सीरीज आपको संगीत के घरानो और उस संगीत को पाने के लिए की जीने वाली संघर्ष को दर्शाती है। यह सच है की किसी भी काम में महारत हासिल करने के लिए आपको बहुत मेहनत करनी होती है और इसी मेहनत को परदे पर दर्शाने की कोशिश की गयी है कैसे संगीत में सच्ची श्रद्धा, मेहनत और लगन की आवश्यकता होती है तभी आप उसमे महारत हासिल कर सकते हैं।

सीरीज में संगीत के सांथ आपको प्यार, गरीबी और एक महान संगीत सम्राट के घमंड को दिखाया गया है। आज भी शास्त्रीय संगीत को लेकर कई युवाओं में जूनून है जोकि इस सीरीज के दवारा दर्शाने की कोशिश की गयी है। सीरीज को एक स्टार सिर्फ इसलिए दिया जा सकता है की इसमें भारतीय संगीत की महानता को अच्छे से दर्शाया है ताकि हर कोई यह से समझ पाए की एक शास्त्रीय संगीत को आप रातो रात या सिर्फ एक साल के अंदर ही नहीं सिख सकते। बाहरी संगीत की बजाय हमें अपने शास्त्रीय संगीत को पहले सीखना चाहिए।

इस सीरीज में आपको नसीरुद्दीन शाह एक शास्त्रीय संगीत विद्वान के रूप में नज़र आने वाले हैं तथा मुख्य रोल में श्रेया चौधरी और ऋत्विक भौमिक भी नज़र आएंगे जिसमे से ऋत्विक भौमिक एक शास्त्रीय संगीत गीतकार के रूप में नज़र आने वाले हैं जोकि अपने गुरु पंडित राधेमोहन राठोड की तरह महान संगीतकार बनना चाहते हैं। अब क्या वह अपना सपना पूरा कर पायेगा इस विष्य के ऊपर यह सीरीज है। 

आप इस आर्टिकल को इंग्लिश में भी पढ़ सकते हैं।

क्या बंदिश बैंडिट्स सीरीज देखनी चाहिए?
बंदिश बैंडिट्स को आप अमेज़न प्राइम पर देख सकते हैं और इसमें कुल 10 एपिसोड्स हैं जिसमे हर एपिसोड 40-50 मिनट का है। इस सीरीज को आप जरूर एन्जॉय करोगे क्यूंकि सीरीज का डायरेक्शन, म्यूजिक और कलाकारों की अदाकारी काफी अच्छी है इसलिए आप इसे जरूर देख सकते हैं हलाकि सीरीज पारिवारिक नहीं है इसलिए इस बात को जरूर ध्यान रखिएगा।

बंदिश बैंडिट्स सीरीज की रेटिंग
इस सीरीज को IMDB पे 8.4 रेट मिला है 10 में से और वहीँ हम इस सीरीज को 5 में से 3 स्टार देंगे।

सीरीज में क्या अच्छा है?
सीरीज में भारतीय संगीत की महानता, इसे पाने के लिए कितना परिश्रम करना पड़ता है इन सभी पहलुओं को दिखाया गया है। भारतीय संगीत आज भी विदेशी संगीत से कई बेहतर है और युवाओ के लिए आज भी प्रेरणा का स्रोत है यह बताया गया है।

सीरीज में मुख्य किरदारों का करैक्टर बिल्डिंग काफी अच्छा है इसलिए आप सीरीज के सांथ जल्दी से कनेक्ट पाते हैं।

सीरीज की कहानी राजस्थान की है इसलिए इसमें आपको राजस्थानी संगीत और राजस्थान की सुंदरता देखने को मिलती है जिसे डायरेक्टर ने बखूबी परदे पर उतारा है।

सीरीज में सभी किरदारों की अदाकारी काफी अच्छी है चाहे वह सपोर्टिंग कलाकार ही क्यों न हो, सभी कलाकारों ने अपने किरदार अच्छे से समझा है और फिर निभाया है।

सीरीज के अंत में शास्त्रीय संगीत की प्रतियोगिता होती है जिसमे दो बेहतरीन सिंगर अपना बेहतरीन परफॉरमेंस देकर समां बाँध देते हैं जोकि सच में देखने लायक होता है।

सीरीज में क्या गलत है?
सीरीज में कुछ जगहों पर डायरेक्टर ने बचकाने से दृश्यों का फिल्माया है जैसे ऋत्विक का स्टेज पर एक मास्क और बिग पहनना जोकि काफी बचकाना सा लगता है।

सीरीज के कुछ किरदारों को बहुत ही कम समय दिया गया है जिससे दर्शक उन्हें उनसे जुड़ नहीं पाते हैं जैसे ऋत्विक का दोस्त और उसके अंकल।

सीरीज 10 एपिसोड्स की है जोकि काफी ज्यादा लम्बी है इसे डायरेक्टर चाहते तो ८ एपिसोड्स में ख़त्म कर सकते थे इससे सीरीज का पेस थोड़ा और अच्छा होता।

सीरीज में दर्शक उम्मीद लगाकर बैठे थे की उन्हें शास्त्रीय संगीत और पॉप म्यूजिक का कम्पटीशन देखने को मिलेगा पर ऐसा नहीं होता है जोकि थोड़ा निराशाजनक जरूर लगा।

सीरीज के ट्रेलर का रिव्यू पढ़ने के लिए क्लिक करें।

सीरीज का डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले और म्यूजिक
सीरीज का डायरेक्शन काफी अच्छा और सभी किरदारों की अदाकारी देखने पर यह बात सही साबित भी होती है। इसके सांथ ही संगीत और लोकेशंस को भी सीरीज में उतनी ही खूबसूरती से दिखाया गया है।

स्क्रीनप्ले की बात की जाये तो यह सीरीज की कमजोरी है क्यूंकि कहानी अपने मुख्य मुद्दे से भटकती हुई लग रही थी और सांथ ही कुछ दृश्य भी सीरीज में जबरदस्ती के लगते हैं शायद सीरीज को और बड़ा बनाने के मकसद से किये गए थे इसलिए सीरीज थोड़ा बोरिंग भी लगने लग जाती है।

म्यूजिक इस सीरीज की जान है और आपको एक बेहतरीन शास्त्रीय संगीत देखने को मिलेगा जिसे आप एन्जॉय करोगे।

बंदिश बैंडिट्स सीरीज की कहानी का प्लाट
कहानी की शुरुआत होती है राधे से जोकि राठोड घराने से तालुक रखता है जोकि संगीत के सम्राट पंडित राधेमोहन राठोड का है और राधे इनका पोता है। राधे भी संगीत में अपना नाम कमाकर पंडित जी का उत्तराधिकारी बनाना चाहता है मगर यह इतना भी आसान नहीं है क्यूंकि पंडित जी इतनी आसानी से किसी को उत्तराधिकारी नहीं बनाते इसलिए उन्होंने राधे की पिता और अपने को बेटे को भी यह उपाधि नहीं दी थी। राधे का परिवार गरीब है और अपने पिता द्वारा लिए गए एक बैंक लोन के चलते उनपर और ज्यादा पैसो की प्रॉब्लम आ गयी है।

राधे की मुलाकात होती है तमन्ना (श्रेया चौधरी) से जोकि राधे के सांथ मिलकर गाने बनाना चाहती है जिससे दोनों अपना नाम और पैसे कमा सकें लेकिन राधे मना कर देता है। अब पंडित जी राधे को अपना उत्तराधिकारी बनाने को राज़ी हो जाते है और एक दिन चुनते इस काम के लिए मगर वहीँ पैसो की कमी राधे को तमन्ना के सांथ गाने को मजबूर कर देती है। अब इसका पता पंडित जी को लग जाता है और वह राधे को अपना उत्तराधिकारी बनाने से मना कर देते हैं लेकिन राधे के माफ़ी मांगने पर वह उसे इसका पश्चाताप करने को कहते हैं और राधे पश्चाताप करने लग जाता है जोकि काफी मुश्किल होता है। अब राधे का पश्चाताप पूरा हो चूका है और वह पंडित जी से मिलने जाता है मगर अब पंडित जी की दूसरी वाइफ का बेटा दिग्विजय (अतुल कुलकर्णी) भी आ जाता है और राधे को मुकाबले के लिए बोलता है।

राधे इस मुकाबले के लिए कड़ी मेहनत करता है जिसमे उसके पिता, माता, उसके अंकल मदद करते हैं और प्रतियोगिता का दिन आता है। दोनों ही अपना बेहतरीन संगीत प्रस्तुत करते हैं लेकिन इसमें राधे जीत जाता है और पंडित जी का उत्तराधिकारी बन जाता है। लेकिन दिग्विजय ने अभी हार नहीं मानी है और वह राधे को बोलता है की तुम्हारा घराना में लेकर ही रहूँगा जिससे पता लगता है की डायरेक्टर इसके सीजन 2 के बारे में भी सोच रहे हैं, इसके सांथ यह सीरीज यहाँ खत्म हो जाती है।

बंदिश बैंडिट्स सीरीज के किरदार
श्रेया चौधरी: तमन्ना, ऋत्विक भौमिक: राधे, नसीरुद्दीन शाह: पंडित राधेमोहन राठोड, शीबा चड्ढा: मोहिनी, राजेश तैलंग: राजेंद्र, अमित मिस्त्री: देवेंद्र, कुणाल रॉय कपूर: अर्घ्य, राहुल कुमार: कबीर, दिलीप शंकर: राजाजी, अतुल कुलकर्णी: दिग्विजय, ऋतुराज सिंह: हर्षवर्धन, शशि किरण: मुंशी जी, मेघना मालिक: अवंतिका

अगर इस आर्टिकल से रिलेटेड कोई भी सुझाव और शिकायत है तो हमें digitalworldreview@gmail.com पर मेल करें


Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *