लॉक डाउन की बेहतरीन कॉमेडी फिल्म, बहुत हुआ सम्मान फिल्म का रिव्यू हिंदी में, फिल्म में क्या अच्छा है और क्या बुरा, किरदार, फिल्म की कहानी का प्लाट

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बहुत हुआ सम्मान फिल्म कैसी है?
अगर आप लॉक डाउन के चलते काफी ज्यादा परेशान और डिप्रेस हो चुके हैं तो यह फिल्म आपके लिए ही बनी है बस शर्त यह है की इस फिल्म को देखने से पहले आपको अपने दिमाग रिलैक्स देना होगा और सिर्फ यह सोच कर इस फिल्म को देखना है की में इस फिल्म को सिर्फ कॉमेडी के लिए देख रहा हूँ। जी हाँ दोस्तों हम यह पहले ही आपको आगाह करना चाहते हैं की इस फिल्म को देखकर हो सकता है की कुछ विचारधारा या धार्मिक लोगो को ठेस पहुंचा जाये। कुछ ऐसी भाषा और दृश्यों को इसमें दिखाया गया है जोकि आज के समय में हो रहे कुछ फ्रॉड और विचारधारा से प्रभावित तथ्यों को दर्शाती है।

बात करते हैं फिल्म की तो यह फिल्म पूरी तरह से कॉमेडी फिल्म है जिसमे की युवा की सोच, मजबूरी, बेवकूफी और उनके लालच को दर्शाती है। फिल्म में मुख्य भूमिका में आपको नज़र आएंगे राघव जुयाल और अभिषेक चौहान जोकि इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स हैं और बिना मेहनत के अमीर होने का सपना देखते हैं। अब इस सपने को पूरा करने के लिए वह कौन सा गलत कदम उठाते हैं और उन्हें किन किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है यही इस फिल्म की असली कहानी है। फिल्म की असली ताकत इसकी कॉमिक टाइमिंग, हास्य व्यंग और म्यूजिक है। फिल्म को युवाओं से जोड़े रखने के लिए इसमें कॉमिक इफ़ेक्ट का इस्तेमाल किया गया है एक दृश्य से दुसरे दृश्य में जाने के लिए जोकि इससे पहले “मर्द को दर्द नहीं होता” फिल्म में देखने को मिला था।

फिल्म 2 घंटे से ऊपर की है लेकिन फिल्म का स्क्रीनप्ले आपको पहले हाफ में हल्का फुल्का हॅसाता है लेकिन सेकंड हाफ के बाद फिल्म में असली जान आती है जब फिल्म में कुछ और किरदार जुड़ते हैं जैसे राम कपूर, निधि सिंह, सिंह भूपेश और शरत सोनू जोकि कॉमेडी का जबरदस्त डोज़ फिल्म में डाल देते हैं।

आप इस आर्टिकल को इंग्लिश में भी पढ़ सकते हैं।

सिंह भूपेश और शरत सोनू
सिंह भूपेश और शरत सोनू कॉमेडी देखकर आपका पेट जरूर दर्द होने वाला है। इन्होने अपने छोटे से रोल को इतने बेहतरीन तरीके से निभाया की आप सच में राघव और अभिषेक को एक पल के लिए भूल जायेंगे।

संजय मिश्रा
फिल्म के बेहतरीन क्लाइमेक्स के लिए राइटर अविनाश सिंह की तारीफ तो जरूर बनती हैं उन्होंने आखिर में जिस तरह संजय मिश्रा के किरदार को ऊपर उठाया है वह सच में कबीले तारीफ है। इस दृश्य के बाद आप उनके काम की जबरदस्त तारीफ करेंगे, संजय मिश्रा अपने किरदार को इतनी सरलता से परदे पर उतार देते हैं की आप उनकी अदाकारी के कायल हो जाते हैं।

राम कपूर
राम कपूर एक सीरियस किलर के रूप में नज़र आएंगे जोकि काफी सीरियस और सख्त किस्म का इंसान है जिसमे कोई भी दया नहीं है लेकिन सांथ ही वह एक अच्छा स्टोरी टेलर है जोकि हर शिकार से पहले एक कहानी सुनाता है जिसे सुनकर आपको उनके किरदार से जरूर लगाव हो जायेगा। एक किलर को किस तरह से सख्त और फोकस होना चाहिए यह उन्होंने अच्छे से दर्शाया है।

फिल्म में निधि सिंह का काम भी आपको काफी पसंद आने वाला है और सच कहें तो यह ऐसी अदाकारा हैं जिन्हे आपने कितने ही रोल में देखा होगा और हर रोल को इन्होने अच्छे से निभाया है। वहीँ दिब्येंदु भट्टाचार्य और नामित दास के कुछ छोटे रोल हैं जिन्हे दोनों ने ही अच्छे से निभाया है।

बहुत हुआ सम्मान फिल्म हमें देखनी चाहिए?
फिल्म युवाओं को ध्यान में रखकर बनाई गयी है जिसमे कुछ गलतियां जरूर हैं लेकिन कॉमेडी के नज़रिये से फिल्म बेहतरीन है और यह आपको जरूर देखनी चाहिए। यह फिल्म पारिवारिक नहीं है इसलिए आप इस बात को जरूर ध्यान में रखियेगा।

बहुत हुआ सम्मान फिल्म की रेटिंग कितनी है?
इस फिल्म को IMDB पे 7.2 रेट मिला है 10 में से और हम इस फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार (1 स्टार संगीत के लिए देंगे)। जिस प्रकार से पुराने रीमिक्स गानो को इसमें जोड़ा उससे इस फिल्म में सच में जान आ जाती है और आप उस पल को सच में एन्जॉय करोगे।

बहुत हुआ सम्मान फिल्म में क्या अच्छा है?
फिल्म में सभी किरदारों का काम काफी अच्छा है, जिस प्रकार का भोलापन एक कॉलेज के बच्चों में होना चाहिए वह हमें देखने को मिलता है जिस प्रकार फ्रॉड देश में फैलाया जा रहा है इस विषय को भी फिल्म में अच्छे से उतारा गया है।

फिल्म का स्क्रीनप्ले पूरी तरह से कसा हुआ है इसलिए आपको इसे देखकर ज्यादा बोरियत नहीं होगी। ज्यादा एडल्ट दृश्यों को भी फिल्म से दूर रखा गया है जोकि अच्छी बात है।

फिल्म में सभी मुख्य किरदारों को पूरा समय दिया गया है जिससे दर्शक हर किरदार से अच्छे से जुड़ पाते हैं।

बहुत हुआ सम्मान फिल्म में क्या गलत है?
फिल्म का पहले हाफ में आपको हलकी फुलकी ही कॉमेडी दिखती है जहाँ आप थोड़ा बोर जरूर होंगे, ऐसा राघव और अभिषेक के नए होने के कारण हो सकता है क्यूंकि वह हँसाने की कोशिश तो जरूर करते हैं मगर हंसी आती नहीं है। संजय मिश्रा का किरदार भी पहले हाफ में कुछ आपको ज्यादा आनंद नहीं देगा मगर इसके बाद इसमें जबरदस्त बदलाव देखने को मिलता है।

फिल्म में एक्शन दृश्यों की कमी लगती है और जहाँ भी हैं वहां भी कुछ नकली जैसा दिखता है खासतौर से आखिर का फाइटिंग दृश्यों बिलकुल बच्चों जैसा लगता है की आप सामने से गोली चला रहे हैं और दूसरे बन्दे को गोली लग नहीं रही है जबकि दोनों ही गोली चलाना अच्छे से जानते हैं।

फिल्म की बुरी बातें
इस विषय में बात करना भी बहुत जरूरी है क्यूंकि फिल्म हमारे समाज का आइना है और अगर इस तरह के गलत मैसेज हमारे समाज को, युवाओं को गलत दिशा की और प्रेरित कर सकती हैं। फिल्म में कामरेड शब्द का इस्तेमाल किया गया है जिसके जरिये युवा को पढाई छोड़कर बैंक लूटने के लिए प्रेरित किया जाता है जोकि एक गलत मैसेज है भले ही आप इसे पूंजीवाद के ऊपर हमला क्यों न कहें मगर युवाओं को भटकाना कहीं से भी सही नहीं कहा जा सकता है।

बहुत हुआ सम्मान फिल्म के किरदार
संजय मिश्रा: बकचोद बाबा, राम कपूर: लवली सिंह, राघव जुयाल: बोनी, दिब्येंदु भट्टाचार्य: बैरागी आनंद महाराज, अभिषेक चौहान: फंडू, निधि सिंह: बॉबी तिवारी, नामित दास: रजत तिवारी, फ़्लोरा सैनी: सपना रानी, रोहित चौधरी: चंदू भैया, सिंह भूपेश: राजू, शरत सोनू: भोला, दुर्गेश कुमार: पाब्लो यादव

बहुत हुआ सम्मान फिल्म की कहानी का प्लाट हिंदी में
कहानी की शुरुआत होती है दो दोस्तों बोनी, फंडू से जोकि इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स हैं। यह दोनों आलसी हैं और बिना मेहनत के ही पैसे कमाना चाहते हैं इसलिए दोनों का झुकाव बकचोद बाबा की तरफ हो जाता है जोकि इन्हे बैंक लूटने का प्लान बताता है। तीनो इसके लिए प्लान बनाते है पानी की पाइप लाइन की मदद से बैंक में घुसने का मगर इनकी चोरी पकड़ी जाती है लेकिन उनसे पहले ही कोई और पैसे लूटकर चले जाता है।

पुलिस इनसे जानना चाहते हैं की इन्होने पैसे क्यों लूटें मगर पैसे इनके पास न होने के कारण इनकी जमानत हो जाती है। लेकिन उन पैसो में कुछ खास डॉक्यूमेंट होते हैं जोकि कई बड़े लोगो को दिक्कत में डाल सकते थे इसलिए उस डॉक्यूमेंट को पाने के लिए एक किलर को लगाया जाता है। पैसा किलर को मिल जाता है लेकिन डॉक्यूमेंट को नहीं इसलिए वह अब दोनों दोस्तों के पीछे लग जाता है।

अंत के दृश्य में राज़ खुलता है की उस डॉक्यूमेंट में एक ड्रग्स बनाने का फार्मूला है। बोनी, फंडू, बाबा और पुलिस अब इस ड्रग्स के अड्डे पर जाते हैं जहाँ उनका मुकाबला होता है किलर से लेकिन अंत में बोनी, फंडू, बाबा और पुलिस इस अड्डे को तबाह कर देते हैं लेकिन किलर वहां से बच निकलता है। बोनी, फंडू अपनी चालबाज़ी से बड़े लोगो के जरिये से पैसे कमाने में भी कामयाब हो जाते हैं और इसी के सांथ फिल्म यहाँ ख़त्म हो जाती है।

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