1962 द वॉर इन द हिल्स वेब सीरीज का रिव्यू (1962 the war in the hills web series ka hindi review), सीरीज क्या अच्छा है और क्या बुरा, किरदार, सीरीज की कहानी का प्लाट।

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1962 द वॉर इन द हिल्स वेब सीरीज का रिव्यू (1962 the war in the hills web series ka hindi review), सीरीज क्या अच्छा है और क्या बुरा, किरदार, सीरीज की कहानी का प्लाट।

वॉर की बात जब भी जुबान पर आती है तो बेशक हर कोई गोली, बन्दुक और टैंक्स के ख्याल अपने मन में लेकर आएगा। भारत का इन सभी हथियारों से एक पुराना रिश्ता रहा है क्यूंकि भारत ने आज़ादी के बाद से ही कई जंग लड़ी हैं जिसमे से अधिकतर में उसे जीत ही मिली है। देश के इसी जज़्बे को भुनाने की कोशिश कई बार बॉलीवुड इंडस्ट्री ने भी करी है लेकिन सच कहें तो इसमें गिने चुने डायरेक्टर ने ही सफलता हासिल की है क्यूंकि किसी जंग के तनाव और देश भक्ति के जज़्बे को दर्शकों के दिल में उतरना सच में मुश्किल काम है।

महेश मांजरेकर द्वारा डिरेक्टेड 1962 द वॉर इन द हिल्स सीरीज (1962 the war in the hills series) भी एक ऐसी जंग के ऊपर आधारित है जिसमे हमें हार का सामना करना पड़ा था शायद इसी कारण ही जब पहले भी इस वॉर के ऊपर फिल्म बनाई गयी तो वह फिल्म भी उतनी सफल नहीं हुई थी। कहा जा सकता है की इस जंग में भारत की हार को देखना दर्शकों को उतना पसंद नहीं आया शायद इसलिए दर्शक इस युद्व पर बनी फिल्मों को उतना अच्छा रिस्पांस नहीं देते।

लेकिन अगर युद्व की बात की जाये तो जरूर यह जोश से भरी वीर गाथा है जहाँ भारत के केवल 125 जवानो ने 3000 चीनी सैनिको से सामना बड़ी ही बहादुरी के सांथ किया था। इस पूरे युद्व को एक सीरीज के रूप में दिखाने की कोशिश की गयी है और इस सीरीज में आपको 10 एपिसोड्स मिलेंगे जिसमे डायरेक्टर ने एक्शन, ड्रामा और सोल्जर के प्यार को भी परदे पर उतरने की कोशिश की है।

चलिए बात करते हैं 1962 द वॉर इन द हिल्स वेब सीरीज (1962 the war in the hills web series) की जिसमे अभय देओल और कई जाने माने चेहरे भी देखने को मिलेंगे जिसमे अधिकतर कलाकार अपना अच्छा प्रदर्शन देकर इस सीरीज को इस लायक तो बना लेते हैं की यह आपके दिल को छू जाये लेकिन फिर भी देशभक्ति के जज़्बे से भरी यह सीरीज बहुत सी जगहों पर मार खा जाती है।


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1962 द वॉर इन द हिल्स वेब सीरीज की रेटिंग कितनी है (1962 the war in the hills web series ki rating kitni hai)?

इस सीरीज को IMDB पे 10 में से 5.6 की रेटिंग मिली है और हम इस सीरीज को 5 में से 2 स्टार देंगे।


कैसी है 1962 द वॉर इन द हिल्स वेब सीरीज और क्या हमें देखनी चाहिए? (kaisi hai 1962 the war in the hills web series aur kya hamein dekhni chahiye)

सीरीज भले ही अपने ट्रैक से भटकती हुई नज़र आती है लेकिन फिर भी आप इसे एक बार देख सकते हैं।


परफॉरमेंस

आकाश थोसर – सबसे पहले बात करते हैं एक नए और मराठी फिल्मों के उभरते हुए चेहरे आकाश थोसर की जिनका काम सच में काफी अच्छा लगा है। उनकी उपिस्थति आपको एक यंग जवान के रूप में बिलकुल सटीक बैठती है क्यूंकि वह एक आम फौजी की ही तरह लगते हैं किसी मॉडल फौजी की तरह नहीं जोकि फिल्मों में देखने को मिलते हैं।

मैयांग चैंग – एक दुश्मन देश का फौजी जोकि अपने देश से प्यार तो करता है लेकिन इसके सांथ ही एक फौजी की कदर करना भी जनता है यह सब कुछ चैंग ने अपनी अदाकारी से आसानी से निभा दिया जोकि उन्हें फिर से एक अच्छा कलाकार साबित करने में मदद करता है।

अभय देओल – अभय देओल के लिए सच कहें तो फिल्म में उतना प्रभावशाली रोल नहीं लिखा गया है जिसके कारण वह आपको एक अच्छे अदाकार तो लगते हैं लेकिन प्रभावी नहीं।

हेमल इंग्ले आपको नेचुरल एक्ट्रेस की तरह दिखती हैं जिन्हे देखकर लगता है की एक्टिंग करना कितना आसान काम है। हर माहौल को उन्होंने अच्छी तरह से समझा है और उसी के अनुसार उनके अदाकारी देखने लायक है। 

रोहन गंडोत्रा, अनूप सोनी, सुमित व्यास यह सभी आपको कहानी को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हुए लगते हैं जिसमे वह बुरे भी नहीं लगते हैं लेकिन ज्यादा अच्छे भी नहीं लगते।


1962 द वॉर इन द हिल्स वेब सीरीज में क्या अच्छा है

1962 द वॉर इन द हिल्स सीरीज का म्यूजिक काफी अच्छा है जिससे आपको एक आर्मी जवान के सांथ भावनात्मक रिश्ता बन जाता है, बैकग्राउंड म्यूजिक भी आपको युद्ध के माहौल में हमेशा बाधें रखता है।

बहुत सारे दृश्य सच में ऐसे हैं जहाँ आप इस दृश्य में खो जाओगे जिससे आप उस दुःख, गम और ख़ुशी को एहसास करोगे जोकि वहां हो रहा होता है।

सीरीज की सिनेमेटोग्राफी काफी अच्छी है जिसमे आपको एक वॉर जोन के शॉट एंगल और ड्रोन के सांथ देखने को मिलते हैं जोकि एक अच्छा लुक देते हैं।


1962 द वॉर इन द हिल्स वेब सीरीज में क्या बुरा है

1962 द वॉर इन द हिल्स सीरीज का डायरेक्शन बहुत जगहों पर टूट गया है, कहानी में बहुत सारे किरदारों को लेकर उनके पीछे की कहानी दिखने के चक्कर में सीरीज की असल कहानी कहीं खो जाती है। इसके सांथ ही कुछ किरदारों की कहानी सुरु तो होती है मगर उनके अंजाम की पूरी कहानी आपको नहीं दिखाई गयी है।

सीरीज को देखकर आपको लगेगा की कहानी अपने रुट से भटक रही है और वॉर सीरीज की बजाय एक लव स्टोरी में बदलती जा रही है क्यूंकि बहुत सारे लव ट्रैक्स को सीरीज में दिखाया गया है। सीरीज के डायरेक्शन पर सवाल इसलिए भी उठाये जा सकते हैं क्यूंकि आपको बहुत सारे दृश्य नकली लगते हैं चाहे वह सेट की बात हो या एक्शन को फिल्माने की। सीरीज की क्वालिटी में भी आपको बहुत ज्यादा अंतर देखने को मिलता है जोकि इसे एक वॉर फिल्म से जुदा कर देती है।

1962 द वॉर इन द हिल्स तकनिकी रूप से बेकार काम हुआ है क्यूंकि आपको गन, बम और मोर्टार फायर के गिने चुने दृश्य दिखें और उसमे भी सब कुछ नकली जैसा लगे तो सच में आपको यह बिलकुल नहीं लगेगा की आपने एक वॉर फिल्म या सीरीज देखी है।

1962 द वॉर इन द हिल्स सीरीज का स्क्रीनप्ले – सीरीज इतनी ज्यादा लम्बी है की आप सच में बोर हो जाओगे, इतने सारे किरदारों की कहानी दिखाने की जरूरत नहीं थी जिससे सीरीज को छोटा और भावपूर्ण बनाई जा सकती थी।

1962 द वॉर इन द हिल्स वेब सीरीज के writer है चारुदत्त आचार्य, सीरीज के director हैं महेश मांजरेकर और इसके producer है कलिंदर मुलानी, रिची तनेजा, अजय चाको, संजय रे चौधरी, साईकुमार ने।


1962 द वॉर इन द हिल्स वेब सीरीज सीरीज के किरदार (1962 the war in the hills web series ki star cast)

अभय देओल, माही गिल, सुमीत व्यास, रोहन गंडोत्रा, हेमंत कौमर, दिव्यांश मिश्रा, जय पराब, संजय दाधीच, मैयांग चैंग, प्रेम धर्माधिकारी, हेमल इंग्ले, सत्या मांजरेकर, रोशेले राव, विनीत शर्मा, अनूप सोनी, आकाश थोसर, विनीत शर्मा


1962 द वॉर इन द हिल्स वेब सीरीज सीरीज की कहानी का प्लाट (1962 the war in the hills web series ki kahani ka plot)

मेजर सूरज सिंह के नेतृत्व में भारत ने चीन के सांथ 1962 में युद्ध लड़ा था जिसमे लगभग 125 भारतीय सैनिक शामिल थे और चीन के 3000। सीरीज की कहानी भारतीय सैनिको के युद्ध के दौरान होने वाले संघर्ष, टेंशन और बहादुरी को दर्शाती है। इसके सांथ ही इसमें सैनकों के परिवार का देश के बहादुर सिपाहियों के लिए प्यार और चिंता को दिखाने की कोशिश की गयी है। फिल्म में थोड़ा राजनैतिक पहलु को भी दिखाया गया है की एक सैनिक न केवल शारीरिक युद्ध लड़ना होता है बल्कि मानसिक दबाव को भी झेलना पड़ता है।


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