‘अखुनि’ फिल्म का रिव्यू, पूरी स्टार कास्ट, फिल्म में क्या अच्छा है और क्या बुरा, फिल्म की कहानी हिंदी में

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‘अखुनि’ फिल्म कैसी  है
‘अखुनि’ फिल्म हमारे देश के नार्थ ईस्ट इंडियन लोगो के लाइफ स्टाइल, उनके ट्रेडिशन और उन्हे अपने ही देश में रहते हुए कैसी मुसीबतों और तानो सामना करना पड़ता है अपने एक ख़ुशी के मौके को सेलिब्रेट करने के लिए, इन सभी पहलुओं को उजागर करती है। फिल्म का विषय काफी अच्छा है और सच कहें तो हम यह रोज़ देखते हैं  मगर इस विषय के ऊपर बहुत कम ही फिल्म बनी हैं जिससे समाज को उनकी गलतियों का एहसास हो। इस फिल्म में आपको ज्यादातर कलाकार नागालैंड और मणिपुर के दिखेंगे और बॉलीवुड के कुछ बेहतरीन कलाकार भी देखने को मिलेंगे।

फिल्म का डायरेक्शन किया है निकोलस खरकोंजोर ने किया है जोकि शिलॉग से बिलोंग करते हैं शायद इसलिए ही उन्होंने फिल्म में बेहतरीन तरीके से इस मुद्दे और परिशानियों से जोड़कर दिखाया है। फिल्म की शूटिंग की गयी है दिल्ली में और यह फिल्म 1 घंटे और 30 मिनट की है जिसे की आप नेटफ्लीक्स पे देख सकते हैं। 

एक छोटी सी बात जरूर कहना चाहेंगे की इस फिल्म में अभी हाल ही में आई एक वेब सीरीज जिसमे नार्थ ईस्ट के लोगो के ऊपर कमेंट मारा गया था तो उसका मुँह तोड़ जवाब दिया गया है इसलिए आपको इस फिल्म को देखकर उस दृश्य को भी जरूर एन्जॉय करना चाहिए। आपको यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए और लोगो को भी बोलना चाहिए इस फिल्म को देखने के लिए।

इस आर्टिकल को आप इंग्लिश में भी पढ़ सकते हैं।

‘अखुनि’ फिल्म में क्या अच्छा है?
फिल्म काफी साफ़ सुथरी और सामाजिक मुद्दे के ऊपर बनायीं हुई एक बेहतरीन फिल्म है जिसमे आपको हल्का फुल्का कॉमेडी और ड्रामा का तड़का देखने को मिलता है।

फिल्म में सभी किरदारों का काम बहुत ही अच्छा है इसलिए आप शुरू से ही किरदारों के सांथ जुड़ जाते हैं और उनके नजरिये से फिल्म को देखने लगते हैं और फिल्म की जो स्टोरी है उसे आसानी से समझ पाते हैं ।

फिल्म में समाज के अच्छे और बुरे तबके को अच्छे से दिखाया गया है जिससे पता लगता है की हर समाज में अच्छे और बुरे लोग हर जगह मौजूद हैं।

‘अखुनि’ फिल्म में क्या बुरा है?
फिल्म आपको सेकंड हाफ के बाद थोड़ा स्लो होती दिखती है जिसका कारण फिल्म के कई ऐसे दृश्य थे जोकि उतने ज्यादा जरूरी नहीं थे।

फिल्म की सबसे बड़ी प्रॉब्लम सायानी गुप्ता से आती है क्यूंकि उन्हें फिल्म में नार्थ ईस्ट का दिखाया गया है और इसके लिए सायानी हिंन्दी भाषा को जबरदस्ती कुछ अलग ही अंदाज में बोलने की कोशिश करती हैं जोकि काफी बनावटी लगता है।

फिल्म का डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले और म्यूजिक
फिल्म का डायरेक्शन काफी अच्छा है और ज्यादा तड़क भड़क न दिखते हुए बहुत सादे तरीके से फिल्म को फिल्माया गया है जोकि फिल्म से लोगो को जोड़ने में सफल होता है।

फिल्म का स्क्रीनप्ले भी अच्छा है लेकिन कहीं कहीं पर फिल्म का पेस थोड़ा कम हो जाता है जिसे जरूर अच्छा किया जा सकता था।

फिल्म में फोल्क म्यूजिक का प्रयोग किया गया है जो सच कहें तो बिलकुल फ्रेश है और आपको सुनने में बहुत अच्छा लगता है।

‘अखुनि’ फिल्म की रेटिंग
इस फिल्म को IMDB पे 7.1 रेट मिला है 10 में से और वहीँ हम इस फिल्म को 5 में से 3.7 स्टार देंगे।

‘अखुनि’ फिल्म की कास्ट
सायानी गुप्ता: उपासना, लीन लैशराम: चंबी, जिम्पा भूतिया: बुनती, तेनज़िंग दल्हा: ज़ोरेम, लवकुम औ: बेंदांग, रोहन जोशी: शिव, असेला जमीर: मिनम, मेरेला इमसोंग: बालमों, डॉली अहलुवालीअ: शिव नानी, विनय पाठक: गजेंदर चौहान – लैंडलॉर्ड, मिलो सुनका: हायना, आकाश भरद्वाज: हिरण्या, एलीएल: चंबी फ्रेंड, दीपांश ढींगरा: शिव गर्लफ्रेंड, पल्लवी बत्रा: सेक्रेटरी डॉटर-इन-लॉ

‘अखुनि’ फिल्म की कहानी हिंन्दी में
फिल्म की कहानी की शुरुआत होती है उपासना (सायानी गुप्ता) और चंबी (लीन लैशराम) से जोकि अपनी एक अच्छी दोस्त की वेडिंग के लिए एक शानदार सरप्राइज का प्लान करते हैं और वह सरप्राइज है एक डिश जिसे अखुनि कहा जाता है। अब फिल्म उपासना और चंबी जोकि एक ही सांथ रहते हैं अपने किराये के कमरे में यह डिश बनाने की कोशिश करते हैं लेकिन अपने मकान मालकिन और पड़ोसियों के जाने के बाद मगर उनका यह प्लान फ़ैल हो जाता है जब माकन मालिक का दामाद गजेंदर चौहान (विनय पाठक) घर पर ही आ जाता है अपने दोस्तों के सांथ। उपासना गजेंदर चौहान के बेटे शिव (रोहन जोशी) के जरिये गजेंदर चौहान को बहार भेजने में सफल हो जाते हैं लेकिंन फिर भी वह कभी सिलेंडर खत्म होने और बाद में डिश को पकाने से आने वाली बदबू की वजह से नहीं वह डिश नहीं बना पाते।

ऐसे में यह लोग कभी अपने दोस्त के घर तो कभी शादी हॉल में जाकर उसे बनाने की भी कोशिश करते हैं लेकिन इन्हे कामयाबी नहीं मिलती क्यूंकि कोई न कोई परेशानी बीच में आ ही जाती है इसी बीच में चंबी को बेइज्जत भी होना पड़ता है जब कुछ लोग उनका मजाक बना रहे होते हैं उनके रूप को लेकर और जब चंबी इसका विरोध करती है तो वही लोग चंबी को थपड़ मार देते हैं लेकिन इसका बदला चंबी ले लेती है उस लड़के को उसी के परिवार के सामने बेइज्जत करके। 

सभी लोग अब हार मान चुके होते हैं की डिश नहीं बन पायेगी लेकिन अंत में ये तेनज़िंग दल्हा इस डिश को गजेंदर चौहान के घर की छत पर बनाने में कामयाब हो जाता हैं और फिल्म के आखिर में एक बहुत ही बेहतरीन सा फोल्क म्यूजिक और नार्थ ईस्ट का ट्रेडिशनल वेडिंग देखने को मिलता है जोकि फिल्म का सबसे अच्छा सीन होता है। जिसमे की सारे दोस्त इकट्ठा होते हैं और शादी और डिश को एन्जॉय करते हैं जिससे की चंबी और उपासना की सहेली काफी ज्यादा खुश हो जाती है और फिल्म यहाँ पे खत्म हो जाती है।

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